40th Foundation Day of Arunachal Pradesh and Mizoram
संदर्भ:
20 फरवरी 2026 को भारत के दो महत्वपूर्ण पूर्वोत्तर राज्यों—अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम—ने अपना 40वां स्थापना दिवस मनाया। 20 फरवरी 1987 को इन दोनों क्षेत्रों को पूर्ण राज्य का दर्जा प्राप्त हुआ था, जिससे ये भारतीय संघ के क्रमशः 23वें (मिजोरम) और 24वें (अरुणाचल प्रदेश) राज्य बने।
अरुणाचल प्रदेश की स्थापना और महत्व:
- प्रशासनिक विकास (NEFA से राज्य तक): ब्रिटिश काल में इसे ‘एक्सक्लूडेड एरिया’ माना जाता था। आजादी के बाद इसे नॉर्थ-ईस्ट फ्रंटियर एजेंसी (NEFA) के रूप में जाना गया, जिसका प्रशासन 1972 तक विदेश मंत्रालय के माध्यम से राष्ट्रपति द्वारा चलाया जाता था।
- संवैधानिक यात्रा:
- 20 जनवरी 1972 को इसे केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया और इसका नाम बदलकर ‘अरुणाचल प्रदेश’ किया गया।
- चीन के साथ सीमा विवाद और क्षेत्र के विकास की आवश्यकता को देखते हुए 55वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1986 को पारित किया गया।
- परिणामस्वरूप, 20 फरवरी 1987 को अरुणाचल प्रदेश भारतीय संघ का 24वां पूर्ण राज्य बना।
- विशेष प्रावधान: संविधान के अनुच्छेद 371-H के तहत अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल को कानून-व्यवस्था के मामले में विशेष जिम्मेदारी दी गई है। राज्य की अंतरराष्ट्रीय सीमा (चीन, भूटान, म्यांमार) के कारण यहाँ सुरक्षा और विकास का संतुलन बनाना अनिवार्य है।
- सांस्कृतिक एवं सामरिक महत्व: यह राज्य भारत की 26 प्रमुख जनजातियों का घर है। सामरिक दृष्टि से, तवांग और एलएसी (LAC) की सुरक्षा के लिए यह क्षेत्र भारत की रक्षा नीति का केंद्र बिंदु है। हाल के वर्षों में ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’ के माध्यम से यहाँ सीमावर्ती बुनियादी ढांचे को सशक्त किया गया है।
मिजोरम की स्थापना और महत्व:
- ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: स्वतंत्रता के समय मिजोरम असम का एक हिस्सा था जिसे ‘लुशाई हिल्स’ जिला कहा जाता था। 1959 में आए ‘मौतम अकाल’ के दौरान असम सरकार की कथित उपेक्षा के कारण असंतोष बढ़ा, जिससे मिजो नेशनल फ्रंट (MNF) का जन्म हुआ।
- संवैधानिक यात्रा:
- वर्ष 1972 में इसे केंद्र शासित प्रदेश घोषित किया गया।
- 30 जून 1986 को केंद्र सरकार और लालडेंगा के नेतृत्व वाले MNF के बीच ‘मिजो शांति समझौता’ हुआ।
- इसी के आधार पर 53वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1986 द्वारा 20 फरवरी 1987 को मिजोरम भारत का 23वां राज्य बना।
- विशेष संवैधानिक सुरक्षा: भारतीय संविधान का अनुच्छेद 371-G मिजोरम को विशेष दर्जा प्रदान करता है। इसके तहत संसद मिजो लोगों की धार्मिक-सामाजिक प्रथाओं, उनके पारंपरिक कानूनों और भूमि के स्वामित्व के संबंध में तब तक कोई कानून नहीं बना सकती, जब तक राज्य विधानसभा इसकी अनुमति न दे।
- महत्व: आज मिजोरम अपनी उच्च साक्षरता दर और ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ के तहत कदान मल्टी-मॉडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट के कारण भारत के लिए सामरिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है। केरल के बाद मिजोरम भारत का दूसरा सबसे अधिक साक्षरता वाला राज्य है। यहाँ का ‘चेरव’ (Cheraw) या बाँस नृत्य विश्व प्रसिद्ध है।

