Apni Pathshala

नए राफ्ट स्पाइडर डोलोमेड इंडिकस की खोज (New raft spider Dolomedes indicus discovered) | UPSC

New raft spider Dolomedes indicus discovered

New raft spider Dolomedes indicus discovered

संदर्भ:

हाल ही में केरल के वायनाड जिले की सदाबहार वर्षावनों में शोधकर्ताओं ने डोलोमेड इंडिकस नामक एक नई मकड़ी प्रजाति की खोज की है। यह शोध केरल फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट (KFRI) ने लक्किडी और पेरिया क्षेत्र की घाटी में किया। यह भारत में पहली बार है जब डोलोमेडेज वंश (Raft/Fishing Spiders) की किसी प्रजाति की वैज्ञानिक खोज की गई है। 

प्रजाति का परिचय:

  • Dolomedes indicus एक अर्ध-जलचर शिकारी मकड़ी है जो जाल नहीं बनाती। यह जल सतह के तनाव का उपयोग करके शिकार करती है। 
  • यह मकड़ी नमी भरे, ठंडे और स्वच्छ मीठे पानी वाले क्षेत्रों में रहती है। यह प्रजाति धीमी गति वाली, प्रदूषण-मुक्त धाराओं पर निर्भर करती है, जिससे यह महत्वपूर्ण सूचक प्रजाति (Indicator Species) बन जाती है।

आवासीय विशेषताएँ: 

  • यह मकड़ी वेस्टर्न घाट के घने वनाच्छादन वाले क्षेत्रों में बहने वाली ठंडी, सतत धाराओं में पाई जाती है। 
  • यह सिर्फ अप्रदूषित और गतिशील जल में जीवित रह सकती है और स्थिर या प्रदूषित जल में अनुपस्थित रहती है। 
  • इस संवेदनशीलता के कारण यह प्रजाति भविष्य में जलवायु परिवर्तन और भूमि-उपयोग परिवर्तनों का प्रभाव समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

शिकार व्यवहार:

  • Dolomedes indicus घात लगाकर शिकार करने वाली शिकारी है। यह अपने आगे के पैरों को पानी की सतह पर टिकाकर कंपन पहचानती है। जैसे ही कोई कीट या छोटी मछली पानी में हलचल पैदा करती है, यह मकड़ी तेज़ गति से पानी की सतह पर दौड़ती है और शिकार पर झपट पड़ती है।

जल-आधारित अनुकूलन:

  • इस प्रजाति के शरीर पर हाइड्रोफोबिक रोम होते हैं, जिनमें वायु का एक पतला परत फँस जाती है। यही हवा की परत इसे लंबे समय तक पानी के भीतर सांस लेने में सक्षम बनाती है। 
  • अध्ययन में एक फीमेल मकड़ी को लगभग 90 मिनट तक जलमग्न रहते देखा गया। यह क्षमता इसे शिकारी से बचने और शिकार पकड़ने दोनों में लाभ देती है।

बाह्य संरचना एवं लैंगिक द्विरूपता:

  • इस प्रजाति में लैंगिक द्विरूपता स्पष्ट है। नर मकड़े के चेहरे से लेकर पीठ के मध्य तक चटक सफेद धार दिखाई देती है, जो इसे आसानी से पहचानने योग्य बनाती है। 
  • मादा आकार में बड़ी और हरे-भूरे रंग की होती है, जिससे वह काई और आसपास की वनस्पति में आसानी से छिप जाती है।

प्रजनन व्यवहार:

  • मादा मकड़ी अपने अंडों की कोषिका को जबड़ों में पकड़कर चलती है और अंडे फूटने से पहले वनस्पति के बीच एक नर्सरी वेब बनाती है। वह लगभग एक सप्ताह तक बच्चों की रक्षा करती है और उनके स्वतंत्र होने तक उन्हें सुरक्षा प्रदान करती है।

खोज का महत्व:

  • यह खोज भारतीय जीव-जगत के लिए ऐतिहासिक है क्योंकि इस वंश की किसी प्रजाति का पहले कभी भी आधिकारिक वैज्ञानिक विवरण भारत में दर्ज नहीं था। 
  • इसके साथ ही यह खोज वेस्टर्न घाट की अनछुई जैवविविधता और जल–निर्भर पारिस्थितिक तंत्र की संवेदनशीलता को दर्शाती है। शोधकर्ताओं ने नमूनों को स्थायी संरक्षण हेतु KFRI की कीट संग्रहशाला में जमा किया, जिससे भविष्य में प्रजाति की प्रमाणिकता बनी रहे।
  • इस प्रजाति की खोज वेस्टर्न घाट के मीठे पानी के पारिस्थितिकी तंत्र पर बढ़ते खतरों की ओर संकेत करती है। जलवायु परिवर्तन, अनियंत्रित निर्माण, और भूमि-उपयोग में बदलाव इन धाराओं को प्रभावित कर रहे हैं।

Share Now ➤

क्या आपको Apni Pathshala के Courses, RNA PDF, Current Affairs, Test Series और Books से सम्बंधित कोई जानकारी चाहिए? तो हमारी विशेषज्ञ काउंसलर टीम आपकी सिर्फ समस्याओं के समाधान में ही मदद नहीं करेगीं, बल्कि आपको व्यक्तिगत अध्ययन योजना बनाने, समय का प्रबंधन करने और परीक्षा के तनाव को कम करने में भी मार्गदर्शन देगी।

Apni Pathshala के साथ अपनी तैयारी को मजबूत बनाएं और अपने सपनों को साकार करें। आज ही हमारी विशेषज्ञ टीम से संपर्क करें और अपनी सफलता की यात्रा शुरू करें

📞 +91 7878158882

Related Posts

Scroll to Top