Market Access Support

संदर्भ:
हाल ही में भारत सरकार ने भारतीय निर्यातकों, विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) और पहली बार निर्यात करने वाले उद्यमियों की वैश्विक बाजार तक पहुंच को सशक्त बनाने के लिए निर्यात प्रोत्साहन मिशन (Export Promotion Mission – EPM) के तहत मार्केट एक्सेस सपोर्ट (MAS) इंटरवेंशन लॉन्च किया है।
मार्केट एक्सेस सपोर्ट (MAS) क्या है?
- MAS इंटरवेंशन एक सरकारी कार्यक्रम है, जो भारतीय निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विस्तार करने के लिए वित्तीय और संस्थागत सहायता प्रदान करता है।
- यह विशेष रूप से खरीदार जुड़ाव (buyer engagement) और ब्रांड इंडिया की वैश्विक उपस्थिति को मजबूत करने पर केंद्रित है।
- इसे ‘निर्यात दिशा’ (NIRYAT DISHA) उप-योजना के तहत लागू किया जा रहा है, जो गैर-वित्तीय निर्यात सक्षमकों पर केंद्रित है।
- यह वाणिज्य विभाग, MSME मंत्रालय और वित्त मंत्रालय द्वारा संयुक्त रूप से भारतीय मिशनों, निर्यात प्रोत्साहन परिषदों (EPCs) और वस्तु बोर्डों के समन्वय में संचालित है।
- MAS घटक के लिए 2025-31 की अवधि के लिए ₹4,531 करोड़ आवंटित किए गए हैं। चालू वित्त वर्ष (2025-26) के लिए ₹500 करोड़ रखे गए हैं।
MAS की मुख्य विशेषताएं:
- बायर-सेलर मीट (BSM) और व्यापार प्रतिनिधिमंडल: प्रत्येक कार्यक्रम के लिए ₹5 करोड़ तक की सहायता।
- रिवर्स बायर-सेलर मीट (RBSM): भारत में आयोजित होने वाले मेगा कार्यक्रमों के लिए ₹10 करोड़ तक की वित्तीय सहायता।
- हवाई किराया सहायता: ₹75 लाख तक के वार्षिक निर्यात टर्नओवर वाले छोटे निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए आंशिक हवाई किराया सहायता दी जाएगी।
- MSME पर ध्यान: समर्थित कार्यक्रमों में कम से कम 35% MSME भागीदारी अनिवार्य है। एक सामान्य निर्यातक एक वर्ष में 3 BSM कार्यक्रमों के लिए सहायता प्राप्त कर सकता है, जबकि MSME के लिए यह सीमा 4 कार्यक्रमों तक है।
- योजना: प्रमुख बाजार पहुंच कार्यक्रमों के लिए 3-5 साल का अग्रिम कैलेंडर तैयार किया जाएगा। इससे निर्यातक अपनी भागीदारी की योजना पहले से बना सकेंगे।
- डिजिटल प्रशासन: प्रस्ताव प्रस्तुत करने से लेकर फंड रिलीज तक की पूरी प्रक्रिया trade.gov.in पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन होगी। प्रत्येक कार्यक्रम के बाद ऑनलाइन फीडबैक अनिवार्य है।
महत्व:
- प्रवेश बाधाओं में कमी: पहली बार निर्यात करने वालों और MSMEs के लिए अंतरराष्ट्रीय मेलों में भाग लेने की उच्च लागत एक बड़ी बाधा है। MAS इस वित्तीय जोखिम को कम कर सकता है।
- गैर-टैरिफ बाधाओं का समाधान: इसके तहत ‘ट्रेस’ (Trace) नामक उप-घटक अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप परीक्षण और प्रमाणन लागत में सहायता प्रदान करेगा।
- तकनीकी बल: सरकार जल्द ही प्रौद्योगिकी-गहन और सनराइज क्षेत्रों (जैसे अर्धचालक, रक्षा) के लिए ‘प्रूफ-ऑफ-कॉन्सेप्ट’ और उत्पाद प्रदर्शनों का एक नया घटक अधिसूचित करेगी।
