Foreign Universities Impact Higher Education in India
संदर्भ:
भारत में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक नया अध्याय शुरू हो गया है। यूनाइटेड किंगडम, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, कनाडा और इटली जैसे देशों के प्रतिष्ठित विदेशी विश्वविद्यालय अब भारत में अपने कैंपस खोलने की तैयारी में हैं, खासतौर पर गुजरात के GIFT सिटी और नवी मुंबई जैसे क्षेत्रों में।
यह बदलाव विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा जारी “विदेशी उच्च शिक्षण संस्थानों के भारत में परिसरों की स्थापना और संचालन संबंधी विनियम, 2023” के लागू होने के बाद संभव हो पाया है। यह कदम भारतीय शिक्षा व्यवस्था के अंतरराष्ट्रीयकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक प्रगति माना जा रहा है।
Foreign Universities Impact Higher Education in India-
- जनसांख्यिकीय गिरावट और अव्यवहृत विश्वविद्यालय ढांचा:द्वितीय विश्व युद्ध के बाद कई विकसित देशों (Global North) ने उच्च शिक्षा का तेजी से विस्तार किया। लेकिन अब इन देशों में जन्म दर घटने के कारण छात्रों की संख्या कम हो रही है, जिससे उनके विश्वविद्यालयों की सुविधाएं पूरी तरह उपयोग नहीं हो पा रही हैं।
- अंतरराष्ट्रीय छात्रों पर बढ़ती निर्भरता: शिक्षा में सरकारी खर्च में कटौती के कारण, इन देशों के विश्वविद्यालय अब अंतरराष्ट्रीय छात्रों पर अधिक निर्भर हो गए हैं, क्योंकि वे घरेलू छात्रों की तुलना में अधिक शुल्क देते हैं।
उदाहरण के लिए:
- यू.के. में 22% छात्र अंतरराष्ट्रीय हैं
- ऑस्ट्रेलिया में 24%
- कनाडा में 30%
- अमेरिका के आइवी लीग संस्थानों में 27%
- विदेशों में नीति में बदलाव: ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और यू.के. जैसे देशों ने हाल ही में अंतरराष्ट्रीय छात्रों की संख्या पर सीमाएं लगानी शुरू की हैं, जिससे विश्वविद्यालयों को वित्तीय नुकसान हो रहा है।
- भारत एक नया अवसर: भारत की बड़ी युवा आबादी, बढ़ती मध्यवर्गीय क्षमता और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की बढ़ती मांग को देखते हुए विदेशी विश्वविद्यालय भारत को एक बड़े अवसर के रूप में देख रहे हैं।
भारत में कैंपस खोलने से उन्हें:
- नए छात्रों तक पहुंच
- राजस्व के नए स्रोत
- अपने ब्रांड का वैश्विक विस्तार — जैसे लाभ मिल सकते हैं।
भारत में विदेशी विश्वविद्यालय परिसरों के लाभ:
- बेहतर शैक्षणिक गुणवत्ता: वैश्विक शिक्षण पद्धति, प्रशिक्षित फैकल्टी और शोध पर जोर मिलेगा।
- कम लागत में अंतरराष्ट्रीय डिग्री: विदेश जाए बिना भारत में ही अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा उपलब्ध होगी।
- विदेशी मुद्रा की बचत: हर साल शिक्षा पर विदेश भेजे जाने वाले लगभग $60 अरब की बचत होगी।
- ब्रेन ड्रेन में कमी: देश में ही उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा से प्रतिभा पलायन रुकेगा।
- उद्योग–अकादमिक सहयोग: STEM, AI, फिनटेक आदि क्षेत्रों में अनुसंधान और साझेदारी को बढ़ावा मिलेगा।
- नवाचार और स्टार्टअप अवसर: GIFT सिटी व नवी मुंबई जैसे क्षेत्रों में इंटर्नशिप और उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा।
भारत में विदेशी विश्वविद्यालय परिसरों की चुनौतियाँ:
- सीमित प्रारंभिक प्रभाव: प्रारंभिक वर्षों में नामांकन की संख्या कम रहेगी, जिससे असर सीमित होगा।
- लागत और पहुंच की चिंता: यदि विदेशी फीस संरचना लागू हुई, तो यह आम भारतीय छात्रों के लिए महंगी साबित हो सकती है।
- संचालन संबंधी बाधाएँ: भूमि अधिग्रहण, फैकल्टी भर्ती, और मान्यता जैसे मुद्दे अभी भी चुनौती बने हुए हैं।
- पूर्व विफलताओं का उदाहरण: मलेशिया, यूएई और चीन में कुछ विदेशी कैंपस कम नामांकन या सांस्कृतिक असमानता के कारण विफल रहे हैं।