NCBC
संदर्भ:
हाल ही में, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (NCBC) ने केंद्र सरकार को पश्चिम बंगाल से 35 मुस्लिम समुदायों को केंद्रीय OBC सूची से बाहर करने की सिफारिश की है। यह कदम 2014 में अचानक जोड़े गए 37 समुदायों की समीक्षा का परिणाम है। जिसके लिए आयोग ने जाँच 2023 में शुरू की थी और सिफारिश जनवरी 2025 में प्रस्तुत की थी।
राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (NCBC):
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- परिचय: राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (NCBC) भारत के संविधान के तहत एक संवैधानिक निकाय है, जो सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण मंत्रालय के अधीन कार्य करता है। इसका उद्देश्य सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों (OBCs) के विकास की निगरानी और सलाह देना है।
- स्थापना: NCBC की स्थापना 14 अगस्त 1993 को राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग अधिनियम, 1993 के तहत एक सांविधिक निकाय के रूप में हुई थी। सुप्रीम कोर्ट के इंदिरा साहनी बनाम भारत संघ (16 नवंबर 1992) के निर्णय के बाद, 11 अगस्त 2018 इसका गठन किया गया।
- वैधानिक आधार: आयोग को 102वें संवैधानिक संशोधन के माध्यम से संवैधानिक दर्जा प्रदान किया गया और इसे अनुच्छेद 338B के तहत संवैधानिक शक्तियाँ दी गईं। साथ ही अनुच्छेद 340 के अनुसार, राष्ट्रपति को सामाजिक और पिछड़े वर्गों की स्थिति की जाँच के लिए आयोग बनाना होता है।
- संरचना: NCBC में एक अध्यक्ष, एक उपाध्यक्ष और तीन अन्य सदस्य होते हैं। राष्ट्रपति द्वारा इन पदाधिकारियों की नियुक्ति वश हस्ताक्षरित आदेश द्वारा की जाती है। आयोग के पास अपनी कार्यप्रणाली निर्धारित करने का अधिकार है।
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- वर्तमान सदस्य: इसके अध्यक्ष श्री हंसराज गंगाराम अहिर,सदस्य: श्री भुवन भूषण कमल, श्री कौशलेंद्र सिंह पटेल, श्री थल्लोजू आचार्य कानूनी सलाहकार: श्री रमेश बाबू विश्वनाथुला है।
- शक्तियां: NCBC का मुख्य कार्य है OBC सूची में वर्गों के समावेश और बहिष्कार पर सरकार को सलाह देना। आयोग को सिविल कोर्ट जैसी शक्तियाँ प्राप्त हैं। 102वें संशोधन से पहले, OBC वर्ग के व्यक्तियों की शिकायतों की देखरेख SC आयोग के पास थी, लेकिन अब यह NCBC के अधिकार क्षेत्र में है।
अनुच्छेद 338B(5) के तहत जिम्मेदारियाँ:
- सुरक्षात्मक उपायों की निगरानी: सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए संविधान या अन्य कानूनों के तहत प्रदत्त सुरक्षा उपायों की जाँच।
- शिकायतों की जाँच: पिछड़े वर्गों के अधिकारों और सुरक्षा उपायों के हनन की शिकायतों की जांच।
- सामाजिक-आर्थिक विकास: पिछड़े वर्गों के विकास के लिए नीति और कार्यक्रमों पर सलाह देना।
- वार्षिक रिपोर्ट: राष्ट्रपति को वार्षिक और आवश्यकता अनुसार रिपोर्ट प्रस्तुत करना।
- सिफारिशें: राज्य और केंद्र सरकार को प्रभावी कार्यान्वयन के लिए सुझाव देना।
- अन्य कार्य: पिछड़े वर्गों की सुरक्षा, कल्याण और सामाजिक-आर्थिक उन्नति के संबंध में अन्य कार्य करना।
विकासात्मक पहल और अनुशंसाएँ:
- आय निर्धारण: NCBC ने 2015 में OBC के लिए आय सीमा ₹15 लाख तक बढ़ाने का सुझाव दिया था, जो वर्तमान ₹8 लाख की सीमा (क्रीमी लेयर के लिए) से अधिक है।
- OBC वर्गीकरण: OBC के उप-वर्गीकरण (पिछड़ा, अधिक पिछड़ा, अति पिछड़ा) तथा 27% आरक्षण के वितरण की बात कही गई है, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने भी सही ठहराया है।

