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गज़ैप और हयालेट विमान बम (Gazzap and Haylet aircraft bombs) | Apni Pathshala

Gazzap and Haylet aircraft bombs

Gazzap and Haylet aircraft bombs

Gazzap and Haylet aircraft bombs – 

संदर्भ:

हाल ही में, तुर्किये ने 17वें अंतर्राष्ट्रीय रक्षा उद्योग मेले (IDEF 2025) में अपने राष्ट्रीय रक्षा मंत्रालय के अनुसंधान और विकास (R&D) केंद्र द्वारा विकसित दो उन्नत विमान बमों का अनावरण किया, जो उसकी सैन्य हमले की क्षमताओं में महत्वपूर्ण वृद्धि को दर्शाता है।

मुख्य बिंदु

GAZAP और HAYALET अर्थ: क्रोध और भूत

GAZAP और HAYALET दोनों ही नाटो(NATO) मानक के हैं, पूर्णतः प्रमाणित हैं तथा तत्काल परिचालन तैनाती के लिए उपलब्ध हैं।

गज़ैप (Gazap):

  वजन: गज़ैप एक 2,000 पाउंड का एमके-84 विमान बम है।

  • संरचना: इसमें 10,000 कणों वाली खंड-आधारित डिज़ाइन है, जो विस्फोट के समय 1 किलोमीटर दायरे में फैल सकती है।
  • प्रभाव क्षेत्र: यह प्रति वर्ग मीटर 10.16 टुकड़े फैलाता है, जो इसे मानक एमके-सीरीज़ बमों से तीन गुना अधिक प्रभावशाली बनाता है।
  • डिज़ाइन विशेषता: इसमें संशोधित भराव और आंतरिक धारीदार संरचना है, जो ग्रेनेड जैसी नियंत्रित टुकड़ा-विस्फोट तकनीक का उपयोग करता है।
  • तैनाती क्षमता: इसे तुर्की के F-16 और F-4 लड़ाकू विमानों से लॉन्च किया जा सकता है।
  • भविष्य की योजना: तुर्की भविष्य में ड्रोन से गज़ैप बम गिराने की योजना बना रहा है।

हयालेट(Hayalet):

  • बंकर-तोड़ने की क्षमता: हयालेट में उन्नत बंकर-भेदी क्षमताएं हैं, जो 90 मीटर तक कठोर सतह में प्रवेश कर सकता है।
  • कंक्रीट में घुसने की शक्ति: यह बम C50 ग्रेड की 7 मीटर मोटी प्रबलित कंक्रीट को भेद सकता है, जबकि सामान्य बम केवल 1.8–2.4 मीटर तक ही घुस पाते हैं।
  • परीक्षण परिणाम:
  1. एक परीक्षण में हयालेट को एक द्वीप पर गिराया गया, जहाँ यह 90 मीटर गहराई तक धरती में घुस गया
  2. विस्फोट का प्रभाव पूरे 160 मीटर चौड़े द्वीप पर और पीछे तक भी देखा गया।
  • कठोर संरचना परीक्षण: बम ने C50 कंक्रीट, 25 मिमी रिब्ड स्टील, कई स्टील पिंजरों, 10 मीटर रेत तालाब, और 5 टन कंक्रीट की दीवार को भेदते हुए 600 मीटर तक प्रभाव दिखाया।
  • संगतता: हयालेट, तुर्की के F-16 लड़ाकू विमानों और मौजूदा युद्ध सामग्री किटों के साथ पूरी तरह से संगत है

भारत के लिए कितना ख़तरा?

तुर्की अपनी सैन्य क्षमताएँ तेज़ी से विकसित कर रहा है और पाकिस्तान के साथ उसके बढ़ते रक्षा संबंध भारत के लिए चिंता का विषय बन गए हैं। हालाँकि दोनों देशों ने हथियारों के हस्तांतरण से इनकार किया है, भारतीय सेना का कहना है कि पाकिस्तान ने भारत पर हमले में तुर्की निर्मित बायरकटर टीबी2 ड्रोन का उपयोग किया। मई में भारत-पाक संघर्ष के दौरान भी तुर्की ने पाकिस्तान का समर्थन किया था। अब तुर्की, ड्रोन और नौसैनिक उपकरणों की आपूर्ति कर, पाकिस्तान का एक प्रमुख रक्षा साझेदार बन गया है।

निष्कर्ष:

तुर्की के गज़प और हयालेट जैसे उन्नत बम उसकी बढ़ती सैन्य शक्ति को दर्शाते हैं। पाकिस्तान के साथ उसके गहरे होते रक्षा संबंध भारत के लिए चिंता का विषय हैं। भले ही हथियारों के आधिकारिक हस्तांतरण से इनकार किया गया हो, पर तकनीकी सहयोग भारत की सुरक्षा के लिए संभावित खतरा है।

नतीजतन, भारत को सतर्क रहते हुए अपनी रक्षा तैयारियों को मज़बूत करना होगा।

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