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3D-प्रिंटेड ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन (3D-Printed Automatic Weather Station) | UPSC

3D-Printed Automatic Weather Station

AWS

संदर्भ:

हाल ही में भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा स्वदेशी 3D-प्रिंटेड ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन (AWS) का सफलतापूर्वक निर्माण किया गया है। जिसे फरवरी 2026 से दिल्ली में तैनात करने की योजना बनाई गई है। 

3D-प्रिंटेड ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन (AWS) क्या है?

3D-प्रिंटेड ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन (AWS) एक स्वचालित उपकरण है जो मानवीय हस्तक्षेप के बिना मौसम के विभिन्न मापदंडों को रिकॉर्ड और संचारित करता है। 3D प्रिंटिंग, जिसे एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग भी कहा जाता है, इस तकनीक का मुख्य आधार है। 

  • निर्माण: भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR)

मुख्य घटक: 

      • स्मार्ट सेंसर: तापमान, आर्द्रता, वायु दाब, वर्षा की मात्रा और वायु की गति मापने के लिए उच्च परिशुद्धता वाले सेंसर।
      • डेटा लॉगर: यह एकत्र किए गए डेटा को डिजिटल प्रारूप में सुरक्षित कर सकते है।
      • सैम (SAM – System for Automated Monitoring): एक स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर जो डेटा को प्रोसेस करता है।
      • ऊर्जा स्रोत: यह पूरी तरह से सौर पैनलों और लिथियम-आयन बैटरी बैकअप पर संचालित होता है।
      • कनेक्टिविटी: डेटा भेजने के लिए GAGAN (GPS Aided GEO Augmented Navigation) और LoRaWAN तकनीक का उपयोग किया जाता है।

विशेषता:

    • इन स्टेशनों का निर्माण फ्यूज्ड डिपोजिशन मॉडलिंग (FDM) जैसी 3D प्रिंटिंग तकनीकों का उपयोग करके किया गया है।
    • इसमें उच्च शक्ति वाले पॉलीमर (जैसे ABS या कार्बन-फाइबर प्रबलित प्लास्टिक) का उपयोग किया गया है जो यूवी (UV) विकिरण को सहन कर सकते हैं।
    • पारंपरिक निर्माण के विपरीत, 3D प्रिंटिंग के माध्यम से जटिल घटकों (जैसे स्टीवेन्सन स्क्रीन और सेंसर हाउसिंग) को एक ही बार में सटीक रूप से बनाया जा सकता है।
    • पारंपरिक AWS की तुलना में इनकी लागत लगभग 50-60% कम है।
    • इन्हें स्थानीय स्तर पर प्रिंट और असेंबल किया जा सकता है, जिससे रसद (Logistics) की समस्या कम होती है। 
    • यह ‘मिशन मौसम’ के अंतर्गत तैयार किया गया है। 2026 तक भारत सरकार ने इसके तहत देशभर में 30,000 से अधिक स्टेशन स्थापित करने की योजना पर बनाई है। 
    • यह स्टेशन Artificial Intelligence (AI) और Machine Learning (ML) मॉडल के साथ जोड़ा जा रहा है ताकि पूर्वानुमान की सटीकता को 90% से अधिक तक ले जाया जा सके।

महत्व:

  • कृषि क्षेत्र में क्रांति: भारत एक कृषि प्रधान देश है। 3D-प्रिंटेड AWS किसानों को “ब्लॉक स्तर” पर सटीक मौसम की जानकारी प्रदान करेंगे।  
  • आपदा प्रबंधन: भारत चक्रवात, लू (Heatwaves) और अचानक आने वाली बाढ़ (Flash floods) के प्रति संवेदनशील है। 3D-प्रिंटेड स्टेशनों का घना नेटवर्क ‘अर्ली वार्निंग सिस्टम’ को मजबूत करेगा, जिससे जन-धन की हानि कम होगी। 
  • आत्मनिर्भर भारत: यह पहल पूरी तरह से स्वदेशी है, जो भारत को वैश्विक स्तर पर मौसम तकनीक के निर्यातक के रूप में स्थापित करती है। यह ‘मेक इन इंडिया 2.0’ के लक्ष्यों के अनुरूप है।
  • जलवायु परिवर्तन अनुसंधान: जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को समझने के लिए ये स्टेशन उच्च-रिज़ॉल्यूशन डेटा प्रदान करते हैं, जो जलवायु प्रवृत्तियों का विश्लेषण करने में मदद करते हैं।

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