Jarawa tribe
संदर्भ:
2027 की जनगणना में अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह की छह प्रमुख आदिवासी जनजातियों, जिनमें जंगली जारवा जनजाति भी शामिल है, की गणना के विशेष प्रयास किए जाएंगे। यह पहल इन आदिवासी समुदायों की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान को दर्ज करने उनके संरक्षण और कल्याण के लिए योजनाएं बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
जरवा जनजाति (Jarawa tribe) –
- जरवा जनजाति विश्व की सबसे प्राचीन और जीवित आदिवासी जनजातियों में से एक है।
- ये पारंपरिक रूप से नॉमेडिक हंटर–गैदरर्स (घुमंतू शिकारी-संग्राहक) के रूप में मध्य और दक्षिण अंडमान द्वीप समूह के घने जंगलों में रहते हैं।
- ऐतिहासिक रूप से ये बाहरी लोगों के प्रति शत्रुतापूर्ण रहे हैं और 1990 के दशक के अंत तक संपर्क से बचते थे।
- ये आमतौर पर 40–50 लोगों के छोटे समूहों में रहते हैं और वन एवं समुद्री संसाधनों पर निर्भर रहते हैं।
जनगणना एवं जनसंख्या आंकड़े
- 2011 की जनगणना के अनुसार, जरवा जनसंख्या 380 थी (अंडमान-निकोबार की कुल 28,530 अनुसूचित जनजातियों की आबादी में)।
- इस क्षेत्र की अन्य ST जनजातियाँ: अंडमानीज़, निकोबारीज़, शोम्पेन, ओंगे, सेंटिनलीज़
- इनमें से केवल निकोबारीज़ को छोड़कर सभी जनजातियाँ PVTG (अत्यंत संवेदनशील जनजातीय समूह) के अंतर्गत आती हैं।
हालिया स्थिति (2025)
- 2025 के आधिकारिक अनुमानों के अनुसार, जरवा जनसंख्या बढ़कर 647 हो गई है।
- इसका श्रेय बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं और मृत्यु दर में कमी को दिया गया है।
- PM-JANMAN योजना (प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान) के तहत: अब तक 191 PVTG व्यक्तियों की पहचान अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में की गई है।
महत्वपूर्ण तथ्य
- जरवा जनजाति की रक्षा और संरक्षण के लिए विशेष कानून और सीमित संपर्क नीति लागू है।
- अंडमान ट्रंक रोड का निर्माण जरवा क्षेत्र के पास से होता है, जिससे संस्कृति और जीवनशैली पर खतरा बढ़ा है।
- जरवा समुदाय को आधुनिक संपर्क और हस्तक्षेप से बचाकर उनकी पारंपरिक जीवनशैली को संरक्षित करना एक बड़ी नीति चुनौती है।