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चतुर्भुज तारा प्रणाली (Quadruple Star System) | Ankit Avasthi Sir

Quadruple Star System

Quadruple Star System

संदर्भ:

वैज्ञानिकों ने UPM J1040−3551 AabBab नामक एक दुर्लभ चतुष्क तारा प्रणाली की खोज की है, जिसमें दो लाल बौने तारों के साथ परिक्रमा करते हुए दो भूरे बौने तारे शामिल हैं।

मिल्की वे में खोजा गया दुर्लभ चौगुना तारा तंत्र:

  • इस प्रणाली के केंद्र में दो युवा लाल बौने तारे (M-type Red Dwarfs) हैं, जो आपस में एक युग्म (Binary System) बनाते हैं।
  • इन दोनों के चारों ओर दो ठंडे T-प्रकार के ब्राउन ड्वार्फ़ (Brown Dwarfs) परिक्रमा कर रहे हैं।
  • ब्राउन ड्वार्फ़ सामान्य तारों की तरह हाइड्रोजन का संलयन (Fusion) नहीं कर पाते, लेकिन वे ग्रहों से कहीं अधिक बड़े और भारी होते हैं।
  • ये चारों पिंड मिलकर एक श्रृंखलाबद्ध चौगुना तंत्र (Hierarchical Quadruple System) बनाते हैं। ऐसा अद्वितीय विन्यास पहले कभी नहीं देखा गया।

UPM J1040−3551 AabBab के बारे में: यह आकाशगंगा (Milky Way) में खोजा गया एक नया quadruple star system है।

  • संरचना (Composition): इसमें दो cold T-type brown dwarfs पाए गए हैं, जो एक जोड़ी young red dwarf stars की परिक्रमा कर रहे हैं।
  • विशेषता: यह अपनी तरह का पहला ज्ञात तंत्र है। ब्राउन ड्वार्फ़ सामान्यतः अकेले पाए जाते हैं और इनके साथ साथी होने की संभावना 5% से भी कम होती है, इसलिए यह खोज अत्यंत दुर्लभ है।
  • महत्त्व (Significance): यह प्रणाली low-mass stars और sub-stellar objects (उप-तारकीय पिंडों) के निर्माण और विकास को समझने में नई जानकारी प्रदान करती है।

क्यों है यह अद्वितीय:

  • पहली बार देखा गया: यह अब तक का पहला पुष्ट उदाहरण है, जहाँ ब्राउन ड्वार्फ़, लाल बौनों की जोड़ी के चारों ओर परिक्रमा कर रहे हैं।
  • बेहद दुर्लभ: सामान्यतः ब्राउन ड्वार्फ़ अकेले पाए जाते हैं या कभी-कभी एक साथी के साथ। केवल 5% से भी कम ब्राउन ड्वार्फ़ बहु-तारा प्रणालियों का हिस्सा होते हैं।
  • जटिल गतिकी: दो तारों और दो उप-तारकीय पिंडों के बीच का गुरुत्वाकर्षण संबंध इस प्रणाली को अध्ययन के लिए एक असाधारण प्राकृतिक प्रयोगशाला बनाता है।

भूरे बौने तारे:

  • ये खगोलीय पिंड तारे और ग्रह के बीच की श्रेणी में आते हैं।
  • बनने का तरीका: गैस और धूल के बादल से तारे की तरह बनते हैं, लेकिन इनमें हाइड्रोजन संलयन (fusion) करने के लिए पर्याप्त द्रव्यमान नहीं होता।
  • इन्हें “Failed Stars” (असफल तारे) भी कहते हैं।
  • द्रव्यमान: बृहस्पति (Jupiter) से लगभग 70 गुना तक हो सकता है।
  • वातावरण: गैस दानव ग्रहों (Jupiter, Saturn) जैसा, जिनमें जलवाष्प और अणु पाए जाते हैं।
  • बहुत धुंधले और ठंडे होते हैं, आमतौर पर अन्य तारों के साथ पाए जाते हैं।
  • महत्व: ये तारे और ग्रहों के बीच की सीमा को समझने में मदद करते हैं और ब्रह्मांड में द्रव्यमान वितरण व डार्क मैटर के अध्ययन में उपयोगी हैं।

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