Live Events Development Cell

संदर्भ:
भारत सरकार ने देश के तेजी से बढ़ते लाइव इवेंट मार्केट को विनियमित करने और इसे वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए Live Events Development Cell (LEDC) की स्थापना की थी। जिसके अंतर्गत भारत का संगठित लाइव इवेंट बाजार ₹20,861 करोड़ के मूल्य तक पहुँच चुका है।
लाइव इवेंट्स डेवलपमेंट सेल (LEDC) क्या है?
- LEDC एक नोडल इकाई है जिसे सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के सहयोग से स्थापित किया गया है।
- इसका प्राथमिक उद्देश्य भारत में संगीत कार्यक्रमों (Music Concerts), खेल आयोजनों, थिएटर, कॉर्पोरेट इवेंट्स और सांस्कृतिक उत्सवों के आयोजन को सुव्यवस्थित करना है।
- यह “एकल-खिड़की सुविधा तंत्र” के रूप में कार्य करता है, जिसका लक्ष्य इवेंट आयोजकों के लिए प्रक्रियाओं और नियामक बाधाओं को सरल बनाना है।
- यह सेल केंद्र और राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों, उद्योग संघों (जैसे संगीत अधिकार समाज) और प्रमुख इवेंट कंपनियों को एक साथ लाता है।
- इसमें ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बेहतर बनाने के लिए ज़ोमैटो सहित निजी हितधारकों के साथ एक संयुक्त कार्य समूह भी बनाया गया है।
- अनुमतियों (अग्नि, यातायात, नगरपालिका, आदि) के लिए ‘इंडिया सिने हब (ICH)’ पर एक सिंगल-विंडो क्लीयरेंस सिस्टम विकसित करना इसका उद्देश्य है।
- इस पहल का उद्देश्य देश की “कॉन्सर्ट इकोनॉमी” को मजबूत करना और प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करके भारत को 2030 तक वैश्विक स्तर पर एक प्रमुख लाइव मनोरंजन गंतव्य के रूप में स्थापित करना है।
स्थापना की आवश्यकता:
- बाजार मूल्य: ₹20,861 करोड़ का मौजूदा मूल्य यह दर्शाता है कि इसमें पर्यटन, होटल उद्योग और परिवहन के लिए व्यापक अवसर हैं। यह सालाना 15% की दर से बढ़ रहा है और 18% की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) बनाए रखने की उम्मीद है।
- अनुपस्थित नियामक ढांचा: अब तक भारत में लाइव इवेंट्स के लिए कोई एकल नियामक संस्था (Single Regulator) नहीं थी, जिससे अनुमति प्राप्त करने में देरी और अव्यवस्था होती थी।
- वैश्विक मंच पर भारत: कोल्डप्ले (Coldplay) और दिलजीत दोसांझ जैसे अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय कलाकारों के शो की भारी मांग ने सुदृढ़ इवेंट इंफ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकता पर बल दिया।
महत्व:
- आर्थिक इंजन: लाइव इवेंट उद्योग वर्तमान में 1 करोड़ से अधिक नौकरियां देने में सक्षम है। एक बड़ा इवेंट 15,000 से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा कर सकता है।
- संबंधित क्षेत्रों का विकास: इसका आतिथ्य (hospitality), परिवहन, पर्यटन और संबद्ध सेवाओं पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है।
- टियर शहरों में विकास: इस पहल से विशाखापत्तनम, शिलांग और गुवाहाटी जैसे छोटे शहर प्रमुख विकास केंद्र के रूप में उभर रहे हैं, जिससे क्षेत्रीय आर्थिक असंतुलन कम हो रहा है।
- सांस्कृतिक प्रभाव: वैश्विक और घरेलू कलाकारों की उपस्थिति बाजार की परिपक्वता को दर्शाती है और भारत की “सॉफ्ट पावर” और सांस्कृतिक प्रभाव को बढ़ाती है।
