Research and Development in Defence Manufacturing Sector
संदर्भ:
भारत ने पिछले एक दशक में रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को राष्ट्रीय रणनीतिक लक्ष्य के रूप में अपनाया है। इस दिशा में अनुसंधान एवं विकास (R&D) का सुदृढ़ीकरण के लिए बहुआयामी कदम लागू किए गए हैं, जिनका समग्र उद्देश्य उन्नत प्रौद्योगिकियों का स्वदेशी विकास, नवाचार को प्रोत्साहन तथा भारत को वैश्विक रक्षा आपूर्ति श्रृंखला में प्रतिस्पर्धी स्थान दिलाना है।
रक्षा R&D में नई साझेदारियाँ:
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- Development-cum-Production Partnership (DCPP): भारत में पहले रक्षा अनुसंधान मुख्यतः सरकारी संस्थानों तक सीमित था, किन्तु नई नीति में निजी क्षेत्र, MSME और स्टार्टअप्स को सक्रिय भागीदार बनाया गया है। DCPP तथा उत्पादन एजेंसी (PA) मॉडल के माध्यम से DRDO प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया द्वारा उद्योग साझेदारों का चयन कर रहा है। इसके माध्यम से 2000 से अधिक उद्योगों का एक सुदृढ़ नेटवर्क तैयार हुआ है।
- प्रौद्योगिकी हस्तांतरण: रक्षा विनिर्माण में आत्मनिर्भरता का आधार हमेशा प्रौद्योगिकी स्वामित्व रहा है। इसी सोच के अनुरूप DRDO ने उद्योगों को शून्य ToT शुल्क पर तकनीक हस्तांतरित करने की नीति लागू की है।
- पेटेंट उदारीकरण: DRDO ने पेटेंटों को भारतीय उद्योगों के लिए मुक्त क्षेत्र (Free Access) के रूप में उपलब्ध कराया गया है। यह नीति वैश्विक स्तर पर दुर्लभ है, क्योंकि अधिकांश देशों के रक्षा पेटेंट अत्यंत सीमित पहुँच में रहते हैं।
- Technology Development Fund (TDF): रक्षा मंत्रालय की Technology Development Fund (TDF) योजना के माध्यम से 26 महत्त्वपूर्ण प्रौद्योगिकियाँ विकसित की जा चुकी हैं और दो प्रणालियाँ PSLV मिशन के तहत अंतरिक्ष में भेजी गईं। 2025 में TDF के लिए ₹500 करोड़ की अतिरिक्त धनराशि स्वीकृत की गई है, जिससे डीप-टेक तथा अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी पर फोकस बढ़ा है।
- Dare to Dream प्रतियोगिता: साथ ही Dare to Dream प्रतियोगिता, जिसे चार बार आयोजित किया जा चुका है, व्यक्तिगत नवप्रवर्तकों और स्टार्टअप्स को रक्षा क्षेत्र हेतु अभिनव समाधानों के विकास के लिए प्रेरित कर रही है।
- iDEX (Innovations for Defence Excellence): यह प्लेटफॉर्म PME-initiated innovation ecosystem के तहत विकसित किया गया है, जो स्टार्टअप्स/एमएसएमई को अनुदान, तकनीकी सहायता और प्रोटोटाइपिंग समर्थन उपलब्ध कराता है।
- बजट विस्तार: R&D को दीर्घकालिक गति देने के लिए सरकार ने रक्षा R&D बजट का 25% निजी उद्योग, स्टार्टअप और अकादमिक संस्थानों के लिए स्वीकृत किया है। यह निर्णय वैश्विक देशों विशेषकर अमेरिकी DARPA मॉडल के अनुरूप है।
- रक्षा उद्योग गलियारे: उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु रक्षा औद्योगिक गलियारे मेक-इन-इंडिया तथा निर्यात-उन्मुख विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए DRDO के तकनीकी सहयोग के साथ विकसित किए जा रहे हैं। ये गलियारे रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र में क्लस्टर आधारित नवाचार और उत्पादन क्षमता का निर्माण करते हैं।

