1000 years of the attack on Somnath Temple

संदर्भ:
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के सोमनाथ मंदिर पर 1026 ईस्वी में हुए पहले बड़े आक्रमण के 1000 वर्ष पूरे होने के अवसर पर एक विशेष ब्लॉग और कार्यक्रम के माध्यम से देश को संबोधित किया। उन्होंने सोमनाथ को भारत की अदम्य जिजीविषा और सांस्कृतिक पुनरुत्थान का प्रतीक बताया।
सोमनाथ मंदिर का परिचय:
- सोमनाथ मंदिर भारत के गुजरात राज्य में वेरावल के पास प्रभास पाटन में स्थित है। यह भारतीय इतिहास, संस्कृति और स्थापत्य कला की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थल है।
- सोमनाथ का अर्थ चंद्रमा के भगवान से है, क्योंकि चंद्रमा ने यहाँ शिव की पूजा की थी।
- सोमनाथ मंदिर को ‘भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रथम’ माना जाता है।
- मंदिर हिरण, कपिला और सरस्वती नामक तीन पवित्र नदियों के संगम (त्रिवेणी संगम) के पास स्थित है।
- प्राचीन काल में, इसकी तटीय स्थिति के कारण यह एक समृद्ध बंदरगाह और व्यापार केंद्र था।
- वर्तमान सोमनाथ मंदिर स्थापत्य की मारू-गुर्जर शैली (चालुक्य या सोलंकी शैली) का उत्कृष्ट उदाहरण है। इसका निर्माण प्रसिद्ध वास्तुकार प्रभाशंकर सोमपुरा के निर्देशन में हुआ।
- इसे ‘कैलाश महामेरु प्रसाद’ स्वरूप में बनाया गया है। जिसके दक्षिण में स्थित बाणस्तंभ (Arrow Pillar) अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिस पर लिखा है कि यहाँ से दक्षिण ध्रुव (Antarctica) तक समुद्र में कोई भू-भाग नहीं है।
- सोमनाथ का संदर्भ ऋग्वेद के प्राचीन ग्रंथों में मिलता है, जो इसकी प्राचीनता सिद्ध करता है।
- सोमनाथ को ‘प्रभास पतन’ के नाम से भी जाना जाता है, जहाँ भगवान कृष्ण ने अपनी देह त्यागी थी।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि:
- तुर्क आक्रमणकारी महमूद गजनी ने जनवरी 1026 में सोमनाथ पर हमला किया। उस समय गुजरात पर सोलंकी राजा भीमदेव प्रथम का शासन था। गजनी ने मंदिर को लूटा और ज्योतिर्लिंग को खंडित कर दिया।
- गजनी के बाद भी यह मंदिर कई बार विदेशी आक्रमणों का शिकार हुआ। 1299 ई. में अलाउद्दीन खिलजी की सेना (उलुग खान के नेतृत्व में) ने इसे नष्ट किया।
- इसके बाद 1395 ई. में जफर खान और 1451 ई. में महमूद बेगड़ा ने इसे निशाना बनाया।
- 1706 ई. में मुगल शासक औरंगजेब ने मंदिर को पूरी तरह नष्ट करने का आदेश दिया। इसके बाद, इंदौर की महारानी ने पास में एक छोटा मंदिर बनवाया।
- मंदिर कम से कम सात बार नष्ट किया गया और हर बार इसका पुनर्निर्माण किया गया।
पुनरुत्थान के प्रयास:
- प्राचीन और मध्यकालीन प्रयास: गजनी के आक्रमण के बाद राजा भीमदेव प्रथम और मालवा के राजा भोज ने मंदिर का पुनर्निर्माण कराया। 12वीं शताब्दी में सोलंकी राजा कुमारपाल ने इसे भव्य पत्थर के ढांचे में बदला।
- अहिल्याबाई होलकर (1782): जब मुख्य मंदिर खंडहर में था, तब इंदौर की महारानी अहिल्याबाई होलकर ने वर्तमान स्थल के पास एक छोटा मंदिर बनवाया ताकि पूजा जारी रह सके।
- सरदार पटेल की भूमिका: 13 नवंबर 1947 को जूनागढ़ की मुक्ति के बाद सरदार पटेल ने मंदिर के पुनर्निर्माण की घोषणा की।
- के.एम. मुंशी का योगदान: उन्होंने ‘सोमनाथ ट्रस्ट’ के माध्यम से मंदिर निर्माण को गति दी और इसे भारतीय अस्मिता का प्रतीक बताया।
- प्राण-प्रतिष्ठा: भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने 11 मई 1951 को मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा की। राजेंद्र प्रसाद ने इसे सांस्कृतिक गौरव की पुनर्स्थापना माना।
- वर्तमान प्रयास: सरकार अब इसे ‘प्रसाद योजना’ (PRASHAD Scheme) के तहत विकसित कर रही है, ताकि धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिले।
