Apni Pathshala

राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (NJAC) | UPSC Preparation

NJAC

NJAC

संदर्भ: 

हाल ही में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (NJAC) को पुनर्जीवित करने की मांग वाली याचिका पर विचार करने की बात कही है।

राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (NJAC) क्या है?

    • परिचय: राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (NJAC) भारत में उच्च न्यायालयों और सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति एवं स्थानांतरण के लिए प्रस्तावित संवैधानिक निकाय था। 
    • उद्देश्य: इसे 99वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2014 के माध्यम इसका गठन किया गया था, ताकि मौजूदा कोलेजियम प्रणाली को बदला जा सके और नियुक्तियों में अधिक पारदर्शिता, जवाबदेही और विविधता लाई जा सके। 
  • संवैधानिक आधार: 99वां संविधान संशोधन अधिनियम, 2014 के द्वारा संविधान में Article 124A, 124B और 124C जोड़े गए। इन्हीं अनुच्छेदों ने NJAC की रचना, अधिकार–क्षेत्र और कार्यप्रणाली को संवैधानिक दर्जा दिया। साथ ही NJAC अधिनियम, 2014 लाया गया, जिसका उद्देश्य NJAC की प्रक्रियाएं, चयन मानदंड, संचालन और निर्णय प्रणाली को निर्धारित करना था।
  • रोक: 13 अप्रैल 2015 को यह अधिनियम लागू हुआ, परन्तु 16 अक्टूबर 2015 को सुप्रीम कोर्ट की पाँच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने 4:1 बहुमत से इसे असंवैधानिक घोषित कर दिया। इस प्रकार NJAC अस्तित्व में तो आया, पर प्रभावी रूप से लागू नहीं हो पाया।

NJAC की संरचना और कार्य:

    • संरचना: NJAC कुल 6 सदस्यों वाला आयोग होना प्रस्तावित था। इसके सदस्य भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) — अध्यक्ष, सुप्रीम कोर्ट के दो वरिष्ठतम न्यायाधीश — सदस्य, कानून और न्याय मंत्री — सदस्य, दो प्रख्यात व्यक्ति (Eminent Persons) हो सकते थे। इनमें से एक व्यक्ति अनिवार्य रूप से SC/ST/OBC/अल्पसंख्यक या महिला समुदाय से होना आवश्यक था।
  • कार्य: NJAC को न्यायपालिका से संबंधित सभी महत्वपूर्ण नियुक्तियों का दायित्व दिया गया था—
  • सुप्रीम कोर्ट में नियुक्तियाँ: CJI की नियुक्ति, सुप्रीम कोर्ट के अन्य न्यायाधीशों का चयन (वरिष्ठता + योग्यता + क्षमता आधारित चयन)
  • उच्च न्यायालयों में नियुक्तियाँ: उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति, अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति, संबंधित हाई कोर्ट के CJs और दो वरिष्ठतम न्यायाधीशों से परामर्श लेना।
  • न्यायाधीशों का स्थानांतरण: उच्च न्यायालयों के बीच ट्रांसफर की सिफारिश करना, योग्यता, क्षमता और अन्य निर्धारित मानदंडों की जांच। 
  • निष्पक्ष: Article 124B ने NJAC को यह सुनिश्चित करने का दायित्व दिया कि चयन प्रक्रिया मानकीकृत, निष्पक्ष और पारदर्शी हो।
  • निर्णय प्रक्रिया: किसी उम्मीदवार पर दो सदस्य भी आपत्ति कर देते तो नियुक्ति नहीं हो सकती थी। यह ‘Institutional Veto’ था, जिसका उद्देश्य संतुलन बनाना था।

सुप्रीम कोर्ट ने NJAC को असंवैधानिक क्यों घोषित किया?

16 अक्टूबर 2015 को सुप्रीम कोर्ट ने NJAC को मूल संरचना सिद्धांत (Basic Structure Doctrine) के विरुद्ध माना। सुप्रीम कोर्ट के तर्क दिया कि इससे: 

  • कार्यपालिका की सीधी भागीदारी बढ़ जाने से न्यायपालिका की स्वतंत्रता खतरे में पड़ सकती है।
  • ‘प्रख्यात व्यक्तियों’ के चयन में राजनीतिक प्रभाव का खतरा हो सकता है।
  • कोलेजियम प्रणाली, भले ही त्रुटिपूर्ण हो, परन्तु वह न्यायपालिका के आत्म-नियमन को सक्षम बनाती है।
  • न्यायिक नियुक्तियों पर अंतिम नियंत्रण कार्यपालिका को देना संवैधानिक रूप से अस्वीकार्य है।
  • पांच सदस्यीय बेंच के न्यायमूर्ति जे. चेलमेश्वर ने कहा कि कोलेजियम प्रणाली अस्पष्ट, अपारदर्शी और जवाबदेही-रहित है, इसलिए NJAC एक बेहतर लोकतांत्रिक मॉडल माना जाना चाहिए।

वर्तमान स्थिति:

NJAC वर्तमान में लागू नहीं है। अभी सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में नियुक्ति प्रक्रिया कॉलेजियम प्रणाली के अनुसार ही की जा रही है। हाल के वर्षों में नियुक्तियों में देरी, पारदर्शिता की कमी, विविधता का अभाव और अनुशंसा–वापसी जैसे मुद्दों ने कोलेजियम और सरकार के बीच टकराव बढ़ाया है।

Share Now ➤

क्या आपको Apni Pathshala के Courses, RNA PDF, Current Affairs, Test Series और Books से सम्बंधित कोई जानकारी चाहिए? तो हमारी विशेषज्ञ काउंसलर टीम आपकी सिर्फ समस्याओं के समाधान में ही मदद नहीं करेगीं, बल्कि आपको व्यक्तिगत अध्ययन योजना बनाने, समय का प्रबंधन करने और परीक्षा के तनाव को कम करने में भी मार्गदर्शन देगी।

Apni Pathshala के साथ अपनी तैयारी को मजबूत बनाएं और अपने सपनों को साकार करें। आज ही हमारी विशेषज्ञ टीम से संपर्क करें और अपनी सफलता की यात्रा शुरू करें

📞 +91 7878158882

Related Posts

Scroll to Top