India first private orbital rocket Vikram-I

संदर्भ:
27 नवंबर 2025 को प्रधानमंत्री द्वारा हैदराबाद में भारत के पहले निजी कक्षीय रॉकेट — विक्रम-I (Vikram-I) का लोकार्पण किया गया। यह कदम नवाचार-आधारित और निजी क्षेत्र समर्थित अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था की ओर एक बड़ा कदम है जो आने वाले समय में भारत को वैश्विक स्तर पर अंतरिक्ष क्षेत्र में प्रबल दावेदार बना सकता है।
विक्रम-I क्या है?
- परिचय: विक्रम-I भारत का एक अत्याधुनिक स्मॉल-लॉन्च व्हीकल (Small Satellite Launch Vehicle – SSLV वर्ग) है, जिसे निजी क्षेत्र की अग्रणी अंतरिक्ष कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस (Skyroot Aerospace) ने विकसित किया है। इसका नाम भारत के पहले अंतरिक्ष वैज्ञानिक और ISRO के संस्थापक डॉ. विक्रम साराभाई के सम्मान में रखा गया है। यह पूरी तरह व्यावसायिक उपयोग के लिए विकसित निजी रॉकेट है।
विक्रम-I की विशेषताएँ:
- मल्टी-स्टेज हाइब्रिड रॉकेट: विक्रम-I तीन-स्टेज कॉन्फ़िगरेशन पर आधारित है, जिसमें प्रथम, द्वितीय और तृतीय चरण ठोस ईंधन (Solid Fuel) आधारित हैं, जबकि अंतिम तरल-ईंधन वाला “अटिट्यूड ऑर्बिटल कंट्रोल सिस्टम (AOCS)” शामिल है। यह डिज़ाइन रॉकेट को अधिक स्थिरता और विश्वसनीयता प्रदान करता है।
- तेज़ और किफायती प्रक्षेपण क्षमता: यह 24–72 घंटे के भीतर तेजी से लॉन्च तैयार किया जा सकता है। इसकी लागत बड़े लॉन्च वाहनों की तुलना में काफी कम है।
- उन्नत कंपोज़िट संरचना: रॉकेट का अधिकांश ढांचा कार्बन-फाइबर कंपोज़िट सामग्री से बना है, जिससे इसका वजन कम और पेलोड क्षमता अधिक होती है।
- उच्च पेलोड क्षमता: यह लगभग 315–350 किलोग्राम तक पेलोड को 500 किलोमीटर LEO (Low Earth Orbit) में स्थापित कर सकता है। यह खासकर पृथ्वी अवलोकन, संचार, IoT और रक्षा से जुड़े छोटे उपग्रहों के लिए उपयुक्त है।
- 3D प्रिंटेड इंजन तकनीक: रॉकेट में स्काईरूट द्वारा विकसित कई 3D-प्रिंटेड थ्रस्टर्स और इंजन पार्ट्स शामिल हैं, जो लागत-कुशल और तेज निर्माण को संभव बनाते हैं।
- मॉड्यूलर डिज़ाइन: इसका डिज़ाइन पूरी तरह मॉड्यूलर है, जिससे भविष्य में विक्रम-II और विक्रम-III जैसे बड़े रॉकेटों में भी तकनीक का विस्तार आसान हो जाता है।
विक्रम-I का महत्व:
- भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र को गति: विक्रम-I भारत के निजी लॉन्च वाहनों का नया युग शुरू करता है और अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों की भूमिका मजबूत बनाता है।
- सस्ते और तेज लॉन्च समाधान: यह छोटे उपग्रहों को किफायती और तेज़ी से अंतरिक्ष में भेजने का विकल्प देता है, जिससे स्टार्ट-अप और MSME स्पेस सेक्टर को बड़ा लाभ मिल सकता है।
- वैश्विक स्मॉल-सैट मार्केट में प्रतिस्पर्धा विक्रम-I भारत को दुनिया के उभरते स्मॉल-सैट लॉन्च बाजार में मज़बूत प्रतिस्पर्धी बनाता है, जहां मांग तेजी से बढ़ रही है।
- स्वदेशी तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन: 3D-प्रिंटेड इंजन, कंपोज़िट संरचना और मॉड्यूलर डिज़ाइन भारत की उन्नत एयरोस्पेस इंजीनियरिंग क्षमता को दर्शाते हैं।
- राष्ट्रीय सुरक्षा: पृथ्वी अवलोकन, संचार और निगरानी से जुड़े छोटे उपग्रहों के तेजी से प्रक्षेपण की क्षमता भारत की सामरिक और सुरक्षा जरूरतों को पूरा करती है।
