21st Raising Day of National Disaster Response Force

संदर्भ:
राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) ने 19 जनवरी 2026 को अपना 21वां स्थापना दिवस मनाया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बल के जवानों के “साहस, सेवा और समर्पण” की सराहना की है।
राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की स्थापना:
- NDRF की स्थापना 19 जनवरी 2006 को की गई थी। इसका गठन ‘आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005’ के तहत एक विशिष्ट बहु-कुशल बल के रूप में हुआ था।
- 1999 के ओडिशा सुपर साइक्लोन और 2004 की सुनामी जैसी आपदाओं ने देश में एक समर्पित आपदा प्रतिक्रिया बल की आवश्यकता को रेखांकित किया था।
NDRF की संगठनात्मक संरचना:
- नोडल मंत्रालय: यह केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) के अधीन कार्य करता है।
- नेतृत्व: इसका नेतृत्व महानिदेशक (DG) स्तर के IPS अधिकारी करते हैं। वर्तमान में पीयूष आनंद (IPS) इसके महानिदेशक हैं।
- बटालियन: वर्तमान में NDRF में 16 बटालियनें हैं, जिनमें से प्रत्येक में लगभग 1,149 कर्मी होते हैं।
- प्रतिनियुक्ति: यह बल पूरी तरह से केंद्रीय अर्धसैनिक बलों (BSF, CRPF, CISF, ITBP, SSB और असम राइफल्स) से प्रतिनियुक्ति पर आए जवानों से बना है।
- विशेषज्ञ टीमें: प्रत्येक बटालियन में 18 सर्च और रेस्क्यू टीमें होती हैं, जिनमें इंजीनियर, तकनीशियन, डॉग स्क्वाड और मेडिकल पैरामेडिक्स शामिल होते हैं।
ध्येय वाक्य और कार्य:
NDRF का ध्येय वाक्य “आपदा सेवा सदैव सर्वत्र” है। इसके प्रमुख कार्य इस प्रकार हैं:
- त्वरित प्रतिक्रिया: प्राकृतिक और मानव निर्मित आपदाओं (बाढ़, भूकंप, चक्रवात, भूस्खलन) के दौरान तत्काल राहत और बचाव कार्य।
- CBRN रिस्पांस: रासायनिक (Chemical), जैविक (Biological), रेडियोलॉजिकल (Radiological) और परमाणु (Nuclear) आपात स्थितियों से निपटने के लिए विशेष प्रशिक्षण और क्षमता।
- क्षमता निर्माण: नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवकों और स्थानीय समुदायों को आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण देना।
- परामर्श सेवा: राज्य आपदा प्रतिक्रिया बलों (SDRF) को सुदृढ़ करने में मदद करना।
प्रमुख उपलब्धियां:
- जीवन रक्षा: स्थापना से अब तक बल ने 1,59,000 से अधिक लोगों की जान बचाई है और 8.64 लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला है।
- अंतरराष्ट्रीय मिशन: भारत के बाहर भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिसमें 2011 का जापान ट्रिपल डिजास्टर, 2015 का नेपाल भूकंप, 2023 का तुर्की भूकंप (ऑपरेशन दोस्त) और 2025 का म्यांमार भूकंप शामिल हैं।
- स्थानीय राहत: हाल ही में वायनाड भूस्खलन और उत्तराखंड की सिल्क्यारा सुरंग (2023) रेस्क्यू ऑपरेशन में NDRF की भूमिका निर्णायक रही।
