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विशेष आर्थिक क्षेत्रों (Special Economic Zones) | UPSC Preparation

Special Economic Zones

Special Economic Zones

संदर्भ:

भारत सरकार ने हाल ही में सेमीकंडक्टर एवं इलेक्ट्रॉनिक्स के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विशेष आर्थिक क्षेत्रों (SEZs) से संबंधित कुछ प्रमुख नियमों में छूट प्रदान की है। यह संशोधन उच्च प्रौद्योगिकी क्षेत्र में घरेलू उत्पादन को सुदृढ़ करने, निवेश को आकर्षित करने तथा मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसे राष्ट्रीय कार्यक्रमों को गति देने के दृष्टिकोण से किया गया है। 

(Special Economic Zones) स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन (SEZ) क्या है?
  • SEZ (विशेष आर्थिक क्षेत्र) देश के भीतर ऐसे चिन्हित क्षेत्र होते हैं जहाँ व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के लिए विशेष रियायतें दी जाती हैं।
  • ये ज़ोन सामान्य राष्ट्रीय नियमों से अलग होते हैं और व्यवसायिक माहौल को अधिक प्रतिस्पर्धात्मक और अनुकूल बनाते हैं।

SEZ के मुख्य उद्देश्य:

  • अतिरिक्त आर्थिक गतिविधियों को उत्प्रेरित करना।
  • निर्यात (वस्तुओं और सेवाओं) को बढ़ावा देना।
  • विदेशी और घरेलू निवेश को आकर्षित करना।
  • रोज़गार के अवसरों में वृद्धि करना।
  • अवसंरचना सुविधाओं का विकास करना।

 SEZ में मिलने वाली प्रमुख सुविधाएँ:

  • शुल्क मुक्त निर्यात की सुविधा।
  • आयकर और कस्टम ड्यूटी में छूट जैसी कर प्रोत्साहन योजनाएँ।
  • बेहतर बुनियादी ढाँचा और एकल खिड़की (single window) मंजूरी प्रणाली।
  • व्यापार और विनियमन में सरलीकरण और तेज़ प्रक्रिया।

SEZ के प्रमुख प्रकार:

  • फ्री ज़ोन (Free Zones), औद्योगिक संपदा (Industrial Estates), फ्री पोर्ट (Free Ports), फ्री ट्रेड ज़ोन (FTZs), एक्सपोर्ट प्रोसेसिंग ज़ोन (EPZs)

भारत में विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZs): एक संक्षिप्त विवरण

इतिहास और विकास:

  • एशिया का पहला EPZ (Export Processing Zone): 1965 में कांडला, गुजरात में स्थापित किया गया।
  • इसके बाद भारत में सात और EPZs बनाए गए।

SEZ नीति की शुरुआत:

  • अप्रैल 2000 में भारत सरकार ने SEZ नीति की घोषणा की, जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास को गति देना है।
  • इसमें उच्च गुणवत्ता वाले बुनियादी ढांचे और आकर्षक प्रोत्साहन पैकेज (केंद्रीय और राज्य स्तर पर) का प्रावधान किया गया।

EPZ से SEZ में रूपांतरण

  • पहले से मौजूद 8 EPZs को SEZ में बदला गया:
    • कांडला, सूरत (गुजरात)
    • मुंबई (महाराष्ट्र)
    • कोचीन (केरल)
    • चेन्नई (तमिलनाडु)
    • विशाखापत्तनम (आंध्र प्रदेश)
    • फाल्टा (पश्चिम बंगाल)
    • नोएडा (उत्तर प्रदेश)

कानूनी आधार

  • SEZ अधिनियम, 2005: मई 2005 में संसद द्वारा पारित किया गया।
  • SEZ नियम के साथ मिलकर यह अधिनियम 10 फरवरी 2006 से प्रभावी हुआ।

वर्तमान स्थिति (31 मार्च 2024 तक): भारत में 280 ऑपरेशनल SEZs कार्यरत हैं।

SEZ नियमों में हालिया शिथिलताएं (Recent Relaxations in SEZ Rules):

  1. भूमि संबंधी आवश्यकता में ढील:
  • सेमीकंडक्टर/इलेक्ट्रॉनिक घटक SEZs के लिए न्यूनतम भूमि सीमा 50 हेक्टेयर से घटाकर 10 हेक्टेयर कर दी गई है।
  1. एन्कम्ब्रेंसफ्री (बाधारहित) भूमि की शर्त में छूट:
  • अब SEZ उन भूमि पर भी स्थापित किए जा सकते हैं जिन पर कानूनी या प्रशासनिक विवाद लंबित हैं, अर्थात भूमि का पूरी तरह बाधारहित होना आवश्यक नहीं है।
  1. घरेलू आपूर्ति की अनुमति: सेमीकंडक्टर व इलेक्ट्रॉनिक सेक्टर के SEZ इकाइयों को अब देश के भीतर भी बिक्री की अनुमति दी गई है, उचित शुल्कों के भुगतान के बाद।

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