Household Savings
संदर्भ:
भारत की घरेलू बचत दर (Household Savings Rate) वर्ष 2022–23 में गिरकर GDP के 29.7% पर आ गई, जो पिछले 40 वर्षों में सबसे निचला स्तर है।
- यह दर 2011–12 में 6% थी, यानी इसमें उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है।
हाउसहोल्ड सेविंग्स (Household Savings):
हाउसहोल्ड सेविंग्स क्या होती है?
- हाउसहोल्ड सेविंग्स = घरेलू शुद्ध व्यय योग्य आय – कुल उपभोग व्यय (जिसमें कर और ऋण भुगतान भी शामिल होते हैं)।
- यह दर्शाती है कि कोई परिवार वर्तमान उपभोग को स्थगित कर भविष्य की सुरक्षा, निवेश या आपात स्थिति के लिए कितना बचा सकता है।
भारत में हाउसहोल्ड सेविंग्स: हालिया रुझान
- घरेलू सकल बचत दर:
- 2011–12 में: 34.6% (GDP का हिस्सा)
- 2022–23 में: 29.7% — चार दशकों में सबसे कम स्तर
- घरेलू वित्तीय बचत:
- 2020–21 में: 11.5% (GDP के अनुपात में)
- 2022–23 में: गिरकर सिर्फ 1% रह गई
- घरेलू देनदारियाँ: FY24 में: बढ़कर4% of GDP — 17 वर्षों में सबसे ऊँचे स्तर के करीब
- शहरी–ग्रामीण बचत अंतर:
- शहरी परिवार:
- बेहतर वित्तीय साक्षरता और औपचारिक वित्तीय पहुँच
- अधिक म्यूचुअल फंड व इक्विटी में निवेश
- ग्रामीण परिवार:
- अधिकतर अनौपचारिक बचत तरीकों पर निर्भर
- आय में झटकों के प्रति अधिक संवेदनशील
- शहरी परिवार:
- म्यूचुअल फंड और शेयरों में निवेश:
- FY21 में: ₹1.02 लाख करोड़
- FY23 में: बढ़कर ₹2.02 लाख करोड़ — लगभग दोगुना
घरेलू आय में गिरावट के प्रमुख कारण:
- मैक्रोइकोनॉमिक कारक:
- लगातार उच्च मुद्रास्फीति (Inflation): खरीद शक्ति में गिरावट, जिससे वास्तविक आय कम हुई।
- Fisher Dynamics के अनुसार: ब्याज दरों में वृद्धि और नाममात्र आय में धीमी वृद्धि से बचत की क्षमता घटी।
- वास्तविक वेतन में गिरावट (Decline in Real Wages):
- खासकर अनौपचारिक क्षेत्र में वेतन स्थिर या गिरते हुए।
- युवा बेरोजगारी व अर्ध–रोज़गार के कारण आय में वृद्धि सीमित।
- इसका प्रत्यक्ष असर घरेलू बचत क्षमता पर पड़ा।
- परंपरागत बचत साधनों में गिरावट:
- बैंक जमा और लघु बचत योजनाओं पर वास्तविक ब्याज दरें बहुत कम।
- इससे लोग पारंपरिक बचत उत्पादों में निवेश से विमुख हुए।
- उपभोग और निवेश व्यवहार में बदलाव:
- Post-Covid उपभोग में तेजी, जिससे: उपभोग, आवास और शिक्षा के लिए ऋण बढ़ा।
- जोखिमपूर्ण निवेश की ओर रुझान:
- इक्विटी और म्यूचुअल फंड में निवेश बढ़ा।
- SIP योगदान:
- 2016 में ₹3,122 करोड़ से
- 2025 में ₹26,632 करोड़ — 8.5 गुना वृद्धि
- आकांक्षात्मक खर्च में वृद्धि:
- शहरी मध्यम वर्ग का ध्यान अब:
- लाइफस्टाइल उत्पादों,
- विदेश यात्रा,
- वर्तमान में जीने पर केंद्रित।
- यह प्रवृत्ति परंपरागत बचत प्रवृत्ति को कमजोर कर रही है।