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भारतीय फार्माकोपिया 2026 का 10वां संस्करण जारी (10th edition of Indian Pharmacopoeia 2026 released) | Apni Pathshala

10th edition of Indian Pharmacopoeia 2026 released

10th edition of Indian Pharmacopoeia 2026 released

संदर्भ:

हाल ही में केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री श्री जे.पी. नड्डा ने नई दिल्ली में भारतीय फार्माकोपिया (IP) 2026 का 10वां संस्करण जारी किया। यह संस्करण भारत के फार्मास्युटिकल मानकों को वैश्विक स्तर पर सुदृढ़ करने के विजन को साकार करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। 

भारतीय फार्माकोपिया क्या हैं?

  • भारतीय फार्माकोपिया (Indian Pharmacopoeia – IP) भारत में दवाओं की गुणवत्ता, शुद्धता और प्रभावकारिता के लिए निर्धारित आधिकारिक मानकों का एक कानूनी दस्तावेज है। 
  • इसका प्रकाशन स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के तत्वावधान में भारतीय फार्माकोपिया आयोग (IPC) द्वारा किया जाता है।
  • इसमें दवाओं, उनके सक्रिय तत्वों (API), सहायक पदार्थों (Excipients), और चिकित्सा उपकरणों के लिए विस्तृत ‘मोनोग्राफ’ (Monographs) होते हैं।
  • ‘औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940’ के तहत, भारत में निर्मित या बेची जाने वाली सभी दवाओं को आईपी (IP) के मानकों का पालन करना अनिवार्य है। 
  • भारतीय फार्माकोपिया का प्रथम संस्करण (1955) में डॉ. आर. एन. चोपड़ा की अध्यक्षता में तैयार किया गया। इसके बाद 1966, 1985, 1996, 2007, 2010, 2014, 2018 और 2022 (9वां संस्करण) जारी किए गए।

भारतीय फार्माकोपिया 2026 की मुख्य विशेषताएं:

  • नए मोनोग्राफ की संख्या: इस संस्करण में 121 नए मोनोग्राफ जोड़े गए हैं, जिससे कुल मोनोग्राफ की संख्या बढ़कर 3,340 हो गई है।
  • रक्त घटकों का समावेश: इतिहास में पहली बार 20 रक्त घटक मोनोग्राफ (Blood Component Monographs) शामिल किए गए हैं। यह थैलेसीमिया, हीमोफिलिया और एनीमिया जैसी बीमारियों के अनुसंधान और उपचार में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा।
  • प्रमुख औषधियां: नए मोनोग्राफ में एंटी-टीबी (Anti-TB), एंटी-डायबिटिक और कैंसर रोधी दवाओं पर विशेष ध्यान दिया गया है।
  • वैश्विक सामंजस्य (Harmonization): 18 सामान्य अध्याय और 22 एक्सीपिएंट मोनोग्राफ को वैश्विक फार्माकोपियल चर्चा समूह (PDG) के मानकों के अनुरूप बनाया गया है, जिसमें अमेरिकी (USP), यूरोपीय (EP) और जापानी (JP) फार्माकोपिया शामिल हैं।
  • डिजिटलीकरण: यह संस्करण हार्डबाउंड फिजिकल कॉपी के साथ-साथ ऑनलाइन सब्सक्रिप्शन प्रारूप में भी उपलब्ध है।
  • अंतर्राष्ट्रीकरण: भारतीय फार्माकोपिया को अब 19 देशों (मुख्यतः ग्लोबल साउथ) द्वारा मान्यता दी गई है, जो भारत की नियामक शक्ति और वैज्ञानिक उत्कृष्टता को दर्शाता है।

भारतीय फार्माकोपिया आयोग (IPC):

  • भारतीय फार्माकोपिया आयोग (IPC) स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त संस्थान है, जिसकी स्थापना 1956 में हुई थी।
  • IPC ‘भारत के फार्माकोविजिलेंस कार्यक्रम’ (PvPI) के लिए राष्ट्रीय समन्वय केंद्र के रूप में कार्य करता है। 
  • यह अंतरराष्ट्रीय मानकों (जैसे USP, BP, EP) के साथ भारतीय मानकों का तालमेल बिठाने के लिए वैश्विक निकायों के साथ सहयोग करता है। 
  • IPC की त्रि-स्तरीय संरचना है, जिसमें एक जनरल बॉडी, गवर्निंग बॉडी और साइंटिफिक बॉडी शामिल होती है।
  • इसके अध्यक्ष केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण सचिव होते हैं। इसके मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) ‘सचिव-सह-वैज्ञानिक निदेशक’ होते हैं।
  • हाल ही में केंद्र सरकार ने उल्लेख किया कि भारत की वैश्विक फार्माकोविजिलेंस रैंकिंग 123वें स्थान (2014) से सुधरकर 8वें स्थान (2025) पर पहुंच गई है।

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