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भोरमदेव कॉरिडोर विकास परियोजना (Bhoramdev Corridor Development Project) | UPSC Preparation

Bhoramdev Corridor Development Project

Bhoramdev Corridor Development Project

संदर्भ:

हाल ही में केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ के कबीरधाम (कवर्धा) जिले में भोरमदेव कॉरिडोर विकास परियोजना की आधारशिला रखी। जिसे केंद्र सरकार की स्वदेश दर्शन योजना 2.0 के अंतर्गत विकसित किया जा रहा है।

भोरमदेव कॉरिडोर विकास परियोजना का परिचय:

  • भोरमदेव कॉरिडोर विकास परियोजना छत्तीसगढ़ के भोरमदेव मंदिर (छत्तीसगढ़ के खजुराहो) के आसपास के क्षेत्र के सांस्कृतिक और पर्यटन विकास के लिए केंद्र सरकार की योजना के तहत शुरू की गई एक पहल है। 
  • इस परियोजना का उद्देश्य भोरमदेव मंदिर परिसर और आसपास के प्रमुख धार्मिक-पुरातत्विक स्थलों को एक एकीकृत पर्यटन सर्किट में जोड़ना, आधुनिक सुविधाओं के साथ राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय मानचित्र पर पहचान दिलाना है।
  • इस परियोजना की कुल लागत लगभग ₹146.40 करोड़ है। इसे केंद्र सरकार की ‘स्वदेश दर्शन योजना 2.0’ के अंतर्गत विकसित किया जा रहा है।
  • इस कॉरिडोर का विकास वाराणसी के काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के मॉडल पर किया जाएगा, जिसमें प्राचीनता और आधुनिकता का अनूठा समन्वय होगा।
  • कॉरिडोर के दायरे में मुख्य भोरमदेव मंदिर के साथ साथ मड़वा महल, छेरकी महल, रामचुआ और सरोधा दादर जैसे निकटवर्ती पर्यटन स्थलों को एक ‘इंटीग्रेटेड सर्किट’ के रूप में जोड़ा जाएगा।
  • इसमें श्रद्धालुओं के लिए सुगम पहुंच और भव्य प्रवेश द्वार, बृहत पार्किंग क्षेत्र, आधुनिक कन्वेंशन सेंटर और ट्राइबल कैफेटेरिया, तालाबों का सौंदर्यीकरण और घाटों का निर्माण और डिजिटल इंटरप्रिटेशन सेंटर का निर्माण किया जाएगा।

भोरमदेव मंदिर के बारे मे: 

  • भोरमदेव मंदिर सतपुड़ा की मैकल पर्वत श्रेणियों और सांकरी नदी के तट पर स्थित है।
  • इस का निर्माण 11वीं शताब्दी (1089 ई.) में फणि नागवंश के राजा गोपाल देव द्वारा कराया गया था।
  • यह मंदिर नागर शैली का उत्कृष्ट उदाहरण है। मंदिर की बाहरी दीवारों पर उकेरी गई कामोत्तेजक और धार्मिक मूर्तियां चंदेल स्थापत्य कला की याद दिलाती हैं।
  • यह भगवान शिव को समर्पित एक प्रमुख शैव केंद्र है, जहां आदिवासी परंपराओं का भी गहरा प्रभाव दिखाई देता है।

महत्व:

  • पर्यटन को बढ़ावा: कॉरिडोर बनने से इस क्षेत्र में पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी, जिससे कबीरधाम जिले की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
  • रोजगार सृजन: स्थानीय स्तर पर होम-स्टे, गाइड और हस्तशिल्प उद्योग के माध्यम से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
  • विरासत का संरक्षण: 1000 वर्ष पुरानी इस ऐतिहासिक धरोहर को आधुनिक तकनीक से संरक्षित किया जा सकेगा।
  • कनेक्टिविटी: छत्तीसगढ़ सरकार ने पर्यटन को उद्योग का दर्जा दिया है, जिससे इस परियोजना को निजी निवेश और बेहतर कनेक्टिविटी का लाभ मिलेगा।

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