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छठ महापर्व और दिवाली का UNESCO ICH सूची में नामांकन (Nomination of Chhath Mahaparva and Diwali in UNESCO ICH List) | UPSC Preparation

Nomination of Chhath Mahaparva and Diwali in UNESCO ICH List

Nomination of Chhath Mahaparva and Diwali in UNESCO ICH List

संदर्भ:

हाल ही में भारत ने छठ महापर्व और दिवाली को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (UNESCO Intangible Cultural Heritage) की सूची में शामिल करने के लिए नामांकित किया है, जिस पर अंतिम निर्णय 8-13 दिसंबर, 2025 तक आयोजित होने वाली यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत समिति की 20वीं बैठक में किया जाएगा।

छठ महापर्व और दीवाली का नामांकन 2025

  • छठ महापर्व: छठ महापर्व भारत की सबसे प्राचीन, पर्यावरण-आधारित और सामुदायिक परंपराओं में एक है, जो सूर्य देव और छठी मैया को समर्पित है। यह पर्व सरलता, शुद्धता, पर्यावरण संरक्षण, तथा सामुदायिक एकजुटता का प्रतीक है। बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और वैश्विक प्रवासी समुदाय इसे बड़े पैमाने पर मनाते हैं। भारत ने इसका बहुराष्ट्रीय नामांकन तैयार किया है जिसमें यूएई, सुरिनाम, नीदरलैंड जैसे देश साझेदार हैं।

  • दीवाली: दीवाली प्रकाश का पर्व है, जो अंधकार पर प्रकाश और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। इसे विश्वभर में हिंदू, जैन, सिख और कुछ बौद्ध समुदाय मनाते हैं। दीवाली सामाजिक एकता, घर–परिवार की जुड़ाव भावना और सांस्कृतिक उत्सव परंपराओं को मजबूत करती है। इसके नामांकन का उद्देश्य इसके वैश्विक प्रभाव, सांस्कृतिक संदेश, और अंतर-पीढ़ी हस्तांतरण को सुरक्षित करना है।

भारत द्वारा यूनेस्को की 20वीं ICH समिति की मेजबानी

  • परिचय: भारत 8–13 दिसंबर 2025 तक नई दिल्ली में यूनेस्को की 20वीं अंतर-सरकारी समिति (ICH Committee) की मेजबानी करेगा। यह पहला अवसर है, जब भारत 2003 कन्वेंशन के अनुमोदन के 20 वर्ष पूरे होने के अवसर पर इस वैश्विक सांस्कृतिक मंच की मेजबानी कर रहा है। 
  • पृष्ठभूमि: यूनेस्को ने 17 अक्टूबर 2003 को पेरिस में हुए अपने 32वें महासम्मेलन में अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा हेतु कन्वेंशन अपनाया। इसका उद्देश्य वैश्वीकरण, सामाजिक परिवर्तन और संसाधनों की कमी के कारण खतरे में आई पारंपरिक कलाओं, सामाजिक प्रथाओं, अनुष्ठानों और कौशलों के संरक्षण को बढ़ावा देना था। 
  • कार्य: अंतर-सरकारी समिति 2003 कन्वेंशन के उद्देश्यों को आगे बढ़ाती है। यह सुरक्षा उपायों की निगरानी, ICH फंड के उपयोग की योजना और यूनेस्को सूचियों में नामांकन जैसे कार्य करती है। समिति सदस्य देशों द्वारा भेजी गई आवधिक रिपोर्टों की समीक्षा भी करती है।

भारत की मेजबानी का रणनीतिक उद्देश्य:

  • भारत इस आयोजन के माध्यम से अपनी राष्ट्रीय ICH सुरक्षा मॉडल—संस्थागत सहयोग, समुदाय-आधारित संरक्षण, प्रलेखन और सूचीकरण—को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करेगा। 
  • भारत का लक्ष्य अंतर्राष्ट्रीय सहयोग बढ़ाना, वैश्विक सांस्कृतिक कूटनीति को मजबूत करना, युवाओं में विरासत चेतना को प्रोत्साहित करना तथा अमूर्त विरासत को सतत विकास, आजिविका और सामाजिक सामंजस्य से जोड़ना है। 

भारत की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत:

  • यूनेस्को सूची: अब तक भारत के 15 तत्व यूनेस्को की प्रतिनिधि सूची में शामिल किए जा चुके हैं, जिनमें कुटियाट्टम, रामलीला, कुंभ मेला, वेदिक मंत्रोच्चार, गरबा, दुर्गा पूजा, योग, और कालबेलिया नृत्य जैसे विविध तत्व शामिल हैं।

  • राष्ट्रीय प्रयास: भारत की विशाल ICH विरासत को संरक्षित करने के लिए संस्कृति मंत्रालय ने “भारत की अमूर्त विरासत और विविध सांस्कृतिक परंपराओं की सुरक्षा योजना” प्रारंभ की। यह कलाकारों को कौशल विकास और यूनेस्को नामांकन डोजियर तैयार करने में सहायता प्रदान करती है। संगीत नाटक अकादमी (SNA) क्षमता निर्माण और जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करती है।

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