India-EU Free Trade Agreement
संदर्भ:
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने ब्रसेल्स में आयोजित जर्मन मार्शल फंड (GMF) फोरम को संबोधित करते हुए कहा कि भारत–यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता वर्ष 2025 के अंत तक पूर्ण रूप से संभव है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत, यूरोपीय संघ के साथ अपने द्विपक्षीय संबंधों को अत्यंत उच्च प्राथमिकता देता है, और इन संबंधों का केन्द्रीय तत्व यही मुक्त व्यापार समझौता है, जिसकी वार्ताएँ तेजी से और सकारात्मक रूप से आगे बढ़ रही हैं।
India-EU Free Trade Agreement (FTA): प्रमुख तथ्य–
- समझौते की समयसीमा तय: भारत और यूरोपीय संघ ने 2025 के अंत तक FTA को अंतिम रूप देने का लक्ष्य तय किया है।
- वार्ताओं की पुनः शुरुआत: यह वार्ता 2007 में शुरू हुई थी, लेकिन 2017 में ब्रेग्ज़िट के कारण रुक गई थी। इसे 2022 में दोबारा शुरू किया गया।
- सबसे बड़ा व्यापार समझौता: यह FTA वैश्विक स्तर पर अपने प्रकार का सबसे बड़ा समझौता बनने जा रहा है।
व्यापारिक उद्देश्य:
- बाज़ार तक पहुंच में सुधार
- व्यापार बाधाओं को हटाना
- द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देना
वर्तमान व्यापार स्थिति (2023-24):
- वस्तुओं का व्यापार: 41 अरब USD
- सेवाओं का व्यापार: 45 अरब USD
मुख्य वार्ता क्षेत्र:
- निवेश संरक्षण समझौता (Investment Protection Agreement)
- भौगोलिक संकेत (Geographical Indications – GI)
- ये दोनों FTA के पूरक होंगे और एक व्यापक आर्थिक सहयोग ढांचा तैयार करेंगे।
रणनीतिक महत्त्व:
- भारत और EU दोनों ही अमेरिका से संभावित अधिक आयात शुल्क के दौर से गुजर रहे हैं।
- यह साझेदारी बाजार विविधीकरण और निर्भरता घटाने में सहायक होगी।
वृहद सहयोग क्षेत्र:
- अर्धचालक , कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI)
- 6G टेक्नोलॉजी
- हरित हाइड्रोजन
- भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक कॉरिडोर
आर्थिक और भू–राजनीतिक संदर्भ: वैश्विक परिदृश्य में बदलाव के बीच यह FTA रणनीतिक स्वायत्तता और आर्थिक लचीलापन बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम है।
भारत के लिए लाभ:
- बढ़ता बाज़ार पहुँच (Market Access): टेक्सटाइल, परिधान, चाय, मसालेजैसे उत्पादों पर टैरिफ में कमी से EU बाज़ार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।
- महत्वपूर्ण क्षेत्रों को बढ़ावा:
- फार्मा:जेनेरिक दवाओं को आसानी से मंजूरी और बाज़ार तक पहुँच।
- आईटी और सेवाएँ:पेशेवरों की आवाजाही और व्यापार नियमों में राहत।
- कृषि और प्रोसेस्ड फूड:कम शुल्क, कम नियम।
- FDI को प्रोत्साहन: EU भारत में बड़ा निवेशकहै। FTA से निर्माण, नवीकरणीय ऊर्जा, इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश बढ़ेगा।
- बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) मजबूत: तकनीक ट्रांसफर और नवाचार को बढ़ावा।
- रोजगार सृजन और आर्थिक विकास:
- निर्यात और निवेश बढ़ने से लाखों नौकरियाँविशेष रूप से टेक्सटाइल, आईटी और निर्माण क्षेत्रों में मिलेंगी।
- GDP वृद्धिऔर वैश्विक व्यापार में भारत की स्थिति मजबूत होगी।
EU के लिए लाभ:
- भारत जैसे बड़े उपभोक्ता बाज़ार तक पहुँच:
- 4 अरब की जनसंख्याEU ब्रांड्स के लिए बड़ी संभावना।
- ऑटोमोबाइल, मशीनरी, लक्जरी वस्तुओं की बिक्री में वृद्धि।
- बेहतर निवेश माहौल:
- निवेश सुरक्षा और पारदर्शिताबढ़ेगी।
- डिजिटल अर्थव्यवस्था में अवसर:फिनटेक, एआई, टेलिकॉम के लिए नई संभावनाएँ।
- सप्लाई चेन विविधीकरण: चीन पर निर्भरता घटाकर भारत से आपूर्ति, EU की रणनीति से मेल।