RBI kept the repo rate unchanged
RBI kept the repo rate unchanged –
संदर्भ:
भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को मौद्रिक नीति की समीक्षा के दौरान घोषणा की कि रेपो रेट 5.5% पर यथावत रखा गया है, जिससे ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
MPC मीटिंग की मुख्य बातें:
- आरबीआई ने दरें अपरिवर्तित रखीं।
- मुद्रास्फीति का दृष्टिकोण अब अधिक अनुकूल है, जो मजबूत मानसून द्वारा समर्थित है। हालांकि, प्रतिकूल आधार प्रभाव और वैश्विक प्रतिकूल परिस्थितियों के कारणCPI मुद्रास्फीति 4% से ऊपर जा सकती है। मुख्य मुद्रास्फीति 4% से अधिक रहने की संभावना।
- FY26 के लिए GDP आउटलुक 5%रहने का अनुमान है।
रेपो रेट क्या है?
रेपो रेट वह दर (Rate) होती है जिस पर भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) वाणिज्यिक बैंकों को अल्पकालिक (Short-term) ऋण देता है जब बैंकों को पैसों की जरूरत होती है।
रेपो रेट का उद्देश्य:
RBI इस दर का उपयोग इन प्रमुख उद्देश्यों के लिए करता है:
- बाजार में नकदी (liquidity) को नियंत्रित करना
- महंगाई (inflation) पर काबू पाना
- आर्थिक विकास (economic growth) को प्रभावित करना
कम रेपो रेट का असर:
जब RBI रेपो रेट को घटाता है:
- बैंकों को सस्ते ब्याज पर कर्ज मिल जाता है
- बैंक भी अपने ग्राहकों को कम ब्याज दर पर ऋण देने लगते हैं
- इससे लोन लेना आसान हो जाता है
कम रेपो रेट के फायदे:
- निवेश (Investment) और खपत (Consumption) को बढ़ावा मिलता है
- पैसे की उपलब्धता और बाजार में नकदी बढ़ती है
- आर्थिक मंदी (Slowdown) के समय विकास को रफ्तार मिलती है
नीतिगत निर्णयों के पीछे के कारण:
मुद्रास्फीति में तीव्र गिरावट
- जून 2025 मेंCPI मुद्रास्फीति घटकर 1% हो गई, जो पिछले छह वर्षों का सबसे निचला स्तर है।
- सब्जियों और अनाजजैसी खाद्य वस्तुओं की कीमतों में मंदी देखी गई।
- इसके चलतेFY26 के लिए मुद्रास्फीति अनुमान घटाकर 1% कर दिया गया।
वैश्विक अनिश्चितताएँ: अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ जैसे व्यापार तनाव और कच्चे तेल की अस्थिर कीमतें बाहरी जोखिम पैदा कर रही हैं।
पूर्व में की गई दरों में कटौती
- RBI ने 2025 की शुरुआत में रेपो रेट में 100 बेसिस प्वाइंट की कटौतीकी थी।
- समिति अब चाहती है कि इन कटौतियों काआर्थिक प्रभाव पूरी तरह से देखा जाए।
मौद्रिक नीति समिति क्या है?
- MPC एक वैधानिक निकाय (Statutory Body) है, जिसे RBI अधिनियम, 1934 (2016 में संशोधित) के तहत स्थापित किया गया है।
- इसका मुख्य कार्य बेंचमार्क ब्याज दर (रेपो रेट) तय करना है, ताकि मूल्य स्थिरता (Price Stability) बनी रहे और आर्थिक विकास को भी ध्यान में रखा जा सके।
MPC की संरचना: कुल 6 सदस्य होते हैं:
- 3 सदस्य RBI से(जिसमें गवर्नर अध्यक्ष होते हैं)
- 3 बाहरी सदस्य, जिन्हें सरकार नियुक्त करती है।
निर्णय प्रक्रिया:
- निर्णयबहुमत से लिया जाता है।
- हर सदस्य का एक वोटहोता है।
- यदि मतों मेंबराबरी हो जाए, तो RBI गवर्नर को निर्णायक वोट देने का अधिकार होता है।