America will leave UNESCO
America will leave UNESCO –
संदर्भ:
संयुक्त राज्य अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र की सांस्कृतिक और शैक्षिक एजेंसी यूनेस्को (UNESCO) से हटने का निर्णय लिया है। यह फैसला कई राजनीतिक और वैचारिक मतभेदों के चलते लिया गया है, जिससे वैश्विक सांस्कृतिक सहयोग और शिक्षा क्षेत्र में अमेरिकी भूमिका पर असर पड़ सकता है।
UNESCO के बारे में (United Nations Educational, Scientific and Cultural Organization)
- स्थापना: 1945 में द्वितीय विश्व युद्ध के बाद; इसका संविधान 1946 में प्रभाव में आया।
- उद्देश्य: शिक्षा, विज्ञान, संस्कृति और संचार के माध्यम से शांति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना।
- मुख्यालय: पेरिस, फ्रांस
- सदस्य देश:
- कुल 194 सदस्य देश
- 12 सहयोगी सदस्य
- (जुलाई 2025 तक; संयुक्त राज्य अमेरिका ने जुलाई 2023 में पुनः सदस्यता ली)
प्रमुख शासी निकाय (Governing Bodies)
- जनरल कॉन्फ्रेंस (General Conference)
- कार्यकारी बोर्ड (Executive Board)
UNESCO की प्रमुख रिपोर्टें
- ग्लोबल एजुकेशन मॉनिटरिंग रिपोर्ट (Global Education Monitoring Report)
- संयुक्त राष्ट्र विश्व जल विकास रिपोर्ट (UN World Water Development Report)
- UNESCO विज्ञान रिपोर्ट: 2030 की ओर (UNESCO Science Report: Towards 2030)
- ग्लोबल ओशन साइंस रिपोर्ट (Global Ocean Science Report)
महत्वपूर्ण कार्यक्रम और पहल
- मानव और जीवमंडल कार्यक्रम (Man and the Biosphere – MAB Programme) – शुरू हुआ 1971 में
- अंतरराष्ट्रीय जलविज्ञान कार्यक्रम (International Hydrological Programme – IHP)
- ग्लोबल जियोपार्क नेटवर्क (Global Geoparks Network)
- विश्व धरोहर सम्मेलन (World Heritage Convention) – स्वीकृत 1972 में
- UNESCO क्रिएटिव सिटीज नेटवर्क (UNESCO Creative Cities Network – UCCN)
अमेरिका द्वारा UNESCO से बाहर निकलने के कारण
- इज़राइल विरोधी झुकाव का आरोप
अमेरिका का कहना है कि UNESCO का रवैया इज़राइल के प्रति पक्षपाती (anti-Israel bias) रहा है। - “अमेरिका फर्स्ट” नीति से असंगत विचारधारा
अमेरिका का मानना है कि UNESCO कुछ सामाजिक और सांस्कृतिक मुद्दों को बढ़ावा देता है जो उसकी“America First” विदेश नीति के अनुकूल नहीं हैं। - संगठन में मूलभूत सुधार की आवश्यकता
अमेरिका को लंबे समय से UNESCO की कार्यप्रणाली और संरचना मेंबुनियादी सुधारों की आवश्यकता को लेकर चिंता रही है।
UNESCO से अमेरिका के हटने के प्रभाव
वित्तीय और संरचनात्मक प्रभाव
- अमेरिका UNESCO का एकप्रमुख वित्तीय योगदानकर्ता रहा है।
- इसके हटने सेUNESCO की बजट व्यवस्था पर गहरा असर पड़ा है, जिससे शिक्षा, संस्कृति और धरोहर संरक्षण से जुड़े कई कार्यक्रम बाधित हो सकते हैं।
वैश्विक धरोहर और विज्ञान पर असर
- UNESCO दुनियाभर कीविश्व धरोहर की निगरानी करता है।
- अमेरिका में 26 धरोहर स्थल UNESCO सूची में हैं।
- इन स्थलों को अबसंरक्षण के लिए धन और वैश्विक मान्यता मिलने में कठिनाई हो सकती है।
- साथ ही, नई धरोहर स्थलों के चयन में अमेरिका की भागीदारी भी घट सकती है।
भूराजनीतिक और कूटनीतिक प्रभाव
- अमेरिका की अनुपस्थिति से वैश्विक मंच परअन्य शक्तियों (विशेषकर चीन) को अधिक प्रभाव जमाने का मौका मिल सकता है।
- इसेबहुपक्षीय व्यवस्था से अमेरिका की पीछे हटने के रूप में देखा गया, जिससे अन्य देश भी UN एजेंसियों को कम प्राथमिकता दे सकते हैं।