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कर्नाटक हेट स्पीच एवं हेट क्राइम निवारण विधेयक 2025 (Karnataka Hate Speech and Hate Crime Prevention Bill 2025) | Ankit Avasthi Sir

Karnataka Hate Speech and Hate Crime Prevention Bill 2025

Karnataka Hate Speech and Hate Crime Prevention Bill 2025

संदर्भ:

कर्नाटक सरकार विधानसभा सत्र 2025 में कर्नाटक हेट स्पीच एवं हेट क्राइम (निवारण) विधेयक, 2025 प्रस्तुत करने जा रही है। यह भारत का पहला राज्य है, जिसने हेट स्पीच को स्पष्ट रूप से परिभाषित करने और दंडित करने के लिए अलग विधेयक तैयार किया है। यह बिल भारत में लंबे समय से चली आ रही विधायी कमी को रेखांकित करता है, क्योंकि भारतीय दंड संहिता (IPC/BNS) में हेट स्पीच का स्पष्ट और अलग प्रावधान नहीं है।

इसकी आवश्यकता क्यों?

  • राष्ट्रीय स्तर पर कानून की कमी: अब तक भारत में धारा 153A, 295A, 505 आदि के अंतर्गत ही घृणा से जुड़े अपराध दर्ज होते रहे हैं, परंतु इन धाराओं में प्रत्यक्ष परिभाषा नहीं होने से पुलिस और न्यायालयों को व्यापक विवेकाधिकार मिलता है।

  • सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणियाँ: 2021–2023 के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने सरकारों से आग्रह किया कि बढ़ते हेट स्पीच मामलों को रोकने के लिए स्पष्ट विधायी ढांचा आवश्यक है। अक्टूबर 2022 में सर्वोच्च न्यायालय ने सभी राज्यों को स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई करने का निर्देश दिया था। 

विधेयक के मुख्य प्रावधान:

  • हेट स्पीच की परिभाषा: बिल किसी भी अभिव्यक्ति — मौखिक, लिखित, दृश्य, डिजिटल — को हिंसा, द्वेष, वैमनस्य, या सामाजिक विभाजन फैलाने वाला मानेगा, यदि वह धर्म, जाति, नस्ल, लिंग, यौन अभिविन्यास, जन्मस्थान, भाषा, जनजाति या विकलांगता पर आधारित हो। यह परिभाषा BNS से अधिक व्यापक है।

  • हेट क्राइम की परिभाषा: हेट क्राइम को हेट स्पीच के प्रसार, प्रचार, या संगठनात्मक रूप से संचालित गतिविधियों से जोड़ा गया है। यह हेट स्पीच से भिन्न और अधिक गंभीर अपराध माना गया है।

दंड प्रावधान:

  • पहली बार दोषी: 1–7 वर्ष कारावास + ₹50,000 या अधिक जुर्माना
  • पुनरावृत्ति: 10 वर्ष तक कारावास + भारी दंड
  • पीड़ित को क्षतिपूर्ति का अधिकार
  • सामूहिक दायित्व: राजनीतिक, धार्मिक या सामाजिक संगठन भी दोषी माने जा सकते हैं यदि उनके भीतर या उनके मंच से हेट स्पीच हुई हो। इससे संगठनात्मक स्तर पर जवाबदेही तय होती है।

  • डिजिटल सामग्री नियंत्रण: राज्य सरकार ऑनलाइन सामग्री हटाने, ब्लॉक करने, या प्लेटफ़ॉर्म को निर्देश देने की शक्ति प्राप्त करेगी। इसमें इंटरनेट सेवा प्रदाता, सोशल मीडिया कंपनियाँ और खोज इंजन शामिल होंगे।

  • प्रक्रिया संबंधी प्रावधान: अपराध संज्ञेय और अवरुद्ध-न-योग्य (नॉन-बेलेबल), इसके बाद मजिस्ट्रेट के समक्ष विचारण और त्वरित कार्रवाई के लिए विशेष प्रोटोकॉल।

विधेयक की महत्ता:

    • कानूनी शून्य की पूर्ति: यह बिल केंद्र के मौजूदा कानूनों में मौजूद परिभाषागत शून्य की पूर्ति करने में मदद करेगा। यह स्पष्ट रूप से निर्धारित करता है कि हेट स्पीच क्या है और उसका दंड क्या होगा।

  • सामाजिक सद्भाव की सुरक्षा: बढ़ते डिजिटल उपयोग, राजनीतिक ध्रुवीकरण और सामाजिक तनाव के बीच यह बिल सामाजिक सौहार्द, लोकतांत्रिक विमर्श, और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा का प्रयास करता है।

विधेयक से जुड़े संवैधानिक प्रश्न:

  • अनुच्छेद 19(1)(a) एवं 19(2): यह बिल अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीमा निर्धारित करता है। कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि दंड प्रावधान अत्यधिक व्यापक हो सकते हैं और निष्पक्ष आलोचना या राजनीतिक असंतोष को प्रभावित कर सकते हैं।

  • संघ-सूची और इंटरनेट विनियमन: इंटरनेट का नियमन केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र (Union List: Entry 31) में आता है। इसलिए राज्य सरकार की डिजिटल सामग्री हटाने की शक्ति पर संवैधानिक वैधता का प्रश्न उठता है।

  • दुरुपयोग की संभावना: राजनीतिक हितों, सामाजिक विरोध, या आलोचकों पर दबाव के लिए कानून का दुरुपयोग होने की आशंका भी व्यक्त की गई है।

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