Indian AI innovation in molecular understanding of cancer OncoMark
संदर्भ:
हाल ही में S. N. Bose National Centre for Basic Sciences और Ashoka University के शोधकर्ताओं ने एक क्रांतिकारी एआई आधारित ढांचा OncoMark विकसित किया है, जो कैंसर के “मॉलिक्यूलर दिमाग” को पढ़कर उसके वास्तविक व्यवहार का पूर्वानुमान देने में सक्षम है।
ऑन्कोमार्क का परिचय:
- अवधारणा: ऑन्कोमार्क एक अत्याधुनिक AI-आधारित विश्लेषण प्रणाली है, जो कैंसर कोशिकाओं के भीतर मौजूद जटिल जैव-रासायनिक संकेतों का अध्ययन करती है। यह परंपरागत “साइज़ और स्टेज” आधारित वर्गीकरण के अतिरिक्त कैंसर की हॉलमार्क-आधारित पहचान करती है।
- हॉलमार्क पहचान: कैंसर विज्ञान में “Hallmarks of Cancer” उन मूलभूत प्रक्रियाओं को कहा जाता है, जो सामान्य कोशिकाओं को घातक बनाती हैं—जैसे मेटास्टेसिस, इम्यून इवेज़न, जीनोमिक अस्थिरता, आदि। ऑन्कोमार्क इन सभी हॉलमार्क को एकीकृत रूप से पढ़कर यह बताती है कि कौन-सी प्रक्रिया किस रोगी में सक्रिय है, और उसकी बीमारी आगे कैसे बढ़ सकती है।
ऑन्कोमार्क की कार्यप्रणाली:
ऑन्कोमार्क कैंसर कोशिकाओं के भीतर उपस्थित हजारों जीन एक्सप्रेशन संकेतों को न्यूरल नेटवर्क के माध्यम से पढ़ता है। यह पता लगाता है कि किन-किन हॉलमार्क की तीव्रता बढ़ रही है, जैसे— ट्यूमर का आक्रामक बनना, प्रतिरक्षा प्रणाली से बच निकलना, डीएनए की अस्थिरता, अनियंत्रित कोशिका विभाजन। इन संकेतों के आधार पर एआई एक हॉलमार्क एक्टिविटी मैप तैयार करता है, जो हर रोगी के लिए विशिष्ट होता है।
ऑन्कोमार्क की प्रमुख विशेषताएं:
- “प्स्यूडो-बायोप्सी” तकनीक: शोधकर्ताओं ने पहली बार 3.1 मिलियन कोशिकाओं के आधार पर सिंथेटिक प्स्यूडो-बायोप्सीज़ तैयार कीं। इससे एआई को वे पैटर्न सीखने में सहायता मिली जो सामान्य बायोप्सी नमूनों में दिखाई नहीं देते।
- उच्च विश्वसनीयता: आंतरिक परीक्षणों में 99% से अधिक सटीकता पाई गई। पाँच स्वतंत्र डेटा सेटों में 96% से अधिक सटीकता और 20,000 वास्तविक रोगी नमूनों पर सफल मान्यता यह दर्शाता है कि यह मॉडल वैश्विक स्तर के किसी भी जीनोमिक डेटा पर समान रूप से कारगर है।
- व्यक्तिगत उपचार में उपयोग: ऑन्कोमार्क अब यह बता सकता है कि: कौन-सा हॉलमार्क किसी रोगी में सबसे अधिक सक्रिय है, कौन-सी आक्रामक प्रक्रिया रोग को तेजी से बढ़ा रही है, किस रोगी को किस प्रकार की टार्गेटेड थेरेपी दी जानी चाहिए।
- आक्रामक कैंसर की समय पर पहचान: कई कैंसर परंपरागत TNM स्टेजिंग में “माइल्ड” दिखते हैं, परंतु मॉलिक्यूलर स्तर पर अत्यंत आक्रामक होते हैं। ऑन्कोमार्क ऐसे कैंसरों को जल्दी पहचानकर उपचार की रणनीति बदलने में मदद कर सकता है।
- वेब-आधारित प्लेटफ़ॉर्म: वैज्ञानिकों ने एक उपयोगकर्ता-अनुकूल वेब टूल भी विकसित किया है, जिसे डॉक्टर और शोधकर्ता आसानी से उपयोग कर सकते हैं।
भारत की विज्ञान-नीति में भूमिका:
- जैव-चिकित्सीय अनुसंधान: ऑन्कोमार्क भारत की वैज्ञानिक क्षमताओं में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह दर्शाता है कि भारत उच्च स्तरीय बायोइन्फॉर्मेटिक्स, सिंगल-सेल सीक्वेंसिंग, और AI-चालित स्वास्थ्य-तकनीक के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व कर सकता है।
- राष्ट्रीय कैंसर नियंत्रण कार्यक्रम: ऑन्कोमार्क भविष्य में कैंसर स्क्रीनिंग, जोखिम मानचित्रण, क्लिनिकल निर्णय-निर्माण, दवा चयन में उपयोगी साबित हो सकता है। जो भारत के मेडिकल AI मिशन, राष्ट्रीय जैव प्रौद्योगिकी नीति, तथा PM-Digital Health Mission के लक्ष्यों से भी सीधे जुड़ता है।
- आर्थिक प्रभाव: भारत में हर वर्ष लगभग 14 लाख नए कैंसर मामले दर्ज होते हैं। व्यक्तिगत स्तर पर उपचार की सटीकता बढ़ने से महंगे परीक्षणों की आवश्यकता घट सकती है, उपचार की सफलता दर बढ़ सकती है, रोगियों की दीर्घकालिक देखभाल में सुधार हो सकता है।

