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फ्रांस फिलिस्तीन को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता (France will recognizes Palestine as an independent nation) | UPSC

France will recognizes Palestine as an independent nation

France will recognizes Palestine as an independent nation

France will recognizes Palestine as an independent nation – 

संदर्भ:

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने वैश्विक राजनीति में एक बड़ा कदम उठाते हुए घोषणा की है कि उनका देश सितंबर में फिलिस्तीन को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में आधिकारिक मान्यता देगा।

142 देशों ने फिलिस्तीन को स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में दी मान्यता:

  • संयुक्त राष्ट्र (UN) के 193 सदस्य देशों में से अब तक कम से कम142 देशों ने फिलिस्तीन को एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र के रूप में मान्यता दे दी है या ऐसा करने की योजना बना चुके हैं।
  • हालांकि, संयुक्त राज्य अमेरिकायूनाइटेड किंगडम, औरजर्मनी जैसे कुछ प्रभावशाली पश्चिमी राष्ट्र अब भी इस मान्यता से इन्कार कर रहे हैं।

फ्रांस द्वारा फिलिस्तीन को मान्यता:

  1. प्रतीकात्मक मान्यता: वेस्ट बैंक, गाज़ा पट्टी और पूर्वी यरुशलम जैसे क्षेत्र अब भी इज़राइली नियंत्रण में हैं, इसलिए यह मान्यता मुख्यतः प्रतीकात्मक है।
  2. फ्रांस का महत्व: फ्रांस में यूरोप की सबसे बड़ी यहूदी और मुस्लिम आबादी रहती है। ऐसे में यह कदम केवल कूटनीतिक नहीं, सामाजिक और राजनीतिक संदेश भी देता है।
  3. वैश्विक समर्थन में विस्तार: यह निर्णय अब तक इज़राइल आलोचक सीमित देशों तक सिमटे समर्थन को व्यापक अंतरराष्ट्रीय स्वरूप दे सकता है।
  4. इज़राइल का अंतरराष्ट्रीय अलगाव: गाज़ा में “मानव निर्मित भुखमरी” जैसे संकट ने इज़राइल को वैश्विक आलोचना के घेरे में ला दिया है, जिसे यह कदम और उजागर करता है।
  5. दोराष्ट्र समाधान का समर्थन: राष्ट्रपति मैक्रों का उद्देश्य दो-राष्ट्र समाधान की अवधारणा को जीवित रखना है, भले ही उस पर भारी दबाव हो।
  6. रणनीतिक समयनिर्धारण: यह निर्णय आगामी UN सम्मेलन से ठीक पहले लिया गया है, जिसे फ्रांस-सऊदी अरब संयुक्त रूप से आयोजित करने वाले हैं—दूसरे देशों को प्रेरित करने की मंशा।
  7. घरेलू राजनीतिक उद्देश्य: 2027 में कार्यकाल पूरा करने वाले मैक्रों, 2033 के चुनावों की तैयारी में हैं। मुस्लिम समुदाय (13% आबादी) का समर्थन प्राप्त करने की रणनीति।

हमास और इज़राइल के बीच वर्तमान संघर्ष की जड़ें

फिलिस्तीन का विभाजन

  • द्वितीय विश्व युद्ध (WWII) के दौरान बड़ी संख्या में यहूदी फिलिस्तीन में आकर बस गए और स्वतंत्र यहूदी राष्ट्र की मांग करने लगे।
  • 1947 में संयुक्त राष्ट्र (UN)ने फिलिस्तीन को यहूदियों और अरबों के बीच विभाजित करने का प्रस्ताव रखा।
    • यहूदियों ने इस प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए1948 में इज़राइल की स्वतंत्रता की घोषणा कर दी।
    • अरब देशों ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया, जिससे अरब-इज़राइल के बीचचार प्रमुख युद्ध हुए।

1978 कैम्प डेविड समझौता और इज़राइल की मान्यता:

  • 1973 का यौम किप्पुर (Yom Kippur) या रमजान युद्धचौथा अरब-इज़राइल युद्ध था, जिसमें मिस्र और सीरिया के नेतृत्व में अरब देशों ने इज़राइल से लड़ाई की।
  • इस युद्ध के परिणामस्वरूप1978 में कैम्प डेविड समझौते पर हस्ताक्षर हुए, जिसमें पहली बार किसी अरब देश (मिस्र) ने इज़राइल को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता दी।
  • इसके बदले मेंइज़राइल ने सीनाई प्रायद्वीप मिस्र को लौटा दिया।

1993 ओस्लो समझौता और हमास का विरोध:

  • 1993 में हुए ओस्लो समझौतेके अंतर्गत PLO (पैलेस्टाइन लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन) ने आधिकारिक रूप से इज़राइल को मान्यता दी, और बदले में इज़राइल ने गाजा और वेस्ट बैंक में सीमित स्वशासन की अनुमति दी।
  • लेकिनहमास, एक उग्रपंथी संगठन, ने इस समझौते का विरोध किया और वह आज भी इज़राइल की राज्य सत्ता को मान्यता नहीं देता
  • PLO, जिसकी स्थापना1964 में हुई थी, संयुक्त राष्ट्र में गैरसदस्य पर्यवेक्षक राज्य  के रूप में फिलिस्तीन का प्रतिनिधित्व करता है।
  • दूसरी ओर, हमास गाजा पट्टी (Gaza Strip) में राजनीतिक और सैन्य नियंत्रण रखता है और उसे आतंकी संगठन के रूप में भी वर्गीकृत किया गया है।

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