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IMO की 134वीं बैठक (134th meeting of IMO) | UPSC

134th meeting of IMO

134th meeting of IMO

134th meeting of IMO – 

संदर्भ:

लंदन में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) परिषद के 134वें सत्र के दौरान भारत ने एक बार फिर समुद्री सुरक्षा और लैंगिक समानता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। इस मंच पर भारत ने सुरक्षित, समावेशी और सतत समुद्री परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देने की अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत किया।

IMO की 134वीं बैठक में भारत के प्रमुख हस्तक्षेप

  1. IMO-नेतृत्व वाली समुद्री दुर्घटनाओं की जांच की मांग:
  • भारत ने हाल की दो बड़ी समुद्री घटनाओं को उठाया:
    • MSC ELSA 3 का डूबना (मई 2025, कोच्चि के तट पर) – जहाज पर खतरनाक सामग्री मौजूद थी।
    • WAN HAI 503 पर आग व विस्फोट (जून 2025, केरल तट पर) – जिसमें कंटेनर खोने और खतरनाक रसायनों के रिसाव की घटनाएँ हुईं।
  • भारत की मांग:
    • IMO इन घटनाओं की व्यापक जांच कराए।
    • IMDG कोड (International Maritime Dangerous Goods Code) के तहत लिथियम-आयन बैटरियों और अन्य खतरनाक वस्तुओं के परिवहन मानकों की समीक्षा हो।
    • पैकेजिंग, घोषणा, स्टोवेज और निगरानी के अंतरराष्ट्रीय प्रोटोकॉल को सुदृढ़ किया जाए।
  1. IMO-नेतृत्व में वैश्विक मानकीकरण का प्रस्ताव:
  • दुर्घटनाओं के लिए उत्तरदायी मानक प्रोटोकॉल बनाए जाएं।
  • संपूर्ण जहाज संचालन सुरक्षा बढ़ाने के लिए वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाएं अपनाई जाएं।
  1. सागर में सम्मान पहल का प्रदर्शन: यह पहल 2024 में भारतीय शिपिंग महानिदेशालय (Directorate General of Shipping) द्वारा शुरू की गई।
  • उद्देश्य:
    • समुद्री कार्यस्थल को सुरक्षित और समावेशी बनाना।
    • महिलाओं की भागीदारी को सभी स्तरों पर बढ़ावा देना — नाविक से लेकर नेतृत्व तक।
  • उपलब्धि: भारत में महिला नाविकों की संख्या में 650% की वृद्धि दर्ज की गई।

अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO):

परिचय:

  • IMO संयुक्त राष्ट्र की एक विशेषीकृत एजेंसी है, जो अंतरराष्ट्रीय शिपिंग को नियंत्रित करने के लिए जिम्मेदार है।
  • इसका मुख्यालय लंदन, यूनाइटेड किंगडम में स्थित है।

मुख्य उद्देश्य:

  1. नौवहन की सुरक्षा और सुरक्षा सुनिश्चित करना: IMO वैश्विक स्तर पर जहाजों की सुरक्षा और समुद्री संचालन की सुरक्षा बढ़ाने के लिए नियम और मानक विकसित करता है।
  2. पर्यावरण संरक्षण:
    • IMO का एक प्रमुख कार्य जहाजों से समुद्री प्रदूषण को रोकना है—जैसे तेल रिसाव, रासायनिक अपशिष्ट, प्लास्टिक, वायु प्रदूषण आदि।
    • MARPOL (Marine Pollution) जैसे प्रमुख समझौतों को लागू करना इसका हिस्सा है।
  3. कानूनी ढांचा: IMO समुद्री दायित्व, मुआवजा, और प्रदूषण घटनाओं से संबंधित कानूनी मुद्दों पर भी काम करता है।
  4. प्रभावी और टिकाऊ नौवहन प्रणाली: IMO सतत और दक्ष समुद्री परिवहन को बढ़ावा देता है, जो वैश्विक व्यापार और पर्यावरण दोनों के लिए आवश्यक है।
  5. वैश्विक मानकीकरण: IMO के सभी नियम और संधियाँ इस तरह से तैयार की जाती हैं कि वे सार्वभौमिक रूप से स्वीकृत और लागू की जा सकें—ताकि समुद्री कानूनों और सुरक्षा उपायों में वैश्विक एकरूपता बनी रहे।

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