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औद्योगिक अनुसंधान एवं विकास प्रोत्साहन कार्यक्रम (Industrial Research and Development Promotion Programme) | UPSC

Industrial Research and Development Promotion Programme

Industrial Research and Development Promotion Programme

संदर्भ:

हाल ही में केंद्र सरकार ने डीप-टेक स्टार्टअप्स को औद्योगिक अनुसंधान और विकास प्रोत्साहन (IRDP) कार्यक्रम के तहत मान्यता प्राप्त करने के लिए अनिवार्य “तीन साल के अस्तित्व” की शर्त को समाप्त करने की घोषणा की है। यह नीतिगत बदलाव उभरती हुई प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में भारत की वैश्विक नेतृत्व की आकांक्षाओं को स्पष्ट करता है। 

औद्योगिक अनुसंधान और विकास प्रोत्साहन कार्यक्रम:

  • वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग (DSIR) द्वारा संचालित औद्योगिक अनुसंधान और विकास प्रोत्साहन कार्यक्रम (Industrial Research and Development Promotion Programme – IRDPP) भारत में औद्योगिक नवाचार और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए एक प्रमुख नीतिगत ढांचा है। 
  • IRDPP का प्राथमिक लक्ष्य देश के भीतर औद्योगिक अनुसंधान एवं विकास (R&D) की संस्कृति विकसित करना और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा देना है। 

प्रमुख उप-योजनाएं:

  • इन-हाउस R&D इकाइयों की मान्यता (RDI): कॉर्पोरेट क्षेत्र की अनुसंधान इकाइयों को बेंचमार्किंग और मान्यता प्रदान करना।
  • वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान संगठन (SIRO): गैर-व्यावसायिक संगठनों (अस्पतालों, विश्वविद्यालयों, आदि) को वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए मान्यता देना।
  • सार्वजनिक वित्त पोषित अनुसंधान संस्थान (PFRI): IIT, IISc और क्षेत्रीय इंजीनियरिंग कॉलेजों जैसे संस्थानों को प्रोत्साहन देना।
  • राजकोषीय प्रोत्साहन (Fiscal Incentives): वैज्ञानिक अनुसंधान पर होने वाले खर्च पर कर लाभ और आयात शुल्क में छूट प्रदान करना। 

प्रमुख राजकोषीय प्रोत्साहन:

  • सीमा शुल्क और उत्पाद शुल्क में छूट: R&D के लिए आयातित उपकरणों, उपभोग्य वस्तुओं और कलपुर्जों पर सीमा शुल्क (Customs Duty) में छूट मिलती है।
  • आयकर लाभ: आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 35(1)(ii) और (iii) के तहत अनुसंधान संगठनों को दिए गए दान पर कर छूट का प्रावधान है।
  • स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा: स्वदेशी रूप से विकसित और पेटेंट की गई तकनीकों पर आधारित उत्पादों के लिए उत्पाद शुल्क (Excise Duty) में तीन साल की छूट का प्रावधान (विशिष्ट शर्तों के तहत)। 

पात्रता:

  • पुरानी शर्त: पहले, किसी भी इकाई के लिए मान्यता प्राप्त करने हेतु तीन वित्तीय वर्षों का अस्तित्व अनिवार्य था। सरकार द्वारा तकनीकी परिपक्वता के आधार पर कठोर मूल्यांकन मानकों को बनाए रखने का प्रावधान था।
  • नई शर्त: जनवरी 2026 में, भारत सरकार ने डीप-टेक स्टार्टअप्स के लिए इस ‘तीन साल की अनिवार्यता’ को समाप्त कर दिया है। अब युवा स्टार्टअप्स अपनी स्थापना के शुरुआती चरण में ही इस कार्यक्रम का हिस्सा बनकर ₹1 करोड़ तक की वित्तीय सहायता प्राप्त कर सकते हैं। 

भारत का डीप-टेक इकोसिस्टम:

  • डीप-टेक स्टार्टअप्स वे होते हैं जो इंजीनियरिंग या वैज्ञानिक नवाचारों पर आधारित होते हैं, जैसे कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर्स, रोबोटिक्स, क्वांटम कंप्यूटिंग, और स्पेस-टेक। 
  • भारत वर्तमान में अपने सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का लगभग 0.7% अनुसंधान पर खर्च करता है, जिसे बढ़ाने का लक्ष्य है। 
  • सरकार ने हाल ही में ₹1 लाख करोड़ का RDI (Research, Development and Innovation) फंड घोषित किया है, जो दीर्घकालिक और कम ब्याज दर वाला ऋण प्रदान करेगा।
  • सरकार ने ‘Centres of Deep Tech Startups’ और ‘PRISM Network Platform‘ जैसी नई पहलें भी शुरू की हैं ताकि उद्योग और शिक्षा जगत के बीच तालमेल बढ़ाया जा सके। 

महत्व:

  • आत्मनिर्भर भारत: यह कार्यक्रम आयात पर निर्भरता कम करने और “मेक इन इंडिया” के तहत तकनीकी संप्रभुता (Technology Sovereignty) प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण है।
  • नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र: इनोवेशन पाइपलाइन: यह सुधार भारत की नवाचार पाइपलाइन को मजबूत करेगा, जिससे प्रयोगशालाओं (Labs) से बाजार (Market) तक तकनीक पहुँचाने की प्रक्रिया तेज होगी।

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