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कानी जनजाति (Kani Tribe) | Ankit Avasthi Sir

Kani Tribe

Kani Tribe

संदर्भ:

हाल ही में कुट्टिमाथन कानी, जो कानी जनजातीय समुदाय से ताल्लुक रखते थे और औषधीय पौधे “आरोग्यपाचा” (Arogyapacha) के रहस्य का खुलासा करने वाले प्रमुख व्यक्तियों में से एक थे, उनका निधन हो गया है।

कानी जनजाति (Kani Tribe):

परिचय: कानी जनजाति, जिन्हें कानिकारार (Kanikkarars) भी कहा जाता है, पारंपरिक रूप से आदिवासी एवं खानाबदोश समुदाय थे।

  • आज ये लोग केरल के तिरुवनंतपुरम जिले में पश्चिमी घाट की अगस्थ्यमलाई पहाड़ियों के जंगलों में स्थायी जीवन जीते हैं।

सामुदायिक संगठन:

  • हर कानी गाँव में समुदायिक परिषद (Community Council) होती है, जो सामाजिक नियंत्रण बनाए रखती है।
  • परिषद में शामिल हैं:
    • मूट्टुकानी (Moottukani) – जनजाति प्रमुख
    • विलिकानी (Vilikani) – संयोजक
    • पिलाथी (Pilathi) – चिकित्सक और पुरोहित
  • ये पद वंशानुगत (Hereditary) होते हैं।

परंपरागत संरचना और भूमिका:

  • मूट्टुकानी: कानून बनाने वाला, संरक्षक, न्यायदाता, चिकित्सक और पुरोहित सभी का कार्य करता था।
  • पिलाथी: जादुई शक्तियों वाला माना जाता है, विभिन्न अनुष्ठान और मंत्र करता है, इसमें ‘कोकारा (Kokara)’ नामक यंत्र का उपयोग होता है।

आवास और जीवनशैली:

  • आज कानी लोग कई जनजातीय बस्तियों (tribal hamlets) में रहते हैं।
  • हर बस्ती में 10–20 परिवार रहते हैं, जो जंगल और आसपास के क्षेत्रों में बिखरे होते हैं।

सांस्कृतिक महत्व:

  • कानी जनजाति की जड़ीबूटी और औषधीय ज्ञान विशेष रूप से प्रसिद्ध है।
  • उनके पारंपरिक जीवन और सामाजिक संगठन में सामूहिक और समन्वित ढांचा देखा जाता है।

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