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भारतीय तटरक्षक बल की स्थापना की 50वीं वर्षगांठ (50th anniversary of the establishment of the Indian Coast Guard) | Apni Pathshala

50th anniversary of the establishment of the Indian Coast Guard

50th anniversary of the establishment of the Indian Coast Guard

संदर्भ:

भारतीय तटरक्षक बल (ICG) ने 1 फरवरी 2026 को अपनी स्थापना की 50वीं वर्षगांठ (स्वर्ण जयंती) मनाई, जो राष्ट्र के समुद्री हितों की रक्षा के पाँच दशकों के गौरवशाली सफर का प्रतीक है। 1977 में मात्र 7 पुराने जहाजों के साथ शुरू हुआ यह बल आज दुनिया का चौथा सबसे बड़ा तटरक्षक बल बन चुका है। 

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और विकास:

  • रुस्तमजी समिति: 1970 के दशक में बढ़ती समुद्री तस्करी को रोकने के लिए के.एफ. रुस्तमजी की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया था, जिसने एक अलग तटरक्षक सेवा की सिफारिश की।
  • स्थापना: अंतरिम बल का गठन 1 फरवरी 1977 को हुआ, जबकि औपचारिक स्थापना 18 अगस्त 1978 को तटरक्षक अधिनियम 1978 के तहत की गई।

संरचना और कमान:

  • मुख्यालय: इसका मुख्य मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है।
  • आदर्श वाक्य: इसका ध्येय वाक्य “वयं रक्षाम:” (हम रक्षा करते हैं) है।
  • क्षेत्रीय कमान: प्रभावी निगरानी के लिए भारत के समुद्री तट को 5 क्षेत्रों में विभाजित किया गया है: मुंबई (पश्चिमी क्षेत्र), चेन्नई (पूर्वी क्षेत्र), कोलकाता (उत्तर-पूर्वी क्षेत्र), गांधीनगर (उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र), पोर्ट ब्लेयर (अंडमान और निकोबार क्षेत्र)
  • नेतृत्व: वर्तमान में इसके 26वें महानिदेशक परमेश शिवमणि हैं। 

प्रमुख कार्य और जिम्मेदारियाँ:

  • समुद्री सुरक्षा: भारत के 2.01 मिलियन वर्ग किमी के विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) की सुरक्षा।
  • तस्करी रोकथाम: अवैध मादक पदार्थों और अन्य प्रतिबंधित वस्तुओं की तस्करी रोकना। अब तक बल ने लगभग ₹54,413 करोड़ के मादक पदार्थ जब्त किए हैं।
  • खोज और बचाव (SAR): समुद्र में संकटग्रस्त लोगों की जान बचाना। अपनी स्थापना से अब तक बल ने 11,806 से अधिक जीवन बचाए हैं।
  • पर्यावरण संरक्षण: समुद्री प्रदूषण और विशेष रूप से तेल रिसाव (Oil Spill) की घटनाओं पर नियंत्रण पाना।
  • मछुआरों की सुरक्षा: समुद्र में भारतीय मछुआरों की सहायता और विदेशी शिकारियों से उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना।

तकनीकी शक्ति और आत्मनिर्भरता:

  • वर्तमान बेड़ा: वर्तमान में बल के पास लगभग 155 जहाज और 80 विमान हैं।
  • लक्ष्य 2030: बल ने वर्ष 2030 तक अपनी क्षमता बढ़ाकर 200 जहाज और 100 विमान करने का लक्ष्य रखा है।
  • स्वदेशीकरण: ‘मेक इन इंडिया’ के तहत अधिकांश नए पोत और विमान (जैसे स्वदेशी उन्नत हल्के हेलीकॉप्टर – ALH Mk III) भारत में ही निर्मित किए जा रहे हैं। 

सामरिक महत्व:

  • SAGAR दृष्टिकोण: ‘Security and Growth for All in the Region’ (SAGAR) के माध्यम से आईसीजी हिंद महासागर क्षेत्र में स्थिरता सुनिश्चित करता है।
  • वैश्विक शिखर सम्मेलन: भारत वर्ष 2027 में चेन्नई में 5वें तटरक्षक वैश्विक शिखर सम्मेलन (CGGS) की मेजबानी करेगा, जो इसके अंतरराष्ट्रीय पहचान को दर्शाता है।
  • चाहबहार यात्रा: हाल ही में आईसीजी जहाज ‘सार्थक’ ने ईरान के चाबहार बंदरगाह का दौरा किया, जो मध्य एशिया के साथ भारत के बढ़ते रणनीतिक संबंधों को मजबूती देता है।

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