Historical Legacy of Netaji Subhas Chandra Bose

संदर्भ:
30 दिसंबर 1943 का दिन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय है। इसी दिन नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने अंडमान के पोर्ट ब्लेयर में पहली बार भारतीय भूमि पर तिरंगा फहराकर भारत की ‘आज़ाद हिंद सरकार’ की संप्रभुता की घोषणा की थी। वर्ष 2025 उसकी 82वीं वर्षगांठ मनाई गई।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि:
- द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान, जापानी सेना ने दक्षिण-पूर्व एशिया में ब्रिटिश ठिकानों पर तेज़ी से कब्ज़ा किया। इसी क्रम में, मार्च 1942 में जापानियों ने अंडमान और निकोबार द्वीपों पर कब्ज़ा कर लिया।
- 21 अक्टूबर 1943 को सिंगापुर में नेताजी ने आज़ाद हिंद सरकार (Arzi Hukumat-e-Azad Hind) की स्थापना की घोषणा की। जिसे जापान, जर्मनी और इटली सहित कई धुरी राष्ट्रों (Axis Powers) का समर्थन था।
- इसी क्रम में जापान ने औपचारिक रूप से अंडमान और निकोबार द्वीपों का प्रशासन नेताजी की अंतरिम सरकार को सौंपने का निर्णय लिया।
- जिसके बाद नेताजी 29 दिसंबर 1943 को पोर्ट ब्लेयर पहुँचे, जहाँ उनका भव्य स्वागत हुआ। 30 दिसंबर की सुबह, पोर्ट ब्लेयर के जिमखाना ग्राउंड (नेताजी स्टेडियम) में उन्होंने औपचारिक रूप से तिरंगा फहराया।
- नेताजी ने अंडमान का नाम ‘शहीद द्वीप’ और निकोबार का नाम ‘स्वराज द्वीप’ रखने की घोषणा की। साथ ही उन्होंने जनरल ए.डी. लोगनाथन को इन द्वीपों का गवर्नर नियुक्त किया।
नेताजी सुभाष चंद्र बोस का परिचय:
- जन्म: 23 जनवरी, 1897 को कटक (ओडिशा) में हुआ।
- सिविल सेवा: उन्होंने 1920 में प्रतिष्ठित भारतीय सिविल सेवा (ICS) परीक्षा में चौथा स्थान प्राप्त किया, लेकिन जलियांवाला बाग हत्याकांड से क्षुब्ध होकर 1921 में इस्तीफा दे दिया।
- गुरु: वे स्वामी विवेकानंद के विचारों से गहरे प्रभावित थे और चित्तरंजन दास (C.R. Das) को अपना राजनीतिक गुरु मानते थे।
- अध्यक्षता: वे 1938 में हरिपुरा और 1939 में त्रिपुरी अधिवेशन में कांग्रेस के अध्यक्ष चुने गए।
- मतभेद: गांधीजी के साथ उनके वैचारिक मतभेद (अहिंसा बनाम सशस्त्र संघर्ष) के कारण उन्होंने 1939 में इस्तीफा दे दिया और फॉरवर्ड ब्लॉक की स्थापना की।
- योजना समिति: 1938 में उन्होंने भारत के आर्थिक विकास के लिए ‘राष्ट्रीय योजना समिति’ (National Planning Committee) के गठन की वकालत की।
- विदेशी गठबंधन: द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान, उन्होंने जर्मनी और जापान के साथ मिलकर ब्रिटिश शासन के खिलाफ सैन्य गठबंधन बनाया।
- प्रमुख नारे: “दिल्ली चलो“, “जय हिंद“, और “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा“।
- समाजवाद: वे सोवियत मॉडल पर आधारित एक मजबूत, केंद्रीकृत और समाजवादी राज्य के पक्षधर थे।
- महिला सशक्तिकरण: उन्होंने INA में ‘रानी झाँसी रेजिमेंट’ बनाकर महिलाओं को युद्ध क्षेत्र में सक्रिय भूमिका दी।
- धर्मनिरपेक्षता: उनकी सेना और सरकार में सभी धर्मों और क्षेत्रों के लोगों की एकता का बेजोड़ उदाहरण था।
समकालीन संदर्भ:
- 2018 में सरकार ने ध्वजारोहण की 75वीं वर्षगांठ पर रॉस द्वीप का नाम ‘नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वीप’, नील द्वीप का ‘शहीद द्वीप’ और हैवलॉक द्वीप का नाम ‘स्वराज द्वीप’ कर दिया।
- दिल्ली के लाल किले में नेताजी और INA को समर्पित एक संग्रहालय स्थापित किया गया है। साथ ही अब नेताजी की जयंती (23 जनवरी) को ‘पराक्रम दिवस’ के रूप में मनाया जाता है।
- 30 दिसंबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पोर्ट ब्लेयर की ऐतिहासिक घटना की 82वीं वर्षगांठ पर श्रद्धांजलि अर्पित की। साथ ही जम्मू में “नेताजी सुभाष चंद्र बोस फ्लैग पॉइंट” का उद्घाटन किया गया।
