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मणिपुर में राष्ट्रपति शासन (President rule in Manipur) | Apni Pathshala

President rule in Manipur

President rule in Manipur

President rule in Manipur – 

संदर्भ:

लोकसभा ने मणिपुर में राष्ट्रपति शासन की अवधि 13 अगस्त 2025 से आगे छह महीने के लिए बढ़ाने संबंधी वैधानिक संकल्प को अपनी मंजूरी दे दी है।

पृष्ठभूमि (Background):

  • फरवरी 2025 में मणिपुर मेंराष्ट्रपति शासन (President’s Rule) लागू कर दिया गया, जब तत्कालीन मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया।
  • यह निर्णय राज्य मेंदो वर्षों से चल रहे जातीय संघर्ष के चलते लिया गया, जो मैदानी क्षेत्र के मेइती (Meitei) समुदाय और पर्वतीय क्षेत्रों के अनुसूचित जनजातीय कुकीजो (Kuki-Zo) समुदायों के बीच चल रहा था।
  • इस संघर्ष की जड़ेंमेइती समुदाय द्वारा अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा पाने की मांग में थीं, जिसका कुकी समुदाय ने विरोध किया।
  • कुकी समुदाय को आशंका थी कि यदि मेइती को ST का दर्जा मिल गया, तो इससे उन्हेंरोजगार और आरक्षण से जुड़ी सुविधाओं में नुकसान हो सकता है।

राष्ट्रपति शासन क्या है? (What is President’s Rule?):

  • राष्ट्रपति शासन एक प्रकार कीराज्य आपातकाल स्थिति (State Emergency) है, जिसे सामान्यतः राष्ट्रपति शासन कहा जाता है।
  • ध्यान देने योग्य बात है कि संविधान में “President’s Rule” शब्द कासीधा उल्लेख नहीं है

प्रमुख संवैधानिक प्रावधान:

  1. अनुच्छेद 356:
    • यह अनुच्छेद राष्ट्रपति को यह अधिकार देता है कि यदि किसी राज्य कीसंवैधानिक व्यवस्था विफल हो जाए — चाहे राज्यपाल की रिपोर्ट के आधार पर या अन्य किसी माध्यम से — तो वह राष्ट्रपति शासन लागू कर सकते हैं
    • इसमें राज्य कीकार्यकारी शक्तियाँ केंद्र सरकार को और विधान शक्ति संसद को स्थानांतरित हो जाती है।
    • हालांकि, राज्य काउच्च न्यायालय (High Court) यथावत कार्य करता रहता है।
  2. अनुच्छेद 355: यह केंद्र सरकार पर यहकर्तव्य निर्धारित करता है कि वह राज्यों को बाहरी आक्रमण या आंतरिक गड़बड़ी से बचाए और राज्य में शासन संविधान के अनुसार संचालित हो, यह सुनिश्चित करे।
  3. अनुच्छेद 365: यदि कोई राज्य केंद्र सरकार के निर्देशों कापालन नहीं करता, तो राष्ट्रपति वहां संवैधानिक आपातकाल (Constitutional Emergency) घोषित कर सकते हैं।

प्रभाव (Impacts of President’s Rule):

  1. मौलिक अधिकारों का निलंबन नहीं:
    • राष्ट्रपति शासन के दौराननागरिकों के मौलिक अधिकार (Fundamental Rights) निलंबित नहीं किए जाते।
    • जबकिराष्ट्रीय आपातकाल (National Emergency) के समय, अनुच्छेद 19 के अधिकारों को अनुच्छेद 358 के तहत निलंबित किया जा सकता है और अन्य अधिकारों (सिवाय अनुच्छेद 20 और 21 के) को भी प्रतिबंधित किया जा सकता है।
  1. विशेष शक्तियाँ:
    • राष्ट्रपति शासन मेंराष्ट्रपति विशेष शक्तियाँ ग्रहण करते हैं।
    • राज्य का शासनराज्यपाल द्वारा राष्ट्रपति की ओर से चलाया जाता है, जिन्हें मुख्य सचिव या राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त सलाहकार सहायता करते हैं।
  2. विधान और वित्तीय अधिकार:
    • अनुच्छेद 357के तहत, संसद को यह अधिकार है कि वह विधान निर्माण की शक्ति राष्ट्रपति या किसी अन्य प्राधिकरण को सौंप दे।
    • राष्ट्रपति को राज्य केसंकलित कोष (Consolidated Fund) से व्यय को मंज़ूरी देने का अधिकार भी प्राप्त होता है।

राष्ट्रपति शासन के प्रयोग (Instances of Use):

  1. डेड लेटर की आशा पर विराम:
    • डॉ. बी.आर. अंबेडकर ने उम्मीद जताई थी कि यह प्रावधान केवलअत्यंत दुर्लभ परिस्थितियों में ही उपयोग होगा और यह एक “Dead Letter” बना रहेगा।
    • परंतु 1950 से अब तक राष्ट्रपति शासन कोलगभग 134 बार लागू किया जा चुका है, 29 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में।
  2. पहली बार और बारंबार प्रयोग:
    • राष्ट्रपति शासनसबसे पहले 1951 में पंजाब में लागू किया गया था।
    • यह एक ओरसंकटप्रबंधन उपकरण रहा है, वहीं दूसरी ओर यह कई बार राजनीतिक उद्देश्य से भी इस्तेमाल किया गया।
  3. राज्यों में सबसे अधिक प्रयोग:
    • मणिपुर और उत्तर प्रदेश— दोनों में अब तक 10 बार राष्ट्रपति शासन लागू हो चुका है। मणिपुर में हालिया घटना इसे 11वीं बार बना देती है।
    • जम्मूकश्मीरमें सबसे लंबी अवधि (12 वर्षों से अधिक) तक राष्ट्रपति शासन लागू रहा है, इसके बाद पंजाब (10+ वर्ष) और पुडुचेरी (7+ वर्ष) का स्थान आता है।

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