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राष्ट्रीय अंतरिक्ष कानून (National space law) | Apni Pathshala

National space law

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संदर्भ:

भारत ने दूसरा राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस बड़े उत्साह के साथ मनाया, जो चंद्रयान-3 की सफलता और गगनयान जैसे महत्वाकांक्षी अभियानों की दिशा में उसकी प्रगति को दर्शाता है। हालांकि, इन उपलब्धियों के बावजूद भारत के पास अभी तक एक समग्र राष्ट्रीय अंतरिक्ष कानून नहीं है, जो निजी और वाणिज्यिक गतिविधियों को विनियमित और प्रोत्साहित करने के लिए आवश्यक है।

राष्ट्रीय अंतरिक्ष कानून के बारे में:

राष्ट्रीय अंतरिक्ष कानून एक घरेलू कानूनी ढांचा होता है, जिसके माध्यम से किसी देश की अंतरिक्ष गतिविधियों को विनियमित किया जाता है। यह न केवल अंतर्राष्ट्रीय दायित्वों के अनुपालन को सुनिश्चित करता है, बल्कि सरकार, निजी क्षेत्र और निवेशकों को लाइसेंसिंग, दायित्व और वाणिज्यिक अधिकारों से जुड़ी स्पष्टता भी प्रदान करता है।

वैश्विक अंतरिक्ष कानून:

आउटर स्पेस ट्रिटी (Outer Space Treaty – OST) 1967:

  • अंतरिक्ष को सभी मानव जाति का क्षेत्र घोषित किया गया।
  • किसी भी देश को आकाशीय पिंडों (चंद्रमा, ग्रह आदि) पर अपना अधिकार स्थापित करने की अनुमति नहीं।
  • प्रत्येक देश अपनी क्षेत्राधिकार में किए गए सभी अंतरिक्ष गतिविधियों के लिए जिम्मेदार होगा, जिसमें निजी कंपनियों द्वारा किए गए मिशन भी शामिल हैं।
  • इस ट्रिटी ने अंतरिक्ष गतिविधियों के लिए अधिकारों, जिम्मेदारियों और दायित्व नियमों का बंधनकारी ढांचा बनाया।

OST 1967 के सहायक समझौते (Companion Agreements) :

  1. लायबिलिटी कन्वेंशन 1972: किसी भी अंतरिक्ष वस्तु (जैसे सैटेलाइट या अंतरिक्ष मलबा) द्वारा हुईक्षति के लिए राज्य जिम्मेदार होगा।
  2. रजिस्ट्रेशन कन्वेंशन (Registration Convention) 1976: अंतरिक्ष में भेजी गई सभी वस्तुओं का पंजीकरणअनिवार्य।
  3. मून एग्रीमेंट (Moon Agreement) 1979
    • अंतरिक्ष संसाधनों कोसभी मानव जाति की साझा धरोहर माना गया।
    • बहुत कम देशों ने इसे स्वीकार किया; भारत इस समझौते का पक्षधर नहीं है।

भारत का वर्तमान अंतरिक्ष कानूनी और नीतिगत ढांचा:

भारत द्वारा अपनाए गए अंतर्राष्ट्रीय समझौते:

  • भारत ने प्रमुख संयुक्त राष्ट्र अंतरिक्ष संधियों को मान्यता दी है।
  • हालांकि, भारत अभी व्यापक राष्ट्रीय अंतरिक्ष कानून बनाने की प्रक्रिया में है।

वर्तमान नियामक उपाय:

  1. भारतीय अंतरिक्ष नीति, 2023 (Indian Space Policy, 2023): सरकारी और निजी संस्थाओं कीभूमिका और जिम्मेदारियों का विवरण।
  2. IN-SPACe (Indian National Space Promotion and Authorisation Centre): गैर-सरकारी अंतरिक्ष गतिविधियोंके लिए नियामक और अनुमोदन केंद्र।
  3. भारतीय अंतरिक्ष उद्योग के मानक: तकनीकी सुरक्षा और संचालन के दिशा-निर्देश।
  4. मानक, दिशानिर्देश और प्रक्रियाएँ 2023: अंतरिक्ष गतिविधियों कीअनुमोदन प्रक्रिया का ढांचा।

राष्ट्रीय अंतरिक्ष कानून की आवश्यकता:

कानूनी स्पष्टता और नियामक स्थिरता:

  • एक व्यापक राष्ट्रीय अंतरिक्ष कानून सेकानूनी स्पष्टता और नियामक स्थिरता सुनिश्चित होती है।
  • इससे सरकारी और निजी अंतरिक्ष गतिविधियों मेंब्यूरोक्रेटिक बाधाएँ कम होती हैं और संचालन सहज होता है।
  • यहसुरक्षा और अनुपालन मानक तय करता है, जैसे: लाइसेंसिंग, दुर्घटना जांच, अंतरिक्ष मलबा प्रबंधन
  • भारत कोOuter Space Treaty के तहत अंतर्राष्ट्रीय जिम्मेदारियों के अनुरूप बनाता है।

निजी क्षेत्र और निवेश को बढ़ावा:

  • स्पष्ट नियमों के माध्यम सेनिजी कंपनियों की भागीदारी और विदेशी निवेश आकर्षित होता है।
  • लाइसेंसिंग, आईपी अधिकार, बीमा और FDI पर नियम तय होते हैं।
  • इससे स्टार्टअप्स को विदेश जाने से रोका जा सकता है।
  • उच्च मूल्य वाले संसाधनों और नवोदित कंपनियों कीसुरक्षा सुनिश्चित होती है।

नवाचार और प्रतिभा संरक्षण:

  • आईपी अधिकारों की सुरक्षा, उद्योग–शैक्षणिक सहयोग और निवेशकों का भरोसा बढ़ाता है।
  • भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अग्रणी बना रहता है।

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