Child Marriage Free India Campaign

संदर्भ:
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने 4 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली में बाल विवाह मुक्त भारत अभियान की पहली वर्षगांठ के अवसर पर बाल विवाह मुक्त भारत के लिए 100 दिवसीय गहन जागरूकता अभियान का शुभारंभ किया।
बाल विवाह मुक्त भारत अभियान क्या हैं?
-
- परिचय: बाल विवाह मुक्त भारत अभियान भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा संचालित एक राष्ट्रीय स्तर की सामाजिक पहल है, जिसका उद्देश्य देश में बाल विवाह की प्रथा को पूर्णतः समाप्त करना, बालिकाओं को सशक्त बनाना और उनके लिए सुरक्षित, सम्मानजनक तथा समान अवसरों वाला समाज तैयार करना है।
- शुरुआत: यह अभियान 27 नवंबर 2024 को शुरू किया गया था, और 27 नवंबर 2025 को इसके एक वर्ष पूरे होने पर इसे और अधिक प्रभावी बनाने के लिए 100-दिवसीय गहन जागरूकता अभियान की शुरुआत की घोषणा की गई।
- लक्ष्य: इस अभियान का लक्ष्य केवल बाल विवाह रोकना नहीं है, बल्कि समुदाय में बाल विवाह के प्रति शून्य सहनशीलता का वातावरण बनाना है, ताकि समाज स्वयं बाल विवाह को अस्वीकार करे। यह पहल भारत के 2047 तक विकसित भारत के दृष्टिकोण का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है।
बाल विवाह मुक्त भारत अभियान की संरचना:
- तीन-चरणीय 100-दिवसीय योजना:
-
- पहला चरण (27 नवंबर–31 दिसंबर 2025): विद्यालयों और कॉलेजों में प्रतियोगिताएँ, संकल्प समारोह और संवादात्मक सत्र।
- दूसरा चरण (1–31 जनवरी 2026): धार्मिक नेताओं, समुदाय के प्रभावशाली व्यक्तियों और विवाह सेवा प्रदाताओं के साथ जागरूकता विस्तार।
- तीसरा चरण (1 फरवरी–8 मार्च 2026): पंचायतों एवं नगर निकायों द्वारा बाल विवाह मुक्त प्रस्ताव पारित कराना।
- बहु-मंत्रालयीय समन्वय: यह अभियान स्वास्थ्य, शिक्षा, ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्रालय के सहयोग से संचालित है, ताकि विभिन्न स्तरों पर एकीकृत कार्य सुनिश्चित हो सके।
अभियान की मुख्य विशेषताएँ:
- बाल विवाह मुक्त भारत पोर्टल: एक अभिनव ऑनलाइन मंच जो शिकायत दर्ज, रिपोर्टिंग, और CMPO की जानकारी उपलब्ध कराता है। नागरिक भागीदारी को संस्थागत बनाता है।
- 16-दिवसीय वैश्विक अभियान से सामंजस्य: यह पहल 25 नवंबर–10 दिसंबर तक चलने वाले वैश्विक लैंगिक हिंसा उन्मूलन आंदोलन के अनुरूप कार्य करती है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विषय की गंभीरता को बढ़ावा मिलता है।
- शपथ और सामुदायिक संकल्प: अभियान के तहत देशव्यापी सामूहिक संकल्प का आयोजन किया जाता है ताकि समाज बाल विवाह के प्रति शून्य सहनशीलता विकसित करे।
- उच्च जोखिम वाले राज्यों पर फोकस: पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, राजस्थान, असम, त्रिपुरा और आंध्र प्रदेश में जागरूकता की तीव्रता बढ़ाई गई है क्योंकि यहाँ बाल विवाह दर अपेक्षाकृत अधिक है।
भारत में बाल विवाह की स्थिति:
भारत में 5 में से 1 बालिका अभी भी 18 वर्ष से पहले विवाह का सामना करती है। 2006 के बाल विवाह निषेध अधिनियम के बाद बाल विवाह दर में गिरावट आई है—यह 2019-21 में 47.4% से घटकर 23.3% हो गया है। पिछले एक वर्ष में लगभग दो लाख बाल विवाह रोके गए जो सामुदायिक जागरूकता और प्रशासनिक कार्रवाई का संकेत है। PCMA, 2006 के तहत बालिकाओं (18 वर्ष) और बालकों (21 वर्ष) की निर्धारित आयु से पहले विवाह करना दंडनीय है। जुवेनाइल जस्टिस अधिनियम, 2015 भी खतरे में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
भारत में बाल विवाह उन्मूलन के लिए संस्थागत प्रयास:
- राष्ट्रीय कार्य योजना: बचाव, सहायता, डेटा-सुदृढ़ीकरण और स्थानीय स्तर के समन्वय पर केंद्रित एक विस्तृत रणनीति।
- बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ (2015): लिंग आधारित भेदभाव को समाप्त करने तथा बालिकाओं के जन्म, शिक्षा और सुरक्षा पर जोर देती है।
- आपातकालीन सेवाएँ – CHILDLINE (1098): अल्पायु विवाह से सम्बद्ध संकट स्थितियों में तत्काल सहायता सुनिश्चित करती है।
- UNICEF एवं राज्यों की साझेदारी: जैसे– बिहार में धार्मिक नेताओं के प्रशिक्षण, गांवों में युवाचार्य प्रणाली आदि।
अभियान का महत्व:
- सामाजिक सशक्तिकरण: बाल विवाह रोकना, महिलाओं को शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक अवसर प्रदान करने की नींव है। जो SDG-5 (Gender Equality) के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक है।
- जनसांख्यिकीय लाभांश: समयपूर्व विवाह से मातृ मृत्यु दर, नवजात मृत्यु दर और कुपोषण बढ़ता है। इसे रोकने से जनसंख्या स्वास्थ्य सुधार और मानव पूंजी विकास का आधार मजबूत होता है।
- सामुदायिक भागीदारी: पंचायतों, धार्मिक नेताओं और युवाओं की सहभागिता सामाजिक सुधार को संस्थागत रूप देती है, जिससे नीतियाँ जमीन पर वास्तविक प्रभाव डालती हैं।
