International Anti-Corruption Day 2025

संदर्भ:
हर वर्ष 9 दिसंबर को अंतरराष्ट्रीय भ्रष्टाचार विरोधी दिवस (International Anti-Corruption Day) मनाया जाता है, जो भ्रष्टाचार से होने वाले वैश्विक नुकसान, पारदर्शिता, जवाबदेही तथा सुशासन की अनिवार्यता को रेखांकित करता है।
अंतरराष्ट्रीय भ्रष्टाचार विरोधी दिवस:
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शुरुआत: 31 अक्टूबर 2003 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने संयुक्त राष्ट्र भ्रष्टाचार विरोधी अभिसमय (UNCAC) को अपनाया जो भ्रष्टाचार से लड़ने वाला पहला वैश्विक कानूनी साधन बना। इसके कार्यान्वयन और जन-जागरूकता के लिए 9 दिसंबर को आधिकारिक दिवस घोषित किया गया।
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- लागू: दिसंबर 2005 में UNCAC प्रभावी हुआ, जिसने भ्रष्टाचार की रोकथाम, जांच, अभियोजन, और संपत्ति प्रत्यावर्तन (Asset Recovery) के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग का व्यापक ढांचा प्रदान किया।
- उद्देश्य: संयुक्त राष्ट्र द्वारा इस दिवस को मनाने का उद्देश्य राष्ट्रों, संस्थानों और नागरिकों को यह याद दिलाना है कि ईमानदारी केवल नैतिक मूल्य नहीं बल्कि सतत विकास, लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता और समान अवसरों की मूल शर्त है।
अंतरराष्ट्रीय भ्रष्टाचार विरोधी दिवस 2025 की थीम:
- 2025 का वैश्विक विषय (Theme) “Uniting with Youth Against Corruption: Shaping Tomorrow’s Integrity” युवाओं की निर्णायक भूमिका को रेखांकित करता है।
भ्रष्टाचार: स्वरूप, प्रभाव और वैश्विक आंकड़े
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परिभाषा: सत्ता या पद के दुरुपयोग द्वारा निजी लाभ प्राप्त करना ही भ्रष्टाचार है। इसके रूप— घूस, धोखाधड़ी, गबन, प्रभाव-खरीद (Influence Peddling) है।
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- प्रभाव: यह सीधे तौर पर आर्थिक और नैतिक मूल्यों को कमजोर करता हैं। यह शिक्षा, स्वास्थ्य, अवसंरचना और सामाजिक सुरक्षा जैसे क्षेत्रों को गंभीर रूप से प्रभावित करता है।
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वैश्विक नुकसान: UNODC और अन्य अंतरराष्ट्रीय स्रोतों के अनुसार: हर वर्ष 1 ट्रिलियन डॉलर रिश्वत में खर्च होता है। लगभग 2.6 ट्रिलियन डॉलर, अर्थात वैश्विक GDP का 5%, भ्रष्टाचार में नष्ट होता है।
भारत में भ्रष्टाचार विरोधी ढाँचा:
- भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (2018 संशोधन सहित): यह रिश्वत लेने के साथ-साथ रिश्वत देने को भी दंडनीय बनाता है तथा भ्रष्टाचार से अर्जित संपत्ति की जब्ती और निश्चित समय में मुकदमे का प्रावधान करता है।
- लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम, 2013: प्रधानमंत्री सहित उच्च पदस्थ अधिकारियों के खिलाफ शिकायतों की जाँच हेतु स्वतंत्र लोकपाल/लोकायुक्त की व्यवस्था।
- धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (PMLA): अवैध धन को वैध बनाने की प्रक्रिया पर प्रतिबंध तथा संपत्ति की कुर्की का प्रावधान।
- सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005: पारदर्शिता बढ़ाने और नागरिकों को सरकारी सूचनाओं तक पहुँच का अधिकार प्रदान किया।
- कंपनी अधिनियम, 2013: कॉर्पोरेट गवर्नेंस, विजिलेंस मैकेनिज्म और व्हिसलब्लोअर सुरक्षा को अनिवार्य करता है।
भ्रष्टाचार रोकने संबंधी प्रमुख संस्थाएँ:
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केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC): 1964 में स्थापित, यह प्रधान अखंडता संस्था है जो सतर्कता प्रशासन की निगरानी करती है।
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केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI): केंद्रीय अधिकारियों और आर्थिक अपराधों की जांच की मुख्य एजेंसी।
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प्रवर्तन निदेशालय (ED): PMLA के अंतर्गत मनी लॉन्ड्रिंग मामलों की जांच।
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गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (SFIO): कंपनी धोखाधड़ी और वित्तीय अपराधों की जांच।
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नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG): सार्वजनिक वित्त का लेखा-जोखा और वित्तीय अनियमितताओं का प्रकटीकरण।
प्रणालीगत सुधार:
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ई-गवर्नेंस: ई-प्रोक्योरमेंट, GeM पोर्टल, भूमि रिकॉर्ड डिजिटाइजेशन आदि ने रिश्वतखोरी की संभावनाएँ कम कीं है।
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डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT): कल्याणकारी योजनाओं में लीकेज रोकते हुए लाभ सीधे पात्र व्यक्ति तक पहुँचता है।
