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गगनयान को धरती पर सुरक्षित लाने वाले ड्रोग पैराशूट का परीक्षण सफल (Drogue parachute test successfully to bring Gaganyaan back to Earth) | UPSC Preparation

Drogue parachute test successfully to bring Gaganyaan back to Earth

Drogue Parachute Qualification Test Successfully

संदर्भ: 

हाल ही में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने गगनयान मिशन के लिए ड्रोग पैराशूट तैनाती योग्यता परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे किए। ये परीक्षण चंडीगढ़ स्थित टर्मिनल बैलिस्टिक्स रिसर्च लैबोरेटरी (TBRL) के रेल ट्रैक रॉकेट स्लेज (RTRS) परिसर में किए गए। इन परीक्षणों का उद्देश्य पृथ्वी के वायुमंडल में पुनःप्रवेश के दौरान क्रू मॉड्यूल की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करना है।

ड्रोग पैराशूट प्रणाली का तकनीकी महत्व:

  • गगनयान क्रू मॉड्यूल में कुल 10 पैराशूटों की चार-स्तरीय प्रणाली है। इनमें ड्रोग पैराशूट का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि ये अत्यधिक वेग और वायुगतिकीय दबाव की स्थिति में तैनात होते हैं।
  • इनका कार्य क्रू मॉड्यूल को स्थिर करना और उसके वेग को इस स्तर तक कम करना है कि मुख्य पैराशूट सुरक्षित रूप से खुल सकें। 
  • ड्रोग पैराशूट 5.8 मीटर व्यास के शंक्वाकार रिबन प्रकार के होते हैं और पायरो-आधारित मोर्टार तंत्र से सटीक समय पर बाहर निकाले जाते हैं।
  • दिसंबर 2025 के परीक्षणों में ड्रोग पैराशूटों को उच्च गति तैनाती, भिन्न उड़ान मापदंडों और रीफ्ड इन्फ्लेशन तकनीक के साथ परखा गया।  
  • परीक्षणों से यह सिद्ध हुआ कि प्रणाली मानव-रेटिंग प्रमाणन की आवश्यकताओं को पूरा करती है, जो अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा के लिए अनिवार्य है।

गगनयान मिशन:

    • परिचय: गगनयान मिशन भारत का पहला मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन है, जिसका नेतृत्व भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) कर रहा है। गगनयान मिशन का लक्ष्य भारत की स्वदेशी मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षमता को प्रदर्शित करना है। 
    • उद्देश्य: गगनयान का लक्ष्य 3 सदस्यीय दल को 400 किलोमीटर की निम्न पृथ्वी कक्षा (LEO) में 3 दिनों के लिए भेजना और उन्हें भारतीय समुद्री जल में सुरक्षित उतारकर वापस लाना है। इस सफलता के साथ भारत, अमेरिका, रूस और चीन के बाद चौथा ऐसा देश बन जाएगा।

तकनीकी घटक

  • प्रक्षेपण यान (Launch Vehicle): इसके लिए LVM3 (Launch Vehicle Mark-3) का उपयोग किया जाएगा, जिसे ‘ह्यूमन रेटेड’ (Human-Rated) बनाया गया है। इसमें सॉलिड, लिक्विड और क्रायोजेनिक चरण शामिल हैं।
    • कक्षीय मॉड्यूल (Orbital Module): इसमें दो भाग शामिल हैं:
      • क्रू मॉड्यूल (Crew Module): जहाँ अंतरिक्ष यात्री रहेंगे। इसमें जीवन रक्षक प्रणाली और थर्मल सुरक्षा प्रणाली (TPS) लगी है।
      • सर्विस मॉड्यूल (Service Module): यह मॉड्यूल ऊर्जा और प्रणोदन (Propulsion) प्रदान करेगा।
    • क्रू एस्केप सिस्टम (Crew Escape System – CES): प्रक्षेपण के दौरान किसी भी आपात स्थिति में अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालने की एक महत्वपूर्ण सुरक्षा तकनीक।

मिशन की समयरेखा:

  • अगस्त 2025 में एकीकृत एयर ड्रॉप परीक्षण सफल रहा, जिसमें पैराशूट प्रणाली की क्रमिक कार्यप्रणाली सत्यापित की गई।
  • गगनयान-1 (G1) पहला मानव-रहित मिशन दिसंबर 2025 में प्रस्तावित है, जिसमें व्योममित्र नामक ह्यूमनॉइड रोबोट भेजा जाएगा। 
  • इसके बाद 2026 में दो और मानव-रहित मिशन होंगे। प्रथम मानवयुक्त मिशन (G4) का लक्ष्य 2027 रखा गया है, जिसमें तीन अंतरिक्ष यात्री लगभग 400 किमी निम्न पृथ्वी कक्षा में तीन दिन तक रहेंगे।

रणनीतिक और वैज्ञानिक महत्व:

  • सामरिक और तकनीकी आत्मनिर्भरता: भारत की ‘स्वदेशी’ तकनीक (जैसे ECLSS – पर्यावरण नियंत्रण और जीवन रक्षक प्रणाली) की क्षमता का प्रदर्शन।
  • भविष्य के लक्ष्य: यह मिशन 2035 तक ‘भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन’ और 2040 तक चंद्रमा पर मानव भेजने के भारत के रोडमैप का आधार है।
  • वैज्ञानिक अनुसंधान: सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण (Microgravity) में दवाओं के निर्माण और जैविक प्रयोगों के लिए नए रास्ते खुलेंगे।
  • अंतरराष्ट्रीय सहयोग: अंतरिक्ष यात्रियों के प्रशिक्षण के लिए रूस और अंतरिक्ष चिकित्सा के लिए फ्रांस के साथ सहयोग।

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