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आरबीआई ने बैंकों और एनबीएफसी के लिए एआईएफ निवेश नियमों को कड़ा किया (RBI Tightens AIF Investment Rules for Banks and NBFCs) | UPSC

RBI Tightens AIF Investment Rules for Banks and NBFCs

RBI Tightens AIF Investment Rules for Banks and NBFCs

RBI Tightens AIF Investment Rules for Banks and NBFCs – 

संदर्भ:

RBI ने बैंकों और NBFCs की AIF स्कीम में निवेश को व्यक्तिगत रूप से 10% और सामूहिक रूप से 20% तक सीमित किया; उधारकर्ता से जुड़ाव पर 5% से अधिक एक्सपोजर होने पर 100% प्रावधान अनिवार्य किया

व्यक्तिगत और सामूहिक निवेश सीमा (AIF में):

संशोधित नियामकीय दिशा-निर्देशों के अनुसार, वैकल्पिक निवेश कोष (Alternative Investment Fund – AIF) योजनाओं में निवेश की निम्नलिखित सीमाएं निर्धारित की गई हैं:

  • व्यक्तिगत निवेश सीमा: कोई भी एकल विनियमित संस्था किसी AIF योजना के कुल कोष (corpus) में 10% से अधिक का निवेश नहीं कर सकती
  • सामूहिक निवेश सीमा: किसी एक AIF योजना में सभी विनियमित संस्थाओं का संयुक्त निवेश कुल कोष के 20% से अधिक नहीं हो सकता

उद्देश्य और प्रभाव:

इस बदलाव का उद्देश्य है:

  • वित्तीय संस्थानों की अत्यधिक निवेश प्रवृत्ति पर नियंत्रण लगाना,
  • निवेश में विविधता (diversification) को बढ़ावा देना और जोखिम को सीमित करना,
  • हितधारकों (stakeholders) की प्रतिक्रिया को शामिल करना, और
  • AIF निवेशों में पारदर्शिता (transparency) और यथोचित जांच (due diligence) को बढ़ावा देने हेतु SEBI के नियामकीय दृष्टिकोण के साथ संगति स्थापित करना

वैकल्पिक निवेश कोष (Alternative Investment Fund – AIF):

परिभाषा:
AIF एक निजी रूप से संग्रहीत (privately pooled) निवेश कोष है, जो निवेशकों से धन एकत्र करता है और इसे पारंपरिक निवेश क्षेत्रों (जैसे शेयर या बॉन्ड) के बाहर के क्षेत्रों में लगाता है।

प्रमुख विशेषताएँ:

  • यह कोष विशेष रूप से उच्च संपत्ति वाले व्यक्तियों (High Net-worth Individuals – HNIs) के लिए उपयुक्त है क्योंकि इसमें न्यूनतम निवेश राशि अधिक होती है।
  • भारत में AIF का नियमन भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) द्वारा किया जाता है।

भारत में AIF के प्रकार:

  1. कैटेगरीI: स्टार्टअप्स और सामाजिक उद्यमों में निवेश
    • यह कोष उन क्षेत्रों में निवेश करता है जोआर्थिक विकास, रोजगार सृजन और सामाजिक प्रभाव को बढ़ावा देते हैं।
    • सरकार इन्हेंप्रोत्साहन (incentives) प्रदान कर बढ़ावा देती है।
  2. कैटेगरीII: प्राइवेट इक्विटी और डेट निवेश
    • ये कोष मुख्य रूप सेप्राइवेट इक्विटी, डेट सिक्योरिटीज और अन्य परिसंपत्तियों में निवेश करते हैं।
    • इन्हें सीधे सरकारी प्रोत्साहन नहीं मिलते, फिर भी येकॉरपोरेट फाइनेंस में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  3. कैटेगरीIII: उच्च जोखिम, उच्च प्रतिफल निवेश
    • यह कोषउन्नत ट्रेडिंग रणनीतियों का उपयोग करता है ताकि अधिकतम लाभ अर्जित किया जा सके।
    • इनमेंजोखिम भी अधिक होता है, लेकिन लाभ की संभावना भी अधिक रहती है

AIFs में निवेश के लाभ:

  1. उच्च रिटर्न की संभावना:पारंपरिक म्यूचुअल फंड की तुलना मेंअधिक रिटर्न की संभावना होती है, हालांकि जोखिम भी अधिक होता है।
  2. विविध पोर्टफोलियो (Diversified Portfolio):निवेशकप्राइवेट इक्विटी, इंफ्रास्ट्रक्चर और रियल एस्टेट जैसे विभिन्न परिसंपत्ति वर्गों में निवेश करके अपने पोर्टफोलियो को विविध बना सकते हैं।
  3. कम बाज़ार अस्थिरता (Low Market Volatility): AIF का शेयर बाजार की उतार-चढ़ाव से कम सीधा संबंध होता है, जिससे यह अनिश्चित समय में अधिक स्थिरता प्रदान करता है।

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