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मेलघाट टाइगर रिज़र्व में 15 संकटग्रस्त भारतीय गिद्धों को छोड़ा गया (15 endangered Indian vultures released in Melghat Tiger Reserve) | Apni Pathshala

15 endangered Indian vultures released in Melghat Tiger Reserve

15 endangered Indian vultures released in Melghat Tiger Reserve

संदर्भ:

हाल ही में बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (BNHS) द्वारा महाराष्ट्र के मेलघाट टाइगर रिजर्व में 15 गंभीर रूप से लुप्तप्राय भारतीय गिद्धों (Gyps indicus) को मुक्त किया गया है। इसमें 10 सफेद पीठ वाले (White-rumped) और 5 लंबी चोंच वाले (Long-billed) गिद्धों को छोड़ा है। यह कदम पारिस्थितिकी तंत्र के लिए महत्वपूर्ण है।

भारतीय गिद्ध (Indian Vulture – Gyps indicus):

    • वैज्ञानिक नाम: Gyps indicus (इसे लंबी चोंच वाला गिद्ध भी कहा जाता है)।
    • विशेषता: यह मध्यम आकार का शिकारी पक्षी है, जिसका सिर गंजा होता है और चोंच काफी लंबी व मजबूत होती है। यह मुख्य रूप से पहाड़ियों की चट्टानों पर प्रजनन करता है।
    • पारिस्थितिकी तंत्र में भूमिका: गिद्ध ‘प्रकृति के सफाईकर्मी’ हैं। ये मृत जानवरों के अवशेषों को हटाकर एंथ्रैक्स और रेबीज जैसी बीमारियों के प्रसार को रोकते हैं, जिससे पारिस्थितिक संतुलन बना रहता है।
    • संरक्षण स्थिति: IUCN रेड लिस्ट: गंभीर रूप से लुप्तप्राय (Critically Endangered)।
  • संकट के मुख्य कारण:
      • डिक्लोफेनाक (Diclofenac): मवेशियों के इलाज में प्रयुक्त यह गैर-स्टेरायडल एंटी-इंफ्लेमेटरी दवा (NSAID) गिद्धों के लिए घातक है। इसे खाने वाले मवेशियों के शवों के सेवन से गिद्धों के गुर्दे (Kidneys) फेल हो जाते हैं।
      • अन्य कारण: आवास का विनाश, बिजली की लाइनों से टकराना और खाद्य श्रृंखला में कीटनाशकों का संचय।
  • संरक्षण के प्रयास:
    • Action Plan for Vulture Conservation (2020-25): भारत सरकार की पंचवर्षीय योजना, जिसका उद्देश्य डिक्लोफेनाक मुक्त क्षेत्रों का विस्तार करना और प्रजनन केंद्रों की स्थापना करना है।
    • प्रजनन केंद्र: पिंजौर (हरियाणा), भोपाल, गुवाहाटी और हैदराबाद में ‘जटायु संरक्षण एवं प्रजनन केंद्र’ (JCBC) कार्यरत हैं।
    • गिद्ध सुरक्षित क्षेत्र (Vulture Safe Zones): ऐसे क्षेत्र जहाँ 100 किमी के दायरे में डिक्लोफेनाक का उपयोग शून्य सुनिश्चित किया जाता है।

भारतीय गिद्धों की प्रमुख प्रजातियाँ:

भारत में गिद्धों की 9 प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जिनमें से तीन ‘गंभीर रूप से लुप्तप्राय’ (Critically Endangered) हैं: 

  • सफेद पीठ वाला गिद्ध (White-rumped Vulture) – Critically Endangered
  • लंबी चोंच वाला गिद्ध (Long-billed Vulture) – Critically Endangered
  • पतली चोंच वाला गिद्ध (Slender-billed Vulture) – Critically Endangered
  • लाल सिर वाला गिद्ध (Red-headed Vulture) – Critically Endangered 

मेलघाट टाइगर रिजर्व (MTR): 

  • स्थान: महाराष्ट्र के अमरावती जिले में सतपुड़ा पर्वत श्रृंखला (Satpura Hill Range) के दक्षिणी हिस्से ‘गविलगढ़ पहाड़ी’ (Gavilgarh Hill) पर स्थित है।
  • सीमाएं: इसके उत्तर में ताप्ती नदी और दक्षिण में सतपुड़ा की गाविलगढ़ रिज (Gawilgadh ridge) स्थित है। 
  • स्थापना: यह 1973-74 में ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ के तहत अधिसूचित भारत के पहले नौ बाघ अभयारण्यों में से एक था और महाराष्ट्र का पहला टाइगर रिजर्व है।
  • संरक्षित क्षेत्र: इसमें गुगामल राष्ट्रीय उद्यान, वान, अंबाबरवा और नरनाला अभयारण्य शामिल हैं। 
  • वनस्पति (Flora): यहाँ मुख्य रूप से उष्णकटिबंधीय शुष्क पर्णपाती वन (Tropical Dry Deciduous Forests) पाए जाते हैं, जिनमें सागौन (Teak) की प्रधानता है।
  • जीव-जंतु (Fauna): बाघों के अलावा, यह गंभीर रूप से लुप्तप्राय फॉरेस्ट आउलेट (Forest Owlet) का प्रमुख आवास है। यहाँ स्लॉथ बीयर, भारतीय गौर और तेंदुए भी पाए जाते हैं। 
  • जल निकासी: यह ताप्ती नदी की पाँच प्रमुख सहायक नदियों का जलग्रहण क्षेत्र है: खांडू, खापरा, सिपना, गडगा और डोलर। 
  • जनजातीय समुदाय: यहाँ मुख्य रूप से कोरकू जनजाति (Korku Tribe) निवास करती है।

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