Goa Tiger Reserve Proposal
संदर्भ:
गोवा में प्रस्तावित टाइगर रिज़र्व को लेकर हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय की सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी (CEC) ने एक रिपोर्ट प्रस्तुत की है। कमेटी ने गोवा के उन संरक्षित क्षेत्रों को पहले चरण में शामिल करने की अनुशंसा की है जो कर्नाटक के काली टाइगर रिज़र्व के कोर क्षेत्र से सीधे जुड़े हैं और जहाँ मानव बस्तियाँ सीमित हैं।
गोवा टाइगर रिज़र्व प्रस्ताव क्या हैं?
गोवा टाइगर रिज़र्व प्रस्ताव को राज्य सरकार ने पहली बार 2023 में तब विचाराधीन रखा जब राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) ने गोवा में Mhadei Wildlife Sanctuary, Bhagwan Mahavir Wildlife Sanctuary, और Mollem National Park को मिलाकर एक संभावित टाइगर रिज़र्व घोषित करने की अनुशंसा की।
- इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य पश्चिमी घाट में मौजूद बाघों के लिए सुरक्षित, वैज्ञानिक और संरक्षित आवास तैयार करना है, क्योंकि यह क्षेत्र एक सक्रिय टाइगर कॉरिडोर का हिस्सा माना जाता है जो कर्नाटक और गोवा के वन क्षेत्रों को जोड़ता है।
वर्तमान स्थिति:
24 जुलाई, 2023 को, बॉम्बे उच्च न्यायालय ने गोवा सरकार को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत तीन महीने के भीतर म्हादेई वन्यजीव अभयारण्य को बाघ अभयारण्य घोषित करने का निर्देश दिया। गोवा सरकार ने इस आदेश को सर्वोच्च न्यायालय में एक विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर करके चुनौती दी। इसी के तहत सर्वोच्च न्यायालय की सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी (CEC) ने अभी एक रिपोर्ट प्रस्तुत की है।
CEC रिपोर्ट के मुख्य बिंदु:
- CEC की प्रमुख सिफारिशों में उन क्षेत्रों को शामिल किया गया है जो काली टाइगर रिज़र्व के कोर क्षेत्र से भौगोलिक रूप से संलग्न हैं, जैसे— नेत्रावली वन्यजीव अभयारण्य (50 परिवार) और कोटिगांव वन्यजीव अभयारण्य (41 परिवार)।
- दोनों रिज़र्व को मिलाकर लगभग 1,814 वर्ग किमी का एकीकृत संरक्षण परिदृश्य तैयार किया जा सकेगा, जो पश्चिमी घाट में टाइगर मेटा-पॉपुलेशन सिस्टम को समर्थन देगा।
- CEC ने स्पष्ट रूप से कहा है कि मानव बस्तियों की अधिकता वाले क्षेत्रों, जैसे— भगवान महावीर वन्यजीव अभयारण्य का दक्षिणी भाग (लगभग 560 परिवार), म्हादई वन्यजीव अभयारण्य (लगभग 612 परिवार) को पहले चरण में शामिल करना उचित नहीं होगा।
- समिति ने चरणबद्ध (phased) दृष्टिकोण की अनुशंसा की है। पहले चरण में पारिस्थितिक रूप से उपयुक्त और सामाजिक रूप से कम संवेदनशील क्षेत्रों को शामिल किया जाए। बाद में समुदाय-परामर्श, आजीविका सुरक्षा और पुनर्वास संबंधी उपायों के पश्चात शेष क्षेत्रों पर विचार किया जाए।
- रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि टाइगर रिज़र्व घोषित होने से बफर ज़ोन में अनिवार्य विस्थापन नहीं होगा, न ही निजी भूमि का स्वतः अधिग्रहण किया जा सकेगा।
- रिपोर्ट के अनुसार, गोवा सरकार को अगले तीन महीनों में रिज़र्व की अधिसूचना प्रक्रिया शुरू करनी होगी। इसके साथ ही सरकार को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की धारा 38V के तहत एक विस्तृत टाइगर संरक्षण योजना (Tiger Conservation Plan) तैयार करनी होगी।
- इस प्रक्रिया में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) की केंद्रीय भूमिका होगी, क्योंकि NTCA द्वारा निर्धारित मानक भारत के अन्य सफल रिज़र्व—जैसे काजीरंगा, पेरियार, और बांधवगढ़—में प्रभावी रहे हैं।
इस टाइगर रिजर्व का महत्व:
- पश्चिमी घाट संरक्षण – यह रिज़र्व भारत के प्रमुख जैव-विविधता हॉटस्पॉट को मजबूत सुरक्षा प्रदान करेगा और दुर्लभ प्रजातियों के आवास को बचाएगा।
- टाइगर कॉरिडोर की सुरक्षा – गोवा-कर्नाटक के बीच बनने वाला संरक्षित कॉरिडोर बाघों की लंबी दूरी की आवाजाही और जीन प्रवाह को सुरक्षित करेगा।
- मानव–वन्यजीव संघर्ष में कमी – वैज्ञानिक प्रबंधन, निगरानी और बफर ज़ोन विकास से स्थानीय समुदायों में संघर्ष की घटनाओं में कमी आएगी।
- पारिस्थितिक पर्यटन को बढ़ावा – टाइगर रिज़र्व बनने से नियंत्रित इको-टूरिज़्म विकसित होगा, जिससे स्थानीय लोगों को आय के नए अवसर मिलेंगे।
- जल स्रोतों और जंगलों की रक्षा – Mhadei नदी बेसिन और पश्चिमी घाट के वन क्षेत्र टाइगर रिज़र्व की वजह से बेहतर संरक्षण में आएँगे, जिससे क्षेत्रीय जल सुरक्षा बढ़ेगी।

