IMF recognizes UPI as the world largest real-time payment system
संदर्भ:
हाल ही में, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने आधिकारिक तौर पर भारत के एकीकृत भुगतान इंटरफेस (यूपीआई) को लेनदेन की मात्रा के हिसाब से दुनिया की सबसे बड़ी वास्तविक समय खुदरा भुगतान प्रणाली के रूप में मान्यता दी है। यह भारत की डिजिटल क्रांति की एक बड़ी सफलता है और देश के मजबूत डिजिटल भुगतान बुनियादी ढांचे का प्रमाण है।
एकीकृत भुगतान इंटरफ़ेस (UPI):
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परिचय: एकीकृत भुगतान इंटरफ़ेस (UPI) भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) द्वारा विकसित एक रीयल-टाइम भुगतान प्रणाली है, जो उपयोगकर्ताओं को अपने स्मार्टफोन के माध्यम से बैंक खातों के बीच तुरंत धन हस्तांतरित करने की सुविधा देती है।
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स्थापना: NPCI की स्थापना अप्रैल 2009 में भारतीय भुगतान प्रणाली को एकीकृत करने और डिजिटल लेन-देन को सुरक्षित एवं सरल बनाने के उद्देश्य से की गई। जिसके बाद 11 अप्रैल 2016 को तब के RBI गवर्नर डॉ. रघुराम राजन ने UPI को 21 सदस्य बैंकों के साथ पायलट रूप में लॉन्च किया।
UPI की मुख्य विशेषताएं:
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सिंगल-विंडो मोबाइल एप्लिकेशन: UPI कई बैंक खातों को एक ही मोबाइल एप्लिकेशन (जैसे BHIM, Google Pay, PhonePe, आदि) में जोड़ता है, जिससे उपयोगकर्ताओं को अलग-अलग बैंक ऐप्स की आवश्यकता नहीं होती है।
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वर्चुअल पेमेंट एड्रेस (VPA): यह एक अनूठा पहचानकर्ता (जैसे आपकानाम@बैंककानाम) का उपयोग करता है, जिससे उपयोगकर्ताओं को लेनदेन के लिए संवेदनशील बैंक खाता विवरण, जैसे खाता संख्या या IFSC कोड, साझा करने की आवश्यकता नहीं होती है।
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तत्काल भुगतान: UPI वास्तविक समय में (real-time) धन हस्तांतरण को सक्षम बनाता है, जिससे पारंपरिक तरीकों की तुलना में लेनदेन तुरंत 24/7 उपलब्धता के साथ पूरे हो जाते हैं।
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टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA): सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए, लेनदेन को एक अद्वितीय UPI PIN (4 या 6 अंकों का पासवर्ड) के माध्यम से प्रमाणित किया जाता है, जिसे केवल खाताधारक जानता है।
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QR कोड-आधारित भुगतान: उपयोगकर्ता दुकानों या सेवा प्रदाताओं पर भुगतान करने के लिए QR कोड को आसानी से स्कैन कर सकते हैं, जिससे मैन्युअल विवरण दर्ज करने की आवश्यकता समाप्त हो जाती है।
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अन्य सुविधाएं: इसमें बिल भुगतान, मोबाइल रिचार्ज, P2P (व्यक्ति-से-व्यक्ति) और P2M (व्यक्ति-से-व्यापारी) भुगतान, और आवर्ती भुगतान के लिए ‘ऑटोपे’ (AutoPay) जैसी सुविधाएं भी शामिल हैं।
UPI के नए प्रारूप:
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BHIM ऐप लॉन्च (2016): नोटबंदी के बाद दिसंबर 2016 में BHIM ऐप लॉन्च किया गया जिसने UPI की पहुंच गाँव–कस्बे तक बढ़ाई और वित्तीय समावेशन को तेज किया।
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UPI 2.0 (2018): 16 अगस्त 2018 को लॉन्च हुए UPI 2.0 के माध्यम से ओवरड्राफ्ट खाते लिंक, वन-टाइम मैंडेट, इनवॉइस प्रस्तुतिकरण जैसी उन्नत सुविधाएँ जोड़ी गई है।
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UPI 123PAY (2022): 8 मार्च 2022 को UPI 123PAY ने 40 करोड़ फीचर फोन उपयोगकर्ताओं को डिजिटल भुगतान प्रणाली से जोड़ दिया।
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UPI Lite और ऑफलाइन भुगतान (2022): 20 सितंबर 2022 को UPI Lite शुरू हुआ जिसके माध्यम से कम-मूल्य ऑफलाइन भुगतान संभव हुए। यह ग्रामीण क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण बदलाव था।
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ई-रूपी वाउचर प्रणाली (2021): e-RUPI ने लक्षित कल्याणकारी भुगतान को लीक-प्रूफ डिजिटल वाउचर बना दिया।
- UPI Circle – परिवार, कर्मचारियों और गिग-इकोनॉमी के लिए भुगतान प्राधिकरण
- वॉइस UPI – AI आधारित बातचीत से भुगतान
UPI की वैश्विक मान्यता:
- IMF की जून 2025 रिपोर्ट ने UPI को विश्व का सबसे बड़ा रियल-टाइम भुगतान तंत्र घोषित किया गया। UPI का वैश्विक बाजार में 49% हिस्सा इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अद्वितीय बनाता है।
- UPI ने 129.3 बिलियन लेन-देन (2023) के साथ वैश्विक सबसे बड़ा भुगतान नेटवर्क बनकर चीन, ब्राज़ील और थाईलैंड को पीछे छोड़ा।
- UPI वर्तमान में— सिंगापुर, UAE, फ्रांस, नेपाल, भूटान, श्रीलंका, मॉरीशस जैसे देशों में उपलब्ध है, और और देशों में विस्तार जारी है।
- PIDF के तहत डिजिटल अवसंरचना के तहत 31 अक्टूबर 2025 तक 5.45 करोड़ डिजिटल टच-पॉइंट, 56.86 करोड़ QR कोड तैनात किए गए, जिससे ग्रामीण–शहरी अंतर कम हुआ।

