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जैव ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए MNRE ने बायोमास दिशा-निर्देशों में संशोधन (MNRE Revises Biomass Guidelines to Boost Bio Energy) | UPSC

MNRE Revises Biomass Guidelines to Boost Bio Energy

MNRE Revises Biomass Guidelines to Boost Bio Energy

MNRE Revises Biomass Guidelines to Boost Bio Energy –

संदर्भ:

नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) ने राष्ट्रीय बायोएनेर्जी कार्यक्रम के चरण1 (Phase-I) के तहत बायोमास कार्यक्रम के लिए संशोधित दिशानिर्देश जारी किए हैं। इन दिशा-निर्देशों का उद्देश्य बायोमास आधारित ऊर्जा परियोजनाओं को बढ़ावा देना और स्वच्छ एवं सतत ऊर्जा स्रोतों के उपयोग को प्रोत्साहित करना है।

संशोधित दिशानिर्देशों की प्रमुख विशेषताएँ:

  1. सरल प्रक्रियाएँ: कागजी कार्यवाही और अनुमोदन की बाधाएं कम की गईं, विशेषकर MSMEs के लिए लाभकारी।
  • ब्रिकेट/पैलेट निर्माण इकाइयों के लिए दस्तावेज़ीकरण आवश्यकताओं में ढील।
  1. तकनीकी एकीकरण:
  • महंगे SCADA सिस्टम की जगह IoT आधारित निगरानी या त्रैमासिक डेटा सबमिशन को बढ़ावा।
  • डिजिटल उत्तरदायित्व सुनिश्चित करते हुए संचालन लागत में कमी।
  1. बाज़ार लचीलापन:
  • पहले की 2-वर्षीय अनुबंध की अनिवार्यता हटाकर सामान्य विक्रय समझौता (General Sale Agreement) की अनुमति दी गई।
  • इससे उद्योग बाज़ार मांग के अनुसार तेजी से समायोजन कर सकेंगे।
  1. प्रदर्शनआधारित सब्सिडी:
  • Central Financial Assistance (CFA) के अंतर्गत:
    • ≥80% दक्षता वाले प्रोजेक्ट को पूर्ण सब्सिडी
    • <80% दक्षता वाले प्रोजेक्ट को प्रोराटा आधार पर सब्सिडी।
  1. निरीक्षण मानदंड का सरलीकरण (Rationalized Inspection Criteria):
  • निरीक्षण अब कमीशनिंग या इन-प्रिंसिपल अप्रूवल के 18 महीने के भीतर हो सकता है।
  • 3 दिनों (16 घंटे/दिन) की संचालन शर्त घटाकर 1 दिन (10 घंटे की लगातार अवधि) की गई।
  1. क्षेत्रीय समन्वय: दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और NCR (राजस्थान और उत्तर प्रदेश) के बायोमास पैलेट उत्पादक अब MNRE या CPCB योजनाओं में से किसी एक का चयन कर सकते हैं, जो अधिक लाभकारी हो।

बायोमास (Biomass) क्या है?

परिभाषा: बायोमास उन सजीव स्रोतों से प्राप्त जैविक पदार्थों को कहते हैं जो वनस्पतियों और जानवरों से उत्पन्न होते हैं। इसका उपयोग ऊर्जा उत्पादन सहित अनेक उद्देश्यों के लिए किया जाता है।

शामिल घटक:

  • वनों का अपशिष्ट, कृषि कार्यों से उत्पन्न अवशेष, उद्योगों से उत्पन्न जैविक प्रोसेस्ड अपशिष् , नगरपालिका/शहरी ठोस कचरा

भारत में उत्पादन स्थिति:

  • भारत में प्रति वर्ष लगभग 750 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) बायोमास का उत्पादन होता है।
  • इसमें से लगभग 228 MMT बायोमास अधिशेष (surplus) होता है, जिसका उपयोग ऊर्जा उत्पादन आदि में किया जा सकता है।

राष्ट्रीय जैव ऊर्जा कार्यक्रम:

उद्देश्य: देश में उपलब्ध अधिशेष बायोमास, पशु गोबर, औद्योगिक और शहरी जैविक कचरे का उपयोग ऊर्जा उत्पादन के लिए करना।

प्रमुख विशेषताएँ:

  • यह कार्यक्रम ऊर्जा पुनर्प्राप्ति (Energy Recovery) को बढ़ावा देता है।
  • कार्यक्रम के अंतर्गत केंद्रीय वित्तीय सहायता (Central Financial Assistance – CFA) प्रदान की जाती है।

CFA किन घटकों :पर लागू होती है:

  • बिजली उत्पादन (Power Generation)
  • बायोगैस/बायो-CNG उत्पादन (Biogas/BioCNG Generation)
  • ब्रिकेट/पैलेट निर्माण (Briquette/Pellet Manufacturing)

संशोधित दिशानिर्देशों का उद्देश्य:

  • स्वीकृत संयंत्रों को समय पर वित्तीय सहायता सुनिश्चित करना।
  • नए बायोमास संयंत्रों की स्थापना को प्रोत्साहित करना।
  • कृषि अपशिष्ट के सतत प्रबंधन को बढ़ावा देना।
  • पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण की समस्या का समाधान करना।
निष्कर्ष:
ये संशोधन हरित ऊर्जा, पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आयवृद्धि की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं।

 

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