Nomination of members to rajya sabha
Nomination of members to rajya sabha –
संदर्भ:
भारत के राष्ट्रपति ने राज्यसभा के लिए चार प्रतिष्ठित व्यक्तियों को नामित किया है। इनमें शामिल हैं: पूर्व विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला, वरिष्ठ अधिवक्ता उज्ज्वल निकम, सामाजिक कार्यकर्ता सी. सदानंदन मास्टर, और इतिहासकार मीनाक्षी जैन। इन नामांकनों का उद्देश्य राज्यसभा में विविध अनुभवों और विशेषज्ञताओं को शामिल कर नीतिनिर्माण को और समृद्ध बनाना है।
राज्यसभा में नामित सदस्यों से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य
संख्या और कार्यकाल:
- संख्या: भारत के राष्ट्रपति 12 सदस्यों को राज्यसभा में नामित करते हैं।
- कार्यकाल: इनका कार्यकाल 6 वर्ष का होता है।
नामांकन का उद्देश्य:
- यह प्रावधान कला, साहित्य, विज्ञान और समाज सेवा जैसे क्षेत्रों में विशेष योगदान देने वाले व्यक्तियों को सम्मान देने के लिए किया गया है।
संवैधानिक आधार:
- अनुच्छेद 80(1)(a): राष्ट्रपति को राज्यसभा में 12 सदस्यों के नामांकन का अधिकार देता है।
- अनुच्छेद 80(3): नामित सदस्य वे होंगे जिनके पास विशेष ज्ञान या व्यावहारिक अनुभव हो निम्नलिखित क्षेत्रों में:
- साहित्य
- विज्ञान
- कला
- समाज सेवा
अन्य संवैधानिक संदर्भ: चौथी अनुसूची और अनुच्छेद 4(1) के अंतर्गत राज्यसभा के गठन से संबंधित प्रावधानों का उल्लेख है, जिसमें नामित सदस्यों की व्यवस्था भी शामिल है।
राज्यसभा के नामित सदस्यों के अधिकार और विशेषाधिकार
संसद में समान अधिकार:
- नामित सदस्य संसद की कार्यवाही में निर्वाचित सांसदों के समान सभी अधिकार, विशेषाधिकार और प्रतिरक्षा (immunities) प्राप्त करते हैं।
कार्यवाही में भागीदारी: ये सदस्य संसद की बहसों, चर्चाओं और संसदीय समितियों में पूरा भाग ले सकते हैं।
मतदान अधिकार (Voting Rights) में सीमाएँ:
- राष्ट्रपति के चुनाव में मतदान नहीं कर सकते।
- उप–राष्ट्रपति के चुनाव में मतदान कर सकते हैं।
राजनीतिक दल से जुड़ने का प्रावधान:
- अनुच्छेद 99 के अनुसार, नामित सदस्य को किसी राजनीतिक दल में शामिल होने के लिए 6 महीने की अवधि दी जाती है।
राज्यसभा की संरचना (Composition of the Rajya Sabha)
कुल सदस्य संख्या:
- कुल 245 सदस्य, जिनमें शामिल हैं:
- 233 निर्वाचित सदस्य – राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करते हैं (विधानसभाओं द्वारा निर्वाचित)।
- 12 नामित सदस्य – राष्ट्रपति द्वारा नामांकित, जिन्हें कला, साहित्य, विज्ञान और सामाजिक सेवा में विशेष योगदान के आधार पर चुना जाता है।
स्थायी निकाय (Permanent House):
- राज्यसभा एक स्थायी सदन है — इसे भंग नहीं किया जा सकता।
द्विवार्षिक सेवानिवृत्ति (Biennial Retirement):
- हर दो वर्ष में एक–तिहाई सदस्य सेवानिवृत्त होते हैं।
- सेवानिवृत्त सदस्यों की भरपाई हेतु चुनाव कराए जाते हैं।