Pradhan Maantri Jan Dhan Yojana
संदर्भ:
प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) ने अपने 11 वर्ष पूरे कर लिए हैं। 28 अगस्त 2014 को शुरू की गई इस महत्वाकांक्षी योजना ने देशभर में वित्तीय समावेशन को नई दिशा दी है।
प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) –
परिचय:
प्रधानमंत्री जन धन योजना अगस्त 2014 में शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य देश के हर नागरिक को बैंकिंग प्रणाली से जोड़ना और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देना है। विशेष रूप से उन लोगों के लिए जो पहले से बैंकिंग सुविधाओं से वंचित थे।
मुख्य विशेषताएँ:
- शून्य बैलेंस खाता: न्यूनतम बैलेंस की कोई आवश्यकता नहीं।
- मुफ्त रुपे डेबिट कार्ड: हर खाता धारक को फ्री कार्ड उपलब्ध।
- ओवरड्राफ्ट सुविधा: पात्र खाताधारकों को ₹10,000 तक।
- DBT और अन्य योजनाओं से जोड़ना:
- पीएम जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY)
- पीएम सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY)
- अटल पेंशन योजना (APY)
- मुद्रा योजना
- चेक बुक: बैंक अपनी नीति अनुसार उपलब्ध कराते हैं।
प्रभाव और उपलब्धियाँ:
- बैंकिंग पहुँच:9% गांवों में 5 किमी के भीतर बैंक शाखा या बैंक मित्र उपलब्ध।
- प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT):
- एलपीजी सब्सिडी, पेंशन, कोविड-राहत आदि सीधे लाभार्थियों तक पहुँची।
- बिचौलियों की भूमिका खत्म, भ्रष्टाचार और लीकेज कम।
- संकट प्रबंधन: नोटबंदी (2016) और कोविड-19 महामारी में तुरंत नकद सहायता पहुँचाई।
- वित्तीय सुरक्षा: बीमा और पेंशन योजनाओं से असंगठित क्षेत्र के लोगों को सुरक्षा कवच।
- खाते और जमा राशि:
- कुल खाते: 2 करोड़+
- कुल जमा राशि: ₹2.68 लाख करोड़ (2015 की तुलना में 17 गुना वृद्धि)
- प्रति खाता औसत जमा राशि: ₹4,768
- 68 करोड़ रुपये कार्ड जारी।
प्रगति:
- लैंगिक समावेशन: 56% खाते महिलाओं के नाम।
- डिजिटल इकोसिस्टम:7 करोड़ से अधिक रुपे कार्ड, यूपीआई लेनदेन बढ़ा।
- ग्रामीण पहुँच:5 करोड़ खाते ग्रामीण/अर्ध-शहरी क्षेत्रों से।
- 2 लाख+ बैंक मित्र ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा।
- जमा विस्तार: कुल बैलेंस ₹2.68 लाख करोड़ तक, बचत की आदत को बढ़ावा।
- खाता विस्तार: दुनिया का सबसे बड़ा वित्तीय समावेशन अभियान।
निष्कर्ष:
पिछले 11 वर्षों में प्रधानमंत्री जन धन योजना ने भारत में वित्तीय समावेशन के दृष्टिकोण को पूरी तरह बदल दिया है। इस योजना ने संगठित रूप से क्रियान्वयन और निरंतर सुधार के माध्यम से 56 करोड़ से अधिक लोगों को औपचारिक बैंकिंग सेवाओं से जोड़ा है। साथ ही इसने लैंगिक समानता को बढ़ावा दिया है और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) प्रणाली को अधिक सक्षम बनाया है, जिससे यह समावेशी आर्थिक विकास की आधारशिला बन गई है।