RBI-DPI
RBI-DPI –
संदर्भ:
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) का डिजिटल पेमेंट इंडेक्स (DPI) मार्च 2025 तक बढ़कर 493.22 हो गया, जबकि सितंबर 2024 में यह 465.33 था, जो देश में डिजिटल पेमेंट को अपनाए जाने को दर्शाता है।
- भारतीय डिजिटल भुगतान: परिदृश्य
- लेन-देन का आंकड़ा (2019-20 से 2024-25): पिछले 6 वित्तीय वर्षों में 65,000 करोड़ से अधिक डिजिटल लेन-देन हुए, जिनका कुल मूल्य 12,000 लाख करोड़ रुपये से अधिक है।
- वंचित समुदायों को लाभ: डिजिटल भुगतान ने वंचित और अप्रवेशित वर्गों को वित्तीय सेवाओं तक बेहतर पहुंच प्रदान की है।
- सरकार की भागीदारी: सरकार, RBI, NPCI, फिनटेक्स, बैंक और राज्य सरकारों के साथ मिलकर टियर-2 और टियर-3 शहरों में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा दे रही है।
- PIDF की स्थापना (2021): Payments Infrastructure Development Fund (PIDF) के तहत टियर-3 से टियर-6 शहरों, पूर्वोत्तर राज्यों और जम्मू-कश्मीर में डिजिटल भुगतान ढांचा बढ़ाया गया।
- 31 मई 2025 तक 77 करोड़ डिजिटल टच पॉइंट्स लगाए गए।
- MSME और छोटे व्यवसायों के लिए पहलें:
- BHIM-UPI के छोटे लेन-देन पर प्रोत्साहन योजना
- TReDS (Trade Receivables Discounting System) के माध्यम से चालानों की छूट
- डेबिट कार्ड लेन-देन पर MDR का सरलीकरण
- UPI और डिजिटल मंचों का प्रभाव:
- छोटे व्यापारी, ग्रामीण उपयोगकर्ता भी डिजिटल भुगतान स्वीकार कर पा रहे हैं।
- नकद पर निर्भरता घटी है और औपचारिक अर्थव्यवस्था में भागीदारी बढ़ी है।
- लेनदेन का रिकॉर्ड वित्तीय संस्थानों को क्रेडिट प्रोफाइल बनाने में मदद करता है।
- RBI का डिजिटल भुगतान सूचकांक (RBI-DPI):
- डिजिटल भुगतान के स्तर को मापने हेतु RBI ने यह सूचकांक विकसित किया।
- आधार वर्ष: मार्च 2018 (Index = 100)
- सितंबर 2024 में यह सूचकांक 33 पर पहुंचा।
- इसे पहली बार जनवरी 2021 में लॉन्च किया गया था।
- डिजिटल भुगतान सूचकांक (RBI-DPI) के मायने क्या है?
- यह ट्रेंड भारत में डिजिटल इंडिया अभियान, स्मार्टफोन की बढ़ती पहुंच और फिनटेक इनोवेशन द्वारा समर्थित भुगतान व्यवस्था के बदलाव को दर्शाता है।
- RBI के अनुसार, हालिया वृद्धि मुख्य रूप से पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर (सप्लाई साइड फैक्टर्स) और पेमेंट परफॉर्मेंस में सुधार के कारण हुई है — जैसे व्यापारी नेटवर्क का विस्तार, QR कोड-आधारित भुगतान का प्रचलन, UPI ट्रांजैक्शन में तेजी और डिजिटल बैंकिंग सेवाओं की व्यापक उपलब्धता।
- जैसे-जैसे भारत डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर अग्रसर हो रहा है, RBI-DPI (डिजिटल भुगतान सूचकांक) नीति निर्माण और प्रगति के आकलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यह वृद्धि डिजिटल असमानता और वित्तीय समावेशन से जुड़ी वैश्विक चिंताओं के बीच एक सकारात्मक संकेत के रूप में उभर रही है।
- इंडेक्स की प्रगति:
- मार्च 2019: 153.47
- मार्च 2020: 207.84
- मार्च 2022: 349.30
- मार्च 2024: 445.50
- सितम्बर 2024: 465.33
- मार्च 2025: 493.22 (जो 2018 की तुलना में चार गुना से अधिक है)
निष्कर्ष:
भारत में डिजिटल भुगतान का तेजी से विस्तार हो रहा है, जिसे RBI-DPI में निरंतर वृद्धि दर्शाती है। मार्च 2025 में सूचकांक बढ़कर 493.22 हो गया है, जो 2018 के मुकाबले चार गुना से अधिक है। यह प्रगति डिजिटल अवसंरचना, नीति समर्थन और तकनीकी नवाचार के समन्वय का परिणाम है। डिजिटल भुगतान ने न सिर्फ वित्तीय समावेशन को बढ़ावा दिया है, बल्कि यह भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर तेज़ी से बढ़ती यात्रा का संकेत भी है।