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भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (Bharatiya Antariksh Station) | Ankit Avasthi Sir

Bharatiya Antariksh Station

Bharatiya Antariksh Station

संदर्भ:

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के अवसर पर भारत मंडपम में भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) का मॉडल अनावरण किया। यह भारत का पहला स्वदेशी अंतरिक्ष स्टेशन होगा, जिसकी पहली इकाई 2028 में लॉन्च की जाएगी।

मुख्य बिंदु (Key Point) –

  • भारत अब उन चुनिंदा देशों में शामिल होने जा रहा है जो ऑर्बिटल लैबोरेटरी (Orbital Laboratory) का संचालन करते हैं।
  • वर्तमान में अंतरिक्ष में केवल दो ही ऑर्बिटल लैब मौजूद हैं:
  1. इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS)– जिसे पाँच देशों की अंतरिक्ष एजेंसियाँ मिलकर चला रही हैं।
  2. चीन का तियांगोंग स्पेस स्टेशन
  • भारत का लक्ष्य है कि 2035 तक कुल 5 मॉड्यूल अपने स्पेस स्टेशन के लिए अंतरिक्ष में भेजे जाएँ।
  • पहला मॉड्यूल BAS-01 होगा, जिसका वजन लगभग 10 टन होगा।
  • इसे पृथ्वी से 450 किलोमीटर ऊँचाई पर लो अर्थ ऑर्बिट (Low Earth Orbit) में स्थापित किया जाएगा।

भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) की प्रमुख विशेषताएँ

  • स्वदेशी रूप से विकसित पर्यावरण नियंत्रण एवं जीवन समर्थन प्रणाली (ECLSS)
  • भारत डॉकिंग सिस्टम और भारत बर्थिंग मैकेनिज्म
  • स्वचालित हैच सिस्टम
  • सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण (Microgravity) में अनुसंधान और प्रौद्योगिकी प्रदर्शन का प्लेटफॉर्म
  • वैज्ञानिक इमेजिंग की सुविधा
  • चालक दल के मनोरंजन और अंतरिक्ष अवलोकन के लिए व्यूपोर्ट

ये विशेषताएँ BAS को न केवल भारत की अंतरिक्ष क्षमता का प्रतीक बनाएंगी, बल्कि इसे एक उन्नत वैज्ञानिक और तकनीकी अनुसंधान केंद्र के रूप में भी स्थापित करेंगी।

भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) का विकास टाइमलाइन:

  1. पहला मॉड्यूल लॉन्च (2028)
  • BAS का पहला मॉड्यूलBAS-1 वर्ष 2028 में LVM3 से प्रक्षेपित होगा।
  • इसमेंजीवन समर्थन प्रणाली (Life Support System) और क्रू क्वार्टर (Crew Quarters) जैसी अहम तकनीकों का परीक्षण किया जाएगा।
  1. पूर्ण निर्माण (2035 तक)
    • स्टेशन का पूरा निर्माण2035 तक पूरा करने का लक्ष्य है।
    • इसमें कईअतिरिक्त मॉड्यूल जोड़े जाएंगे, जिससे स्टेशन की क्षमता और कार्यक्षमता बढ़ेगी।
  2. पूर्ववर्ती मिशन (Precursors)
    • मानव मिशनों से पहले ISRO कईप्रीकर्सर मिशन संचालित करेगा।
    • इनका उद्देश्य लंबी अवधि के अंतरिक्ष अभियानों के लिएआवश्यक तकनीकों का परीक्षण और सत्यापन करना होगा।

अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS):

परिचय:
अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) दुनिया की सबसे बड़ी मानव निर्मित संरचना है। इसे 20 नवंबर 1998 को लॉन्च किया गया और 2011 से यह लगातार आबाद है। यह संयुक्त परियोजना है जिसमें अमेरिका (NASA), रूस (Roscosmos), यूरोप (ESA), जापान (JAXA) और कनाडा (CSA) की अंतरिक्ष एजेंसियाँ शामिल हैं।

स्थिति और गति:

  • यह पृथ्वी से लगभग 400 किलोमीटर ऊँचाई पर परिक्रमा करता है।
  • इसकी रफ्तार लगभग 28,000 किमी/घंटा है।
  • हर 90 मिनट में यह पृथ्वी की एक परिक्रमा पूरी करता है।

उद्देश्य:

  • अंतरिक्ष और सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण के ज्ञान को बढ़ाना।
  • वैज्ञानिक अनुसंधान और प्रयोगों को बढ़ावा देना।
  • अंतरराष्ट्रीय सहयोग का उदाहरण प्रस्तुत करना।

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