Black Hole Merger
Black Hole Merger –
संदर्भ:
वैज्ञानिकों ने अब तक देखी गई सबसे बड़ी ब्लैक होल टक्कर से उत्पन्न सिग्नल्स का पता लगाया है, जो ब्रह्मांड में होने वाली सबसे शक्तिशाली खगोलीय टक्करों के अध्ययन में एक ऐतिहासिक उपलब्धि मानी जा रही है। यह खोज गुरुत्वीय तरंगों के माध्यम से की गई है और यह ब्लैक होल भौतिकी तथा ब्रह्मांड की उत्पत्ति को समझने में नई संभावनाएं खोलती है।
घटना के बारे में:
- इस घटना का नाम GW231123 रखा गया, जिसे 23 नवंबर 2023 को गुरुत्वाकर्षण तरंगों का पता लगाने वाले वैश्विक नेटवर्क — LIGO, Virgo और KAGRA — द्वारा दर्ज किया गया।
- इस टक्कर में दो ब्लैक होल शामिल थे जिनका द्रव्यमान क्रमशः हमारे सूर्य के द्रव्यमान से 100 और 140 गुना अधिक था। इनके विलय से 225 सौर द्रव्यमान वाला अंतिम ब्लैक होल बना — जो अब तक देखे गए सबसे भारी ब्लैक होल विलयों में से एक है।
क्या हैं Gravitational Waves?
- गुरुत्वीय तरंगें (Gravitational Waves) अंतरिक्ष-समय (space-time) की सतह पर उत्पन्न सूक्ष्म तरंगें हैं।
- इन्हें सबसे पहले 1916 में अल्बर्ट आइंस्टीन ने अपनी सापेक्षता के सामान्य सिद्धांत (General Theory of Relativity) के तहत परिकल्पित किया था।
- ये तरंगें तब उत्पन्न होती हैं जब कोई बहुत भारी वस्तु—जैसे दो ब्लैक होल या न्यूट्रॉन स्टार—एक-दूसरे की ओर खिंचकर अंततः टकरा जाती हैं।
कैसे उत्पन्न होती हैं?
- जब कोई ब्रह्मांडीय पिंड बहुत तेज़ी से गति करता है या टकराता है, तो यह अंतरिक्ष-समय में लहरें या कंपन (ripples) पैदा करता है।
- ये तरंगें प्रकाश की गति से चारों ओर फैलती हैं और जब पृथ्वी तक पहुंचती हैं, तो वे दूरी और समय में बेहद सूक्ष्म बदलाव लाती हैं।
कैसे पहचान की जाती हैं?
- इन सूक्ष्म कंपन को मापने के लिए बनाए गए हैं विशेष उपकरण, जिन्हें कहते हैं:
- LIGO (USA) – Laser Interferometer Gravitational-Wave Observatory
- Virgo (Italy)
- KAGRA (Japan)
इंटरफेरोमीटर कैसे काम करता है?
- LIGO जैसे डिटेक्टर दो लंबी भुजाओं वाला एल–आकार का इंटरफेरोमीटर होता है:
- प्रकाश की किरणें दोनों भुजाओं में भेजी जाती हैं और वापस लौटती हैं।
- सामान्यतः दोनों किरणें एक-दूसरे को नष्ट कर देती हैं (destructive interference)।
- लेकिन यदि गुरुत्वीय तरंग आती है, तो भुजाओं की लंबाई में माइक्रोमीटर से भी छोटे स्तर पर बदलाव होता है।
- यह बदलाव interferometer को संकेत देता है कि गुरुत्वीय तरंग गुज़री है।
ब्लैक होल (Black Holes):
परिभाषा:
ब्लैक होल अंतरिक्ष का एक ऐसा क्षेत्र होता है जहां गुरुत्वाकर्षण इतना तीव्र होता है कि प्रकाश तक वहां से बाहर नहीं निकल सकता। इसका प्रभाव इतना शक्तिशाली होता है कि समय, द्रव्यमान और ऊर्जा की पारंपरिक समझ वहां असफल हो जाती है।
ब्लैक होल के प्रकार:
- स्टेलर–मास ब्लैक होल (Stellar-mass):
- बनते हैं विशाल तारों की मृत्यु के बाद।
- आमतौर पर कुछ से लेकर दर्जनों सौर द्रव्यमान तक होते हैं।
- इंटरमीडिएट–मास ब्लैक होल (Intermediate-mass):
- सैकड़ों से हज़ारों सौर द्रव्यमान तक।
- उदाहरण: हालिया खोज GW231123 का अवशेष।
- सुपरमैसिव ब्लैक होल (Supermassive):
- करोड़ों से अरबों सौर द्रव्यमान तक।
- हर आकाशगंगा के केंद्र में मौजूद होते हैं (जैसे – हमारी आकाशगंगा के केंद्र में Sagittarius A* )।
वैज्ञानिक और सैद्धांतिक महत्व:
- ज्योतिपरक मॉडल की चुनौती (Challenges to Astrophysical Models):
- GW231123 जैसी घटनाएं ब्लैक होल निर्माण, अत्यधिक गुरुत्व में पदार्थ का व्यवहार, और ब्रह्मांडीय नियमों की हमारी समझ को नया रूप देने में सहायक हैं।
- ब्रह्मांडीय प्रभाव (Cosmological Impact):
- हर गुरुत्वीय तरंग या ब्लैक होल विलय का अवलोकन हमें ब्लैक होल की संख्या, वितरण, और ब्रह्मांडीय इतिहास में उनके विकास की जानकारी देता है।