100th Anniversary of Vitthalbhai Patel as First Indian Speaker
संदर्भ:
नई दिल्ली में अखिल भारतीय अध्यक्षों का सम्मेलन आयोजित किया गया, जो विट्ठलभाई पटेल के केंद्रीय विधान सभा के पहले भारतीय अध्यक्ष के रूप में चुने जाने की 100वीं वर्षगांठ को चिह्नित करता है।
केंद्रीय विधायी सभा (Central Legislative Assembly – CLA):
- स्थापना:केंद्रीय विधायी सभा (CLA) ब्रिटिश भारत की निचली सदन (Lower House) थी, जिसे भारत सरकार अधिनियम 1919 (Government of India Act, 1919) के तहत मॉन्टेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधारों के रूप में स्थापित किया गया।
- द्विसदनीय व्यवस्था:1919 के अधिनियम ने द्विसदनीय व्यवस्था (Two-House System) की शुरुआत की, जिसमें –
- केंद्रीय विधायी सभा (CLA) – निचला सदन
- राज्य परिषद (Council of State) – ऊपरी सदन
- गठन:CLA का गठन 1921 में हुआ, जो 1920 के चुनावों के बाद अस्तित्व में आया।
- संरचना (Composition):इसमें कुल 145 सदस्य थे –
- 104 सदस्य चुने हुए (Elected)
- 41 सदस्य गवर्नर-जनरल द्वारा नामित (Nominated)
- पद व कार्य (Powers & Functions):
- बजट पर बहस करना और प्रस्ताव पास करना।
- सदस्य प्रश्न पूछ सकते थे, प्रस्ताव पेश कर सकते थे और अनुदान की मांगों पर मतदान कर सकते थे।
- लेकिन गवर्नर-जनरल के पासवीटो अधिकार (Veto Power) था, और वे सभा की स्वीकृति के बिना भी विधेयक को प्रमाणित (Certify) कर सकते थे।
- समापन:CLA को 14 अगस्त 1947 को भारत की स्वतंत्रता और संविधान सभा के गठन के साथ भंग कर दिया गया।
विठ्ठलभाई पटेल:
अध्यक्ष (Speaker) के रूप में योगदान (1925–1930)
- 1925 में वेकेंद्रीय विधान सभा के पहले भारतीय अध्यक्ष (स्पीकर) बने।
- उन्होंने विधायिका (Legislature) की स्वतंत्रता को कार्यपालिका (Executive) से अलग करने पर जोर दिया औरसंसदीय स्वायत्तता की नींव रखी।
- उन्होंनेविधायी विभाग (Legislative Department) की स्थापना की। बाद में संविधान सभा ने भी इस व्यवस्था को अपनाया और आज भी संसद व राज्य विधानसभाओं में अध्यक्षों के अधीन यह परंपरा जारी है।
राजनीतिक सफर:
- 1912 में संपत्ति योग्यता (Property ownership) के आधार पर चुनाव लड़ने के बाद वेबंबई विधान परिषद (Bombay Legislative Council) के सदस्य बने।
- 1917 में उन्होंनेनि:शुल्क और अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा (Free and Compulsory Elementary Education) का प्रस्ताव रखा। हालाँकि यह बिल लागू नहीं हुआ, पर इससे उनके सुधारवादी दृष्टिकोण का पता चलता है।
- 1920 में वेइम्पीरियल लेजिस्लेटिव असेंबली (Imperial Legislative Assembly) में पहुँचे। यहाँ वे सबसे सक्रिय सदस्यों में से एक थे और एक सत्र में ही उन्होंने 62 प्रश्न पूछे।
गांधीजी से मतभेद:
- 1922 में महात्मा गांधी द्वाराअसहयोग आंदोलन (Non-Cooperation Movement) को वापस लेने के निर्णय से उन्होंने असहमति जताई।
- 1923 में वेस्वराज पार्टी (Swaraj Party) के संस्थापक सदस्य बने। यह पार्टी “प्रो-चेंजर” (Pro-Changer) कहलाती थी, जो मानती थी कि विधानसभाओं में प्रवेश कर औपनिवेशिक शासन की कमजोरियों को उजागर किया जाए।
ऑल इंडिया स्पीकर्स’ कॉन्फ़्रेंस 2025:
- स्पीकर की भूमिका का पुनः स्मरण: स्पीकर न केवल विधानमंडल की गरिमा के संरक्षक हैं, बल्कि लोकतंत्र के सेवक भी हैं, जिनका प्रमुख दायित्व निष्पक्षता बनाए रखना है।
- लोकतंत्र की आत्मा – बहस: यदि संसद और विधानसभाओं में बहस नहीं होगी, तो वे केवल “निर्जीव इमारतें” बनकर रह जाएँगी।
- कानून बनाने के उद्देश्य:
- जनता का कल्याण
- समावेशी विकास
- कार्यकुशलता
- राष्ट्रीय सुरक्षा