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मध्य प्रदेश में दिखा दुर्लभ एशियाटिक वाइल्ड डॉग (Rare Asiatic Wild Dog spotted in Madhya Pradesh) | UPSC Preparation

Rare Asiatic Wild Dog spotted in Madhya Pradesh

Rare Asiatic Wild Dog spotted in Madhya Pradesh

संदर्भ:

मध्य प्रदेश के रातापानी टाइगर रिजर्व (Ratapani Tiger Reserve) में पहली बार दुर्लभ और लुप्तप्राय एशियाटिक वाइल्ड डॉग (Asiatic Wild Dog), जिसे स्थानीय स्तर पर ‘ढोल’ (Dhole) कहा जाता है, को कैमरा ट्रैप में कैद किया गया है। 

एशियाटिक वाइल्ड डॉग (ढोल): 

  • एशियाटिक वाइल्ड डॉग (Cuon alpinus) कैनिडे परिवार का एक जंगली मांसाहारी जीव है। इसे भारत में ‘रेड डॉग’, ‘व्हिसलिंग डॉग’  या ‘इंडियन वाइल्ड डॉग’ के नाम से भी जाना जाता है। 
  • प्रमुख विशेषताएं:
    • सामाजिक संरचना: ये अत्यधिक सामाजिक प्राणी हैं जो आमतौर पर 5 से 12 सदस्यों के झुंड (Clans/Packs) में रहते हैं। हालांकि, कुछ स्थानों पर 40 तक की संख्या वाले झुंड भी देखे गए हैं।
    • संवाद: ये भौंकते या गुर्राते नहीं हैं, बल्कि आपस में संवाद करने के लिए एक विशेष प्रकार की सीटी जैसी आवाज़ निकालते हैं, जिसके कारण इन्हें ‘व्हिसलिंग डॉग’ कहा जाता है।
    • शिकार की रणनीति: ये दिन के समय शिकार करने वाले (Diurnal) शिकारी हैं जो अपने शिकार को थकने तक पीछा करते हैं। इनके मुख्य शिकार चीतल, सांभर और जंगली सूअर हैं।
    • प्रजनन: इनके झुंड में एक से अधिक मादाएं प्रजनन कर सकती हैं और वे एक ही मांद (Den) में अपने बच्चों का पालन-पोषण कर सकती हैं। 
  • संरक्षण स्थिति: ढोल को वैश्विक स्तर पर विलुप्त होने के उच्च जोखिम वाली श्रेणी में रखा गया है:
    • IUCN रेड लिस्ट: लुप्तप्राय (Endangered)।
    • वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972: अनुसूची-I (Schedule-I) के तहत संरक्षित
    • CITES: परिशिष्ट-II (Appendix-II)। 
  • पारिस्थितिक भूमिका: ढोल ‘एपेक्स प्रेडेटर’ के रूप में कार्य करते हैं। ये शाकाहारी जीवों की आबादी को नियंत्रित कर जंगल के संतुलन को बनाए रखने में मदद करते हैं। 
  • खतरे (Threats): आवास का विखंडन, घरेलू और आवारा कुत्तों से फैलने वाली बीमारियाँ जैसे ‘कैनाइन डिस्टेंपर’ और ‘रेबीज’ इनकी आबादी के लिए बड़ा खतरा हैं।

 रातापानी टाइगर रिजर्व के बारे मे:

  • रातापानी टाइगर रिजर्व, मध्य प्रदेश के रायसेन और सीहोर जिलों में स्थित बाघ अभ्यारण्य है। यह विंध्य पर्वतमाला में स्थित है। 
  • वर्ष 2024 में औपचारिक रूप से भारत का 57वां और मध्य प्रदेश का 8वां टाइगर रिजर्व घोषित।
  • इसका कुल क्षेत्रफल 1271.4 वर्ग किमी (763.8 वर्ग किमी कोर क्षेत्र और 507.6 वर्ग किमी बफर क्षेत्र) है।
  • यहाँ 90 से अधिक बाघों के साथ-साथ तेंदुए, सुस्त भालू (sloth bear), लकड़बग्घा, सांभर और चित्तीदार हिरण पाए जाते हैं।
  • यह क्षेत्र शुष्क और नम पर्णपाती (dry and moist deciduous) प्रकार का है, जिसमें सागौन (55% क्षेत्र) और बांस मुख्य हैं।

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