National Standard for Bomb Disposal System
संदर्भ:
हाल ही में भारत ने अपने सुरक्षा बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए बम निरोधक प्रणालियों (Bomb Disposal Systems) के लिए अपना पहला समर्पित मानक IS 19445:2025 अधिसूचित किया है। यह मानक गृह मंत्रालय (MHA) और डीआरडीओ (DRDO) की टर्मिनल बैलिस्टिक अनुसंधान प्रयोगशाला (TBRL) के अनुरोध पर विकसित किया गया है।
बम निरोधक प्रणाली के लिए राष्ट्रीय मानक के मुख्य प्रावधान:
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- उपकरणों का वर्गीकरण: यह मानक मुख्य रूप से तीन महत्वपूर्ण सुरक्षा उपकरणों—बम ब्लैंकेट, बम बास्केट और बम इनहिबिटर—के लिए विशिष्ट तकनीकी मानदंड निर्धारित करता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश भर के सुरक्षा बलों द्वारा उपयोग किए जाने वाले इन उपकरणों की गुणवत्ता और कार्यक्षमता में एकरूपता बनी रहे।
- विस्फोट प्रतिरोध और सुरक्षा क्षमता: मानक के तहत यह अनिवार्य है कि उपकरण एक निश्चित मात्रा के विस्फोटक (जैसे TNT) के धमाके को झेलने में सक्षम हों। इसमें विशेष रूप से ‘ब्लास्ट ओवरप्रेशर’ (हवा के दबाव का झटका) और विस्फोट से निकलने वाली घातक ऊर्जा को सोखने की क्षमता का कड़ा मूल्यांकन किया जाता है।
- छर्रा रोधी (Fragment Mitigation) मानक: यह प्रावधान सुनिश्चित करता है कि विस्फोट के दौरान निकलने वाले धातु के टुकड़े या छर्रे (Splinters) सुरक्षा घेरे को तोड़कर बाहर न निकलें। यह बम निरोधक दस्ते (BDS) के सदस्यों को घातक चोटों से बचाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- कठोर परीक्षण और मूल्यांकन प्रक्रिया: मानक के अनुसार, प्रत्येक उपकरण का परीक्षण डीआरडीओ (DRDO) की टर्मिनल बैलिस्टिक अनुसंधान प्रयोगशाला जैसी प्रमाणित लैब में किया जाना चाहिए। इसमें वास्तविक विस्फोटों के माध्यम से उपकरणों की सहनशक्ति की जांच की जाती है।
- अनिवार्य प्रमाणीकरण और लेबलिंग: इसके तहत प्रत्येक उत्पाद पर ISI मार्क और विस्तृत तकनीकी लेबल होना अनिवार्य है। इस लेबल पर उपकरण की अधिकतम विस्फोटक झेलने की क्षमता और उसकी ‘शेल्फ लाइफ’ (वैधता अवधि) स्पष्ट रूप से अंकित होनी चाहिए।
महत्व:
- यह मानक भारतीय निर्माताओं को स्पष्ट तकनीकी मानक प्रदान करता है, जिससे वे अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रतिस्पर्धी उपकरण भारत में ही बना सकेंगे।
- अब सशस्त्र बल, सीएपीएफ (CAPF) और राज्य पुलिस बल एक समान प्रदर्शन मानकों के आधार पर उपकरणों की खरीद कर सकेंगे, जिससे भ्रष्टाचार में कमी और गुणवत्ता में सुधार होगा।
- प्रमाणित उपकरणों के उपयोग से बम निरोधक दस्तों (BDS) के सदस्यों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी और जोखिम भरे अभियानों में उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा।
- घरेलू मानकों के वैश्विक स्तर के होने से भारतीय रक्षा कंपनियों के लिए इन प्रणालियों को दूसरे देशों को निर्यात करना आसान हो जाएगा।

