Indian Government Initiative13,118 Seat Belt Alarm Stopper Listings Removed
Railway and Women Commission join hands: A new initiative against human trafficking –
संदर्भ :
भारतीय उपभोक्ताओं के अधिकारों की सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए सरकार निरंतर प्रयासरत है। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के तहत काम करने वाली केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (Central Consumer Protection Authority – CCPA) ने हाल ही में उपभोक्ता संरक्षण के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 और CCPA की भूमिका
- 1986 के उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम को 2019 में आधुनिक आवश्यकताओं के अनुसार संशोधित किया गया, जिससे उपभोक्ताओं के लिए त्वरित, सरल और प्रभावी न्याय व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके।
- इस नए कानून के तहत CCPA की स्थापना की गई, जो उपभोक्ता हितों की रक्षा के लिए विशेष रूप से सशक्त इकाई है।
- CCPA को उपभोक्ता अधिकारों के उल्लंघन, झूठे विज्ञापन, अनुचित व्यापार प्रथाओं की रोकथाम, रिफंड और रिटर्न जैसी कार्रवाइयों को लागू करने का अधिकार प्राप्त है।
प्रमुख कार्रवाइयाँ और उपलब्धियाँ
- 13,118 कार सीट बेल्ट अलार्म स्टॉपर लिस्टिंग हटाई गईं : CCPA के निर्देशानुसार, उन उत्पादों की लिस्टिंग ई-कॉमर्स प्लेटफार्मों से हटा दी गईं जो उपभोक्ता सुरक्षा के लिए खतरा हैं। ये अलार्म स्टॉपर ऐसे उपकरण हैं जो कार सीट बेल्ट न पहनने पर बजने वाले अलार्म को रोकते हैं, जिससे उपभोक्ताओं की सुरक्षा प्रभावित होती है।
- “Basket Sneaking” रोकना : एक प्रमुख ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म ने CCPA के आदेश पर स्वेच्छा से ₹1 की ऑटोमैटिक चैरिटी फीस जोड़ने की प्रक्रिया बंद कर दी, जिसे ‘Basket Sneaking’ नामक अनुचित व्यापारिक व्यवहार माना जाता है।
- कोविड लॉकडाउन के दौरान फ्लाइट रद्दीकरण पर ₹1,454 करोड़ का रिफंड : यात्रियों को कोविड-19 लॉकडाउन के कारण रद्द हुई फ्लाइट टिकटों के लिए भारी मात्रा में रिफंड प्रदान किया गया। यह आदेश भी CCPA द्वारा जारी किया गया था, जिससे यात्रियों के हित सुरक्षित हुए।
उपभोक्ता शिकायत निवारण की सुविधाएँ :
राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (NCH): यह हेल्पलाइन 17 भाषाओं में शिकायत स्वीकार करती है, जिसमें हिंदी, अंग्रेजी, कश्मीरी, पंजाबी, मराठी, तमिल, बंगाली आदि शामिल हैं। टोल-फ्री नंबर 1915 पर कॉल करके या WhatsApp, SMS, ईमेल, ऐप्स आदि से शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
इंटीग्रेटेड ग्रिवांस रिड्रेसल मैकेनिज्म (INGRAM): यह एक ऑनलाइन पोर्टल है जहां उपभोक्ता अपनी शिकायतें दर्ज कर सकते हैं, जिनका निपटारा संबंधित कंपनियों द्वारा किया जाता है।
ई-कॉमर्स में उपभोक्ता सुरक्षा : उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) नियम, 2020 के तहत, ई-कॉमर्स कंपनियों को उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा के लिए कड़े नियमों का पालन करना अनिवार्य है।
कीमतों में अनुचित लाभ उठाने, उपभोक्ताओं के बीच भेदभाव करने, और अन्य अनुचित व्यापारिक प्रथाओं को रोकने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
2024 में ‘सेफ्टी प्लेज़’ पर भी हस्ताक्षर हुए, जिसमें रिलायंस, टाटा, झोमाटो, ओला, स्विगी जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं, जो उपभोक्ता सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
डार्क पैटर्न्स और भ्रामक विज्ञापन पर नियंत्रण
- डार्क पैटर्न्स जैसे कि झूठी तत्परता दिखाना, अनचाहे शुल्क जोड़ना, जबरन सहमति लेना आदि के खिलाफ CCPA ने 2023 में दिशानिर्देश जारी किए हैं।
- भ्रामक विज्ञापनों को रोकने के लिए 2022 में भी CCPA ने दिशा-निर्देश लागू किए, जिनके तहत विज्ञापनों की सच्चाई और प्रमाणिकता की जांच आवश्यक है।
- कोचिंग संस्थानों में झूठे दावों और अत्यधिक सफलता दरों वाले विज्ञापनों के खिलाफ भी नियम बनाए गए हैं।
उपभोक्ताओं के हित में गुणवत्ता मानक
भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने ऑनलाइन उपभोक्ता समीक्षाओं के लिए एक फ्रेमवर्क विकसित किया है, जिससे नकली और भ्रामक समीक्षाओं को रोकने में मदद मिलेगी।
निष्कर्ष:
भारतीय सरकार उपभोक्ता संरक्षण के क्षेत्र में लगातार प्रगति कर रही है। CCPA के सख्त निर्देश और नियमों के कारण उपभोक्ता अब अधिक सुरक्षित और जागरूक हैं। तकनीकी प्रगति और ऑनलाइन खरीदारी के बढ़ते चलन के बीच यह आवश्यक है कि उपभोक्ताओं को धोखाधड़ी और अन्य अनुचित प्रथाओं से बचाया जाए।